धोरैया विधानसभा (सुरक्षित) सीट: एक विश्लेषणात्मक संभावना (2025)

धोरैया विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और यह बांका जिले में आती है। 2020 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भूदेव चौधरी ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के मनीष कुमार को केवल 2,687 वोटों (1.50%) के मामूली अंतर से हराया था। यह सीट पहले लगातार 4 बार (2000-2015) JDU के पास रही थी।

वर्तमान विश्लेषण के आधार पर, 2025 में इस सीट पर NDA (JDU) के उम्मीदवार की जीत की संभावना थोड़ी अधिक है, क्योंकि सीट पर NDA के वोटों का पुन: एकजुट होना तय है, लेकिन मुकाबला अत्यंत करीबी रहेगा।

संभावित विजेता उम्मीदवार: NDA (JDU) के उम्मीदवार (मनीष कुमार)

JDU के उम्मीदवार मनीष कुमार (या JDU/NDA का कोई नया चेहरा) की जीत की मजबूत संभावना है, क्योंकि उनके पक्ष में कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं।

जीत के पक्ष में मजबूत विश्लेषण और तथ्य
1. लोकसभा चुनाव 2024 का प्रभाव: 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA की सहयोगी लोजपा (रामविलास) के गठबंधन में वापस आने के कारण, JDU ने धोरैया विधानसभा क्षेत्र में बढ़त हासिल की थी। 2020 में JDU की हार का मुख्य कारण लोजपा (चिराग गुट) द्वारा NDA के सवर्ण और कुछ ओबीसी वोटों को काटना था। 2025 में NDA की एकजुटता इन वोटों को वापस ला सकती है, जो JDU की जीत के लिए निर्णायक होगा।
2. JDU का ऐतिहासिक प्रभुत्व: यह सीट 2020 से पहले लगातार चार बार (2000, 2005-फरवरी, 2005-अक्टूबर, 2010, 2015) JDU के पास रही है। यह JDU के लिए एक मजबूत पारंपरिक गढ़ रहा है, जहां पार्टी की संगठन क्षमता और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) तथा महिला वोट बैंक (नीतीश कुमार के समर्थक) का आधार मजबूत है।
3. विधायक के प्रति संभावित एंटी-इंकम्बेंसी: स्थानीय जनता, विशेषकर युवाओं और किसानों में, बेरोजगारी, सिंचाई की कमी और विधायक (भूदेव चौधरी) द्वारा विकास कार्यों को लेकर असंतोष है। यह सत्ता विरोधी लहर महागठबंधन के वर्तमान विधायक के खिलाफ जा सकती है।
4. विकास परियोजनाओं पर NDA का फोकस: वर्तमान विधायक द्वारा पुल-पुलियों, सड़कों और ट्रॉमा सेंटर की स्वीकृति जैसे विकास कार्यों का प्रचार किया जा रहा है, लेकिन JDU/NDA इन कार्यों को अपनी सरकारी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने पेश कर सकता है, खासकर यदि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रही हैं।

विपक्षी उम्मीदवार (RJD) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी:

RJD उम्मीदवार (भूदेव चौधरी) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी
1. 2020 की जीत का संयोग: RJD की 2020 की जीत का अंतर मात्र 2,687 वोट था और यह जीत मुख्य रूप से NDA के वोटों के लोजपा द्वारा विभाजन के कारण हुई थी। 2025 में LJP के NDA के साथ होने से RJD की जीत का यह संयोग खत्म हो जाएगा।
2. कोर MY समीकरण की सीमाएं: हालांकि RJD का मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण मजबूत है, लेकिन धोरैया (सुरक्षित) सीट पर SC, EBC और सवर्ण वोटों का मिश्रण निर्णायक होता है। RJD के यादव और मुस्लिम वोटों के अलावा, SC समुदाय के वोटों में विभाजन RJD के लिए चुनौती पैदा करेगा।
3. 43.7% का सीमित वोट शेयर: 2020 में RJD उम्मीदवार को 43.7% वोट मिले थे। NDA के वोटों के बंटवारे के बावजूद, यह वोट शेयर यह दर्शाता है कि NDA का संयुक्त आधार RJD से बड़ा था। यदि NDA एकजुट होकर चुनाव लड़ता है, तो RJD को 2025 में और अधिक वोटों की आवश्यकता होगी।
4. स्थानीय मुद्दों पर असंतोष: कई स्थानीय लोगों ने विधायक के कार्यकाल में विकास कार्यों की कमी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर असंतोष व्यक्त किया है। यह एंटी-इंकम्बेंसी RJD के लिए घातक साबित हो सकती है।

निष्कर्ष:

धोरैया (एससी) विधानसभा सीट पर NDA गठबंधन (JDU) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है। उनकी जीत का मुख्य कारक 2024 लोकसभा चुनाव में दिखी NDA की एकजुटता और RJD विधायक के प्रति संभावित सत्ता विरोधी लहर होगी। JDU का पारंपरिक आधार और EBC वोट बैंक भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। RJD के लिए 2020 की जीत दोहराना मुश्किल होगा, क्योंकि इस बार वोटों का विभाजन NDA के पक्ष में होने की संभावना है। मुकाबला कांटे का होगा, लेकिन NDA गठबंधन का पलड़ा थोड़ा भारी दिखता है।

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