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243 सीटों पर बिहार विधानसभा चुनाव 2025: 7.43 करोड़ मतदाता और एनडीए-विरुद्ध महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कुल 243 सीटों के लिए मतदान होगा, जिसमें प्रदेश के 7.43 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान करेंगे। यह चुनाव दो चरणों में आयोजित होगा, पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को होगा, जबकि चुनाव परिणाम 14 नवंबर को घोषित किया जाएगा। इस चुनाव में प्रमुख मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन के बीच है, जो दोनों ही बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं।

सीट बंटवारा और राजनीतिक गठजोड़

एनडीए के अंतर्गत भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) को बराबर 101-101 सीटें मिली हैं, जबकि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें दी गई हैं। इसके अलावा हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को छह-छह सीटें मिली हैं। इस प्रकार एनडीए अपने गठबंधन के सदस्यों को संतुलित सीटें देकर सभी वर्गों का ध्यान रखने का प्रयास कर रहा है।

महागठबंधन में राजद, कांग्रेस, वाम दल और अन्य साझेदार शामिल हैं, जिनका उद्देश्य एनडीए को टक्कर देना और सत्ता में आना है। हालांकि, इस महागठबंधन के भीतर कुछ सीटों पर घटक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा भी हुई है, लेकिन अभी भी यह गठबंधन मुख्य मुकाबले की प्रधान ताकत के रूप में खड़ा है।

मतदाता और सामाजिक समीकरण

बिहार के 7.43 करोड़ मतदाताओं में 3.92 करोड़ पुरुष, 3.50 करोड़ महिला, और 1,725 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। पचास लाख से अधिक पहले बार वोट देने वाले युवा हैं, जो इस चुनाव को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं।

जातीय समीकरण इस चुनाव का अहम हिस्सा है। भूमिहार, यादव, महादलित, मुस्लिम, सवर्ण, और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। खासकर भूमिहार समुदाय के वोट महागठबंधन और एनडीए दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह समुदाय इस बार महागठबंधन की ओर झुकाव दिखा रहा है, जो चुनावी धुरी बन सकता है। वहीं यादव समुदाय का एक बड़ा तबका राजद के साथ जुड़ा है, जो महागठबंधन के लिए ताकत का स्रोत है।

प्रमुख चुनावी मुद्दे

एनडीए ने अपने चुनाव अभियान में विकास, सुशासन, बिजली, सड़क, और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डबल इंजन सरकार के विकास मॉडल को जनता के सामने रखा है, जिसके तहत रोजगार सृजन, कृषि सुधार, और ग्रामीण विकास मुख्य विषय हैं।

वहीं, महागठबंधन बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई, और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। उन्होंने यह दावा किया है कि एनडीए सरकार ने इन मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया और इसलिए जनता को बदलाव की जरूरत है। तेजस्वी यादव और उनकी टीम युवाओं, महिलाओं और गरीब वर्ग के मुद्दों को जोर दे रहे हैं।

चुनावी प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था

चुनाव आयोग ने इस चुनाव के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। करीब 12 लाख से अधिक मतदान अधिकारियों, सुरक्षा बलों और अधिकारियों को तैनात किया गया है ताकि मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हो सके। ईवीएम और वीवीपैट सहित पूरी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे मतदान की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

मतदाता सूची को पुनः सत्यापित कर पहली बार वोट देने वाले मतदाता, दिव्यांगजनों और महिला मतदाताओं के प्रति विशेष ध्यान दिया गया है। वोटिंग के दिनों में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का भी पालन किया जाएगा।

चुनावी माहौल और प्रचार अभियान

बिहार में सैद्धांतिक तौर पर चुनावी माहौल गरम है। दोनों गठबंधन बड़े स्तर पर जनसभाएं कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं। पीएम मोदी, अमित शाह, नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव सहित कई वरिष्ठ नेता पूरे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं।

एनडीए ने अपनी विकास यात्रा और राष्ट्रीय नेता की लोकप्रियता का फायदा उठाने की कोशिश की है, जबकि महागठबंधन ने स्थानीय मुद्दों और जातिगत समीकरणों को भुनाने पर ध्यान केंद्रित किया है।

चुनाव के संभावित नतीजे

विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव बेहद करीब हो सकता है। एनडीए अपनी संगठन क्षमता और विकास के मुद्दे पर भरोसा करता है, जबकि महागठबंधन जातीय समर्थन और बदलाव की तर्ज पर उम्मीदें संजो रहा है।

मतदाता की बड़ी संख्या युवाओं की है, जिनका मत चुनाव के नतीजों को बेहद प्रभावित करेगा। साथ ही इस बार कुछ सीटों पर मतदाता दलों के बीच विभाजन भी नजर आ रहा है। अंततः 14 नवंबर को मतगणना के बाद बिहार की नई राजनीति का रूप सामने आएगा।

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