बिहार विधानसभा चुनाव की गर्मागर्मी के बीच, महागठबंधन (MGB) के वरिष्ठ नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप लगाया है। इस आरोप को तब और बल मिला, जब चुनाव के बीच में ही वीवीपैट पर्चियां (VVPAT Slips) सड़क किनारे बिखरी मिलीं और इस मामले में एक सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) को निलंबित कर दिया गया।
1. राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ का आरोप
महागठबंधन के नेता राहुल गांधी ने अपनी चुनावी रैलियों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के माध्यम से यह दावा किया है कि बीजेपी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) देश में चुनावों को प्रभावित करने के लिए ‘वोट चोरी’ में लगे हुए हैं।
- सीधा हमला: राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे शीर्ष अधिकारियों पर मिलीभगत करके चुनाव चुराने का आरोप लगाया है।
- हरियाणा का उदाहरण: उन्होंने बिहार के युवाओं को जागरूक करते हुए कहा कि हरियाणा चुनाव में भी बड़े पैमाने पर फर्जी वोटिंग (Duplicate Voters) हुई और वोट चोरी के ज़रिए सत्ता हथियाई गई। उनका दावा है कि बिहार में भी यही करने की कोशिश की जा रही है।
- आधार: राहुल गांधी ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ ऐसे मतदाता सूचियों (Voter Lists) के सबूत पेश किए, जिनमें एक ही व्यक्ति के नाम कई बार दर्ज थे, या फिर ऐसे लोग भी मतदाता सूची में थे, जिनका उस राज्य से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने कहा कि लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं और अब मतदान केंद्रों पर भी लोगों को वोट डालने से रोका जा रहा है।
- अपील: उन्होंने बिहार के युवाओं और जेन-ज़ी (Gen-Z) मतदाताओं से अपील की है कि वे ‘वोट चोरी’ को रोकने के लिए पूरी तरह से सतर्क (Vigilant) रहें।
2. समस्तीपुर की घटना जिसने आरोपों को मज़बूती दी
राहुल गांधी के आरोपों के बीच ही, बिहार के समस्तीपुर जिले में एक ऐसी घटना हुई, जिसने महागठबंधन के दावों को और मज़बूत कर दिया और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक और मौका मिल गया।
- क्या हुआ: समस्तीपुर के सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र के पास, सड़क किनारे कूड़े के ढेर में भारी संख्या में वीवीपैट की पर्चियां बिखरी मिलीं।
- वीवीपैट क्या है?: वीवीपैट (VVPAT – Voter Verifiable Paper Audit Trail) वह मशीन है, जो ईवीएम (EVM) के साथ जुड़ी होती है। जब आप वोट डालते हैं, तो यह मशीन एक पर्ची निकालती है, जिस पर आपके चुने हुए उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह छपा होता है। यह पर्ची कुछ सेकंड के लिए दिखती है, फिर मशीन के डिब्बे में गिर जाती है। यह पर्ची इस बात का सबूत होती है कि आपका वोट सही जगह गया है।
- चुनाव आयोग की कार्रवाई: इस घटना के सामने आने पर चुनाव आयोग (Election Commission) ने तुरंत कार्रवाई की।
- निलंबन और FIR: संबंधित सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) को लापरवाही के आरोप में तुरंत निलंबित (Suspended) कर दिया गया और उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) भी दर्ज करने का निर्देश दिया गया।
- डीएम का स्पष्टीकरण: समस्तीपुर के जिलाधिकारी (DM) ने मौके पर जाकर जांच की और स्पष्टीकरण दिया कि ये पर्चियां वास्तविक मतदान (Actual Voting) के समय की नहीं थीं, बल्कि ‘मॉक पोल’ (Mock Poll) के बाद बची हुई पर्चियां थीं। ‘मॉक पोल’ वोटिंग शुरू होने से पहले, उम्मीदवारों के एजेंट के सामने मशीन चेक करने के लिए किया जाता है।
- महागठबंधन का सवाल: आरजेडी (RJD) समेत महागठबंधन के नेताओं ने डीएम के स्पष्टीकरण के बावजूद सवाल उठाया कि चाहे ये मॉक पोल की ही पर्चियां क्यों न हों, इन्हें सड़क किनारे कूड़े के ढेर में फेंकना चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता (Sanctity) और सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
3. NDA का पलटवार (Counter-Attack by NDA)
बीजेपी और NDA के नेताओं ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को पूरी तरह से निराधार (Baseless) बताया है और इसे महागठबंधन की संभावित हार का बहाना बताया है।
- हार का डर: NDA नेताओं का कहना है कि महागठबंधन को पता चल गया है कि वे चुनाव हार रहे हैं, इसलिए वे ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाकर हार का ठीकरा फोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
- कोर्ट जाने की चुनौती: NDA के नेताओं ने राहुल गांधी को चुनौती दी है कि अगर उनके पास ठोस सबूत हैं, तो उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय अदालत (Court) जाना चाहिए और अपने आरोपों को कानूनी रूप से साबित करना चाहिए।
- चुनाव आयोग का बचाव: NDA का तर्क है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र (Independent) संवैधानिक संस्था है और उस पर इस तरह के झूठे आरोप लगाना देश के लोकतंत्र को बदनाम करने जैसा है।
सारांश (Conclusion):
बिहार चुनाव में ‘वोट चोरी’ का आरोप एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन गया है, जिसे राहुल गांधी ने हरियाणा चुनावों से जोड़कर उठाया है। समस्तीपुर में वीवीपैट पर्चियां मिलने और एक अधिकारी के निलंबित होने की घटना ने इस मुद्दे को चुनावी बहस के केंद्र में ला दिया है। NDA इन आरोपों को निराधार बताकर खारिज कर रहा है, जबकि महागठबंधन इसका उपयोग युवा मतदाताओं को सरकार के खिलाफ एकजुट करने के लिए कर रहा है। 14 नवंबर को जब नतीजे आएंगे, तभी पता चलेगा कि ये आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी थे या जनता के मन में संदेह पैदा करने में कामयाब रहे।
