डेहरी विधानसभा बिहार के रोहतास जिले का एक प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र है, जिसे आमतौर पर “डेहरी-ऑन-सोन” के नाम से जाना जाता है। सोन नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र न केवल बिहार की प्राकृतिक संपदा का प्रतीक है, बल्कि इसकी राजनीतिक कहानी भी उतनी ही रोचक और परिवर्तनशील रही है। 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में डेहरी का विशेष महत्व है, जहां दशकों से चली आ रही राजनीतिक परंपराएं और वर्तमान बदलाव आम जनता की सोच को दर्शाती हैं। इस सीट पर कई दलों और नेताओं ने दिल्ली-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे जंक्शन के प्रभाव में लोकतांत्रिक मुकाबलों की कहानी लिखी है ।
डेहरी का भौगोलिक एवं सामाजिक परिदृश्य
डेहरी विधानसभा क्षेत्र सोन नदी के किनारे स्थित है और यह कराकाट लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। क्षेत्र की महत्वपूर्ण पहचान इसका रेलवे जंक्शन और राष्ट्रीय राजमार्गDelhi-Kolkata है जिससे यह रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
जनसंख्या में मुस्लिम मतदाता लगभग 10.6%, अनुसूचित जाति की आबादी 16.91% और शहरी मतदाता 34.73% हैं। शेष आबादी ग्रामीण व अन्य जातीय समूहों की है। यहां यादव, कुशवाहा, ब्राह्मण, राजपूत, दलित, मुसलमान महत्वपूर्ण समुदाय हैं, जिनका निर्वाचन में बड़ा प्रभाव होता है।
राजनीतिक इतिहास और प्रमुख घटनाएं
डेहरी विधानसभा सीट की स्थापना 1951 में हुई थी। शुरुआत में समाजवादी दलों और कांग्रेस का प्रभाव था, लेकिन बाद में यहां कई दलों का उत्थान- पतन हुआ।
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1952 और 1957 में समाजवादी पार्टी के बसावन सिंह ने जीत दर्ज की।
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1960 से 1985 तक कांग्रेस का स्वर्ण युग रहा, जिसमें अब्दुल कयूम अंसारी और रियासत करीम जैसे नेताओं ने काबिजी संभाली।
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1985 के बाद कांग्रेस ने कभी भी यहां जीत नहीं पाई।
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1990 के बाद जनता दल, राजद, भाजपा, और निर्दलीय उम्मीदवारों का सत्ता संचालन रहा।
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2019 के उपचुनाव में सचिनारायण सिंह ने भाजपा को पहली बार जीत दिलाई।
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2020 में राजद के फतेह बहादुर सिंह ने भाजपा के सत्यनारायण सिंह को मात्र 464 वोटों के अंतर से हराकर सीट पुनः जीती।
औद्योगिक इतिहास और आर्थिक स्थिति
डेहरी का समृद्ध औद्योगिक अतीत है। 1930 के दशक में रामकृष्ण डालमिया द्वारा स्थानीय औद्योगिक शहर डालमियानगर की स्थापना हुई, जो अपना जौहर विश्वसनीयता और मजदूर आंदोलनों के कारण खो बैठा। अब यहां छोटे उद्योग जैसे आरा मिल, प्लास्टिक पाइप, फुटवियर और घी उत्पादन केंद्र सक्रिय हैं, जो क्षेत्र की आर्थिक गरिमा को थोड़ा बहाल करते हैं।
इंद्रपुरी बैराज और रेलवे जंक्शन क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में अहम योगदान देते हैं।
2020 का चुनाव विश्लेषण
2020 विधानसभा चुनाव में फतेह बहादुर सिंह ने भाजपा के सत्यनारायण सिंह को 464 वोटों के मात्र अंतर से पराजित किया। यह बिहार के सबसे कम वोट अंतर वाली सीटों में से एक है। इस चुनाव से पहले 2019 उपचुनाव में भाजपा ने पहली बार डेहरी में जीत दर्ज की थी, परंतु 2020 में राजद ने वापसी कर ली।
विपक्ष के बीच मत विभाजन और उम्मीदवार की छवि यहां निर्णायक साबित हुई।
2025 विधानसभा चुनाव चुनौती
2025 विधानसभा चुनाव में डेहरी सीट की लड़ाई बहुत कड़ी होने की संभावना है।
राजद के फतेह बहादुर सिंह उम्मीदवार हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में कसी हुई पकड़ दिखाई। भाजपा और जदयू के बीच गठबंधन समीकरण अभी जारी हैं, जिससे इस क्षेत्र में मुकाबला और भी तीव्र हो सकता है।
प्रतियोगी दल विकास कार्यों, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा जैसे मुद्दों पर जोर दे रहे हैं। साथ ही, मुस्लिम और दलित वोटों की रणनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।
जातीय समीकरण
डेहरी विधानसभा में विभिन्न जातीय समूहों का राजनीति में व्यापक प्रभाव है।
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मुस्लिम: लगभग 10.6%
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अनुसूचित जाति: 16.91%
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यादव, कुशवाहा, और अन्य OBC: मिलाकर 40-45%
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ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार: लगभग 20-25%
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शहरी और ग्रामीण मतदाता: लगभग 35% शहरी हैं।
राजनीतिक दल इन समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति बनाते हैं। यहां क्षत्रिय जाति के उम्मीदवारों की असफलता भी इस क्षेत्र की राजनीति की अनूठी विशेषता है।
प्रमुख स्थानीय मुद्दे
डेहरी के मतदाताओं के लिए मुख्य मुद्दे निम्नलिखित हैं:
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रोजगार के अवसरों की कमी विशेषकर युवाओं के लिए
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सिंचाई और कृषि उपकरणों की उपलब्धता
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शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार
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सड़क, बिजली और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव
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महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण
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औद्योगीकरण व छोटे उद्योगों को बढ़ावा
महिला और युवा मतदाता की जिम्मेदारी
2020 में महिला मतदाताओं ने लगभग 50% की भागीदारी दर्ज की। महिला सशक्तिकरण और स्थानीय कल्याण योजनाओं ने महिलाओं को मतदान के लिए प्रोत्साहित किया है।
युवा मतदाता भी क्षेत्र के चुनावों में निर्णायक बनते जा रहे हैं। वे रोजगार, शिक्षा और डिजिटल इंटरफेस जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। दल युवा मतदाता वर्ग को साधने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं।
चुनावी कार्यक्रम
डेहरी विधानसभा क्षेत्र का मतदान 11 नवंबर 2025 को दूसरे चरण में होगा। नामांकन 13 से 20 अक्टूबर तक होंगे और परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
निष्कर्ष
डेहरी विधानसभा बिहार की वह सीट है जहां पर बूढ़े राजनीतिक जमाने से लेकर नई पीढ़ी तक का संघर्ष झलकता है। यहां का चुनाव सामाजिक बदलाव, विकास की मांग, और राजनीतिक समीकरणों का तीव्र संघर्ष है।
2025 का चुनाव तय करेगा कि क्या विकास और नेतृत्व की वैधता अधिक प्रभावी होगी या जातीय, धार्मिक और वर्गीय समीकरण ही इस सीट का भविष्य तय करेंगे।
इस सीट की कहानी बिहार की राजनैतिक विविधता और लोकतांत्रिक उत्कर्ष की मिसाल बनी रहेगी।
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