तारापुर विधानसभा सीट, जो मुंगेर जिले में आती है, इस बार बिहार के सबसे चर्चित और वीआईपी सीटों में से एक बन गई है। मुख्य मुकाबला NDA (भाजपा) और महागठबंधन (राजद) के बीच है।1
1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार
| गठबंधन | पार्टी | उम्मीदवार |
| NDA | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री, बिहार) |
| महागठबंधन | राष्ट्रीय जनता दल (RJD) | अरुण कुमार साव |
| अन्य | जन सुराज | डॉ. संतोष कुमार सिंह |
2️⃣ 🏆 NDA उम्मीदवार सम्राट चौधरी की जीत के संभावित कारण (अनुकूल तथ्य)
सम्राट चौधरी इस सीट से पहली बार सीधे चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनका परिवारिक और राजनीतिक आधार मजबूत है।
- पारिवारिक विरासत:
- तारापुर से उनका गहरा पारिवारिक जुड़ाव है। उनके पिता, पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी और माता स्व.2 पार्वती देवी, इस सीट से विधायक रह चुकी हैं। 1985 से 2005 तक यह सीट लगभग चौधरी परिवार के पास ही रही थी।3
- स्थानीय लोगों में इसे ‘बेटे की घर वापसी’ के रूप में देखा जा रहा है, जो भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है।
- कुशवाहा-सवर्ण-वैश्य समीकरण:
- तारापुर कुशवाहा बहुल सीट है, और सम्राट चौधरी इसी समुदाय से आते हैं, जिससे उन्हें अपने जाति का एकमुश्त वोट मिलने की उम्मीद है।
- NDA के पारंपरिक मतदाता, जैसे सवर्ण और वैश्य मतदाताओं की संख्या भी यहाँ निर्णायक है, जो उनके पक्ष में गोलबंद हो सकते हैं।
- बड़ा चेहरा और विकास:
- उपमुख्यमंत्री होने के कारण, वह एक बड़ा राजनीतिक चेहरा हैं, जिससे लोगों की उम्मीदें जुड़ी हैं कि वह क्षेत्र में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाएंगे।
- उन्होंने हाल ही में क्षेत्र में कई विकास योजनाओं का शिलान्यास भी किया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव मतदाताओं पर पड़ सकता है।
- NDA की सांगठनिक शक्ति:
- NDA, जिसमें भाजपा और जदयू (हाल के उप-चुनाव तक) दोनों शामिल रहे हैं, का यहाँ पिछले 15 वर्षों से दबदबा रहा है। 2021 के उप-चुनाव में भी NDA ने जीत दर्ज की थी।
- 2024 लोकसभा की बढ़त:
- 2024 के लोकसभा चुनाव में NDA घटक दल लोजपा (रामविलास) ने तारापुर विधानसभा खंड में 13,029 वोटों की बढ़त बनाई थी, जो NDA के पक्ष में एक मजबूत आधार दिखाता है।4
- 2024 के लोकसभा चुनाव में NDA घटक दल लोजपा (रामविलास) ने तारापुर विधानसभा खंड में 13,029 वोटों की बढ़त बनाई थी, जो NDA के पक्ष में एक मजबूत आधार दिखाता है।4
3️⃣ ❌ महागठबंधन उम्मीदवार अरुण कुमार साव की हार के संभावित तथ्य (प्रतिकूल तथ्य)
राजद ने वैश्य समुदाय से आने वाले अरुण कुमार साव को मैदान में उतारा है, जिन्होंने 2021 के उप-चुनाव में कड़ी टक्कर दी थी।5
- आरजेडी का ‘यादव’ केंद्रित समीकरण:
- हालांकि तारापुर में यादव मतदाताओं की अच्छी संख्या है, पर यह सीट मुख्य रूप से कुशवाहा बहुल मानी जाती है।6 आरजेडी का आधार मुख्य रूप से यादव-मुस्लिम समीकरण पर टिका है, जिसे कुशवाहा बहुल सीट पर वैश्य उम्मीदवार के साथ पूरी तरह से गोलबंद करना एक चुनौती हो सकता है
- व्यक्तिगत साख पर निर्भरता:
- अरुण साव 2021 के उपचुनाव में 4000 से भी कम मतों के अंतर से हार गए थे।7 इस बार उनका मुकाबला सीधे उपमुख्यमंत्री जैसे बड़े चेहरे से है, जिससे मुकाबला काफी कठिन हो गया है। उन्हें अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।
- अरुण साव 2021 के उपचुनाव में 4000 से भी कम मतों के अंतर से हार गए थे।7 इस बार उनका मुकाबला सीधे उपमुख्यमंत्री जैसे बड़े चेहरे से है, जिससे मुकाबला काफी कठिन हो गया है। उन्हें अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।
- ‘जन सुराज’ का वैश्य वोटों में सेंध:
- अरुण साव वैश्य समुदाय से आते हैं।8 जन सुराज पार्टी ने भी स्थानीय चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार सिंह को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। डॉ. संतोष सिंह स्थानीय हैं, जिससे वह महागठबंधन के वैश्य वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं, जिसका सीधा नुकसान अरुण साव को हो सकता है।
- सत्ता विरोधी लहर का अभाव:
- NDA जहाँ विकास कार्यों की उपलब्धियों को घर-घर पहुंचा रहा है, वहीं RJD प्रमुख रूप से तेजस्वी यादव के ‘सरकारी नौकरी’ के नारे को मुद्दा बना रही है। स्थानीय स्तर पर मजबूत सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) का स्पष्ट अभाव उनके लिए चुनाव कठिन बना सकता है।
- स्थानीय बनाम बाहरी की बहस:
- हालांकि सम्राट चौधरी का पारिवारिक जुड़ाव है, फिर भी वह पहली बार यहाँ से सीधे चुनाव लड़ रहे हैं। अगर स्थानीय बनाम बाहरी का नैरेटिव प्रबल होता है, तो उन्हें चुनौती मिल सकती है, हालांकि उपमुख्यमंत्री का पद इस बहस को कमजोर कर सकता है।
4️⃣ त्रिकोणीय मुकाबले का असर
- जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. संतोष कुमार सिंह मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं। वह स्थानीय हैं और वैश्य समुदाय से आते हैं। वह मुख्य रूप से वैश्य और सवर्ण मतों में सेंध लगाएंगे। यदि वह NDA के सम्राट चौधरी की तुलना में अरुण साव (राजद) के वोट ज्यादा काटते हैं, तो इसका सीधा फायदा NDA को होगा, और इसके विपरीत होने पर महागठबंधन को।
- इस सीट पर बिंद समाज के लगभग 25 हजार से अधिक वोटर भी निर्णायक भूमिका में हैं। उनका झुकाव जिस ओर होगा, जीत की राह उधर ही जाएगी।
निष्कर्ष:
तारापुर विधानसभा सीट पर सीधा मुकाबला सम्राट चौधरी और अरुण कुमार साव के बीच है। सम्राट चौधरी को पारिवारिक विरासत, जातिगत गोलबंदी (कुशवाहा-सवर्ण-वैश्य) और उपमुख्यमंत्री का चेहरा होने का बड़ा लाभ मिल रहा है। वहीं, अरुण साव को महागठबंधन के कोर वोट और वैश्य समुदाय के समर्थन पर निर्भर रहना होगा, लेकिन जन सुराज उनकी जीत की राह को कठिन बना सकता है। जातीय समीकरणों का मामूली बदलाव ही इस संघर्षपूर्ण सीट का फैसला करेगा।