बेलहर विधानसभा सीट: एक विश्लेषणात्मक संभावना (2025)

बेलहर सीट पर 2020 के चुनाव में JDU के मनोज यादव ने RJD के रामदेव यादव को बहुत कम अंतर से हराया था—सिर्फ 2,473 वोटों (1.40%) से। यह मुकाबला इस बार और भी दिलचस्प हो गया है क्योंकि RJD ने अपने चार बार के पूर्व विधायक रामदेव यादव का टिकट काटकर एक युवा चेहरे, चाणक्य प्रकाश रंजन को मैदान में उतारा है।

वर्तमान राजनीतिक और सांख्यिकीय विश्लेषण के आधार पर, 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA (JDU) के मनोज यादव की जीत की संभावना (Slight Edge) थोड़ी अधिक है, लेकिन RJD का युवा और नया दांव मुकाबले को अप्रत्याशित बना सकता है।

संभावित विजेता उम्मीदवार: NDA (JDU) के मनोज यादव

JDU उम्मीदवार की जीत की मजबूत संभावना के पीछे निम्नलिखित विश्लेषणात्मक कारक हैं:

जीत के पक्ष में मजबूत विश्लेषण और तथ्य
1. जातिगत समीकरण में पकड़ (Yadav Dominance): बेलहर यादव-बहुल सीट है (कुल मतदाताओं का लगभग 31.3%)। मनोज यादव भी यादव समुदाय से आते हैं और उन्होंने 2020 में लालू यादव के कोर वोटर में सेंध लगाकर जीत हासिल की थी। JDU को गैर-यादव OBC, सवर्ण (राजपूत) और EBC वोटों के साथ मनोज यादव के निजी यादव वोट का भी समर्थन मिलता है।
2. RJD में टिकट कटने का विवाद (Internal RJD Friction): RJD ने चार बार के अनुभवी पूर्व विधायक रामदेव यादव का टिकट काटकर युवा चाणक्य प्रकाश रंजन (JDU सांसद गिरधारी यादव के पुत्र) को दिया है। रामदेव यादव ने कथित तौर पर अपने पुत्र को निर्दलीय उतारने के संकेत दिए हैं। यदि रामदेव यादव खेमे के वोट निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर RJD के कोर यादव वोटबैंक को विभाजित करेगा और JDU को सबसे बड़ा फायदा देगा।
3. सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला (Anti-Incumbency Management): मनोज यादव के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विकास की कमी और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। हालांकि, RJD के अंदरूनी कलह से JDU को एक बड़ा राजनीतिक जीवनदान मिल गया है, जो एंटी-इन्कम्बेंसी को कम करने में सहायक होगा।
4. सांसद का प्रभाव (MP’s Influence): बेलहर बांका लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहाँ से JDU के गिरधारी यादव सांसद हैं और उनका बेलहर में निजी प्रभाव रहा है (वे दो बार यहाँ से विधायक रहे हैं)। 2024 के लोकसभा चुनाव में, JDU ने इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 9,353 वोटों की बढ़त बनाई थी, जो JDU उम्मीदवार के लिए एक मजबूत मनोवैज्ञानिक बढ़त है।

विपक्षी उम्मीदवार (RJD) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी:

RJD उम्मीदवार (चाणक्य प्रकाश रंजन/अन्य) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी
1. ‘यादव बनाम यादव’ में विभाजन (The Biggest Threat): RJD की सबसे बड़ी शक्ति, यादव वोट ही, इस चुनाव में उसकी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। रामदेव यादव की संभावित बगावत या तटस्थता RJD के पारंपरिक वोट को बिखेर देगी, जिससे मनोज यादव (JDU) को जीत के लिए आवश्यक अंतर मिल जाएगा।
2. कमजोर MY समीकरण (Weak MY Combination): बेलहर में मुस्लिम मतदाता केवल लगभग 5.5% हैं, जो RJD के लिए कटोरिया जैसी सीटों की तुलना में कम निर्णायक हैं। RJD को जीत के लिए यादव-मुस्लिम वोटों के अलावा SC/ST (21%) और अन्य पिछड़े वर्ग का भारी समर्थन चाहिए।
3. नए उम्मीदवार को स्थापित करने की चुनौती: चाणक्य प्रकाश रंजन एक युवा और नया चेहरा हैं, लेकिन उन्हें इतने कम समय में 4 बार के पूर्व विधायक के समर्थकों को अपने पक्ष में एकजुट करने की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ेगा, खासकर तब जब पार्टी के पुराने वफादार नाराज हों।
4. करीबी हार का इतिहास: 2020 की मात्र 2,473 वोटों से हुई हार बताती है कि JDU उम्मीदवार को हराना RJD के लिए हमेशा एक कठिन चुनौती रही है। पार्टी की आंतरिक कलह इस चुनौती को और बढ़ा सकती है।

निष्कर्ष:

बेलहर विधानसभा सीट पर एक बार फिर NDA (JDU) और महागठबंधन (RJD) के बीच रोमांचक और कांटेदार मुकाबला होने की संभावना है। जहाँ JDU के मनोज यादव अपनी पिछली जीत और NDA के मजबूत गठबंधन के दम पर आगे निकलने की कोशिश करेंगे, वहीं RJD के युवा उम्मीदवार चाणक्य प्रकाश रंजन, तेजस्वी यादव के ‘तेजस्वी प्रण’ और MY समीकरण की पूरी ताकत पर भरोसा करेंगे।

लेकिन, RJD के चार बार के पूर्व विधायक रामदेव यादव का टिकट कटना और उनके समर्थकों की संभावित नाराजगी इस चुनाव का सबसे बड़ा निर्णायक कारक होगी। अगर RJD इस आंतरिक कलह को नहीं सुलझा पाई और यादव वोट विभाजित हुआ, तो JDU के मनोज यादव की जीत की संभावना अधिक है।

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