बिहार के कैमूर जिले की मोहनिया विधानसभा सीट (अनुसूचित जाति आरक्षित) एक ऐसी भूमि है, जहाँ सामाजिक परिवर्तन और राजनीतिक आंदोलनों की गूंज सदियों से सुनाई देती रही है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में यह क्षेत्र एक बार फिर से सत्ता के समीकरणों को बदलने के केंद्र में है। परंपरा, जातीय संतुलन, विकास की अपेक्षाएँ और महिला सशक्तिकरण—इन सभी ने मिलकर इस सीट को प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में शामिल कर दिया है ।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मोहनिया की राजनीतिक यात्रा 1952 के पहले आम चुनाव से शुरू होती है, जब कांग्रेस के रामनगीना सिंह ने इस सीट से जीतकर इसकी नींव रखी थी। इसके बाद इस क्षेत्र ने समाजवादियों, जनता दल और फिर भाजपा-राजद जैसे दलों को अपने प्रतिनिधि के रूप में देखा है ।
1980 और 1990 के दशक में जनता दल ने कई बार यहां सत्ता हासिल की, जबकि 2015 में हुए विधानसभा चुनाव ने भाजपा को पहली बार यहाँ विजय दिलाई। यह वह चुनाव था जिसने इस क्षेत्र की जातीय और राजनीतिक धारणाओं में परिवर्तन की आहट दी ।
भौगोलिक और जनसांख्यिक परिदृश्य
यह सीट कैमूर जिले के प्राचीन इलाके में स्थित है, जिसे कभी मगध साम्राज्य का दरवाजा कहा जाता था। जनगणना 2011 के अनुसार, मोहनिया की कुल आबादी 3,90,326 है, जिनमें से लगभग 98.28 प्रतिशत लोग ग्रामीण हैं जबकि केवल 1.72 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में निवास करती है ।
अनुसूचित जाति की जनसंख्या यहाँ 24.67 प्रतिशत है, जिससे यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से जातीय समीकरणों में अत्यंत निर्णायक हो जाता है। मुसलमान मतदाता लगभग 8.3 प्रतिशत हैं। महिलाओं का लिंगानुपात 912 (प्रति 1000 पुरुष) है और साक्षरता दर 59.78 प्रतिशत दर्ज की गई थी ।
राजनीतिक यात्रा और प्रमुख चुनावी परिणाम
1977 से 2000 तक: कांग्रेस से जनता दल तक
1977 में जनता पार्टी के कameshwar Paswan ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 1980 और 1985 में पुणीत राय ने क्रमशः जनता पार्टी और लोकदल की ओर से विजय पाई। 1990 के दशक में पुनः जनता दल ने यहाँ अपना प्रभाव बनाए रखा।
2000 के चुनाव में राजद के दिनेश चौधरी ने समाजवादी धारा को पुनर्जीवित किया और भाजपा-जदयू गठबंधन को चुनौती दी ।
2010 से 2020 तक: भाजपा और राजद की जंग
2010 में जदयू के छेदी पासवान ने जीत दर्ज की। 2015 में भाजपा के निरंजन राम ने इतिहास रचा, जब पहली बार भाजपा को इस क्षेत्र से विजय मिली।
लेकिन 2020 में यह विजय पलट गई जब राजद की संगीता कुमारी ने भाजपा के निरंजन राम को 12,054 वोटों के अंतर से हराते हुए भाजपा की पकड़ को कमजोर किया। संगीता कुमारी को 61,235 वोट और निरंजन राम को 49,181 वोट मिले। यह अंतर इस बात का संकेत था कि महागठबंधन का वोट बैंक यहाँ मजबूती से स्थापित हो चुका है ।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य (2025)
2025 के विधानसभा चुनाव में मोहनिया सीट पर तीन प्रमुख दलों—राजद, भाजपा और कांग्रेस—के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है।
राजद की वर्तमान विधायक संगीता कुमारी पुनः मैदान में हैं और महिला नेतृत्व की प्रतीक मानी जा रही हैं। भाजपा ने इस बार फिर से निरंजन राम को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस महिला उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर विचार कर रही है ।
राजद को उम्मीद है कि 2020 से अब तक की अपनी विकास योजनाओं और महिला सशक्तिकरण अभियानों के बल पर वह पिछली बढ़त को बनाए रखेगी। वहीं भाजपा अपने परंपरागत मतदाताओं—भूआर, पासवान और गैर-दलित वर्ग के बीच नया गठजोड़ बनाने की कोशिश में है ।
जातीय और सामाजिक समीकरण
मोहनिया का सामाजिक ढांचा पूरी तरह से बहुस्तरीय है। अनुसूचित जाति के अलावा यादव, भूमिहार, पासवान, कुर्मी और मुस्लिम मतदाता यहाँ के वोट बैंक का बड़ा हिस्सा हैं।
स्थानीय स्तर पर यादवों और पासवानों का मिलाजुला प्रभाव सबसे निर्णायक भूमिका निभाता है। भाजपा पहले इन समुदायों में अपनी पकड़ बनाए हुए थी, लेकिन राजद के सामाजिक अभियानों ने उस पर सीधी चुनौती पेश की है ।
विकास और स्थानीय मुद्दे
मोहनिया विधानसभा क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित है। यहाँ कृषि, पशुपालन और छोटे उद्योग प्रमुख आय स्रोत हैं।
हालांकि, बेरोजगारी और सड़कों की जर्जर अवस्था अभी भी चुनावी मुद्दे बने हुए हैं। गंगा पुल निर्माण, बक्सर के रास्ते माल परिवहन की सुविधा और कैमूर पहाड़ियों के पर्यटन क्षेत्र के विकास की माँग स्थानीय जनता लंबे समय से उठाती आ रही है ।
शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि यहाँ 40 प्रतिशत से अधिक युवा मतदाता हैं जिनके बीच रोजगार और उच्च शिक्षा प्राथमिक विषय हैं।
महिलाओं की भूमिका
मोहनिया में महिला मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 2020 में महिला मतदान प्रतिशत 52% था जो 2024 लोकसभा चुनाव में 56% तक पहुँच गया।
राजद की संगीता कुमारी का उभरना न केवल सामाजिक परिवर्तन का संकेत है, बल्कि यह इस क्षेत्र में महिला नेतृत्व के लिए नई राह खोलता दिख रहा है। भाजपा ने भी महिला मतदाताओं तक पहुँच बढ़ाने के लिए “उज्ज्वला लाभ योजना” और “लाड़ली लक्ष्मी अभियान” को मुख्य मुद्दा बनाया है ।
2025 चुनाव का कार्यक्रम
चुनाव आयोग ने मोहनिया सीट के लिए अधिसूचना 13 अक्टूबर 2025 को जारी की थी।
नामांकन की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर 2025 थी, नामांकन की जांच 21 अक्टूबर को और नाम वापसी की अंतिम तिथि 23 अक्टूबर निर्धारित की गई। मतदान 11 नवंबर 2025 को होना है तथा परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे ।
निष्कर्ष
मोहनिया विधानसभा 2025 का चुनाव केवल एक स्थानीय मुकाबला नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक दिशा तय करने वाला प्रतीकात्मक संघर्ष है। समाजवाद की जड़ों में पले इस क्षेत्र ने हर बार सत्ता परिवर्तन की भूमिका निभाई है।
राजद संगीता कुमारी के साथ महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है, वहीं भाजपा अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए अब रणनीतिक पहुँच पर काम कर रही है। कांग्रेस भी पुराने जनाधार की पुनर्स्थापना को लेकर दृश्य में है।
इस प्रकार, 2025 के बिहार चुनावों में मोहनिया की गूंज पूरे प्रदेश की राजनीति में सुनाई देने वाली है—क्योंकि यही वो मिट्टी है जहाँ से बिहार की नब्ज़ समझी जाती है ।
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