कुर्था विधानसभा क्षेत्र बिहार के अरवल जिले का एक महत्वपूर्ण चुनावी इलाका है, जिसे बिहार की राजनीति में उतार-चढ़ाव, जातीय समीकरण, और परिवारवाद की सियासत के लिए जाना जाता है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में कुर्था सीट फिर से चर्चा का विषय बनी है, जहां राजनीतिक परिवारों के बीच सत्ता की जंग देखी जा रही है। इस सीट पर सामाजिक संघर्ष, आर्थिक मुद्दे, और विकास की पुरजोर मांग चुनावी लड़ाई को और भी दिलचस्प बनाती है। इस लेख में कुर्था विधानसभा की राजनीतिक जटिलताओं, प्रमुख नेताओं, जातीय समीकरण, जनसमाज की उम्मीदों और आगामी चुनाव की पूरी जानकारी विस्तार से प्रस्तुत है।
कुर्था विधानसभा का परिचय और भूगोल
कुर्था विधानसभा अरवल जिले में स्थित है जो जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह सीट सामान्य श्रेणी की है और मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों से मिलकर बनी है। यहां की आबादी ज्यादातर कृषि पर निर्भर है, और क्षेत्र का राजनीतिक पसंदिता पर जातीय आधार काफी प्रभाव डालता है।
मुख्य जातीय समूहों में यादव, कुशवाहा, भूमिहार, राजपूत और दलित प्रमुख हैं। क्षेत्र की जनसंख्या करीब 2.5 लाख के आसपास है।
राजनीतिक इतिहास
कुर्था सीट का पहला चुनाव 1952 में हुआ था, जिसमें सोशलिस्ट पार्टी के राम चरण सिंह यादव ने कांग्रेस के उमैर शाह को हराया। इसके बाद कांग्रेस, प्रजा सोशलिस्ट, जनता दल, राजद, जदयू, एलजेपी, और निर्दलीय उम्मीदवारों ने इस सीट पर अपनी पकड़ बनाई।
जगदेव प्रसाद, बिहार के तीसरे उप मुख्यमंत्री, ने भी इस सीट से चुनाव लड़ा और चुनावी इतिहास लिखा। उन्होंने इस क्षेत्र की राजनीति को बहुत प्रभावित किया।
2005 से 2015 तक जदयू ने लगातार तीन चुनाव जीते, लेकिन 2020 में राजद के बागी कुमार वर्मा ने जदयू के सत्यदेव सिंह को भारी मतों से हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया।
2020 का चुनाव विश्लेषण
2020 के चुनाव में बागी कुमार वर्मा ने लगभग 27,810 वोटों के अंतर से सत्ता हासिल की। इस जीत ने राजद के लिए कुर्था को मजबूत बनाया। यह चुनाव जातीय समीकरणों से ज्यादा विकास और नेतृत्व की छवि पर आधारित था।
जनसंख्या में यादव-कोयरी समुदाय ने निर्णायक भूमिका निभाई, जिसने संभावना जताई कि राजनीति यहां जातीय गठबंधन के चक्र से गुजरती रहेगी।
2025 के चुनावी माहौल
2025 में कुर्था सीट पर जमकर मुकाबला देखने को मिलेगा।
राजद के बागी कुमार वर्मा पुनः उम्मीदवार हैं, जो मंत्री पद पर अपनी साख के साथ चुनाव लड़ रहे हैं।
जदयू के सत्यदेव सिंह, जो पूर्व विधायक हैं, ने सीट वापस लेने की तैयारी की है।
अन्य दल तथा निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी जंग में शामिल होंगे।
चुनावी मुद्दे मुख्य रूप से ग्रामीण विकास, शिक्षा, रोजगार, महिला सुरक्षा और आधारभूत संरचनाओं के आसपास केंद्रित हैं।
जातीय गणित और चुनावी रणनीतियाँ
यादव, कुशवाहा, भूमिहार और दलित समुदायों का गठजोड़ कुर्था विधानसभा की राजनीति का केंद्र है।
राजनीतिक दल जातीय वोट बैंक की रणनीति अपनाते हैं और परिवारवादी राजनीति भी यहाँ के चुनावों में अहम भूमिका निभाती है।
यहां के मतदाता अब विकास और स्थानीय मुद्दों को भी गंभीरता से लेते हैं, साथ ही परिवारों की राजनीति भी मजबूत है।
स्थानीय मुद्दे
कुर्था के मतदाताओं के प्रमुख मुद्दे हैं:
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कृषि और सिंचाई को बढ़ावा
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शिक्षा व्यवस्था में सुधार
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स्वास्थ्य सुविधा की बेहतर उपलब्धता
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सड़क, बिजली व जलापूर्ति
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रोजगार के अवसरों का सृजन, विशेषकर युवाओं के लिए
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महिला सुरक्षा और सामाजिक विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन
महिला और युवा मतदाताओं की भूमिका
महिला मतदाता कुर्था की राजनीति में महत्वूपर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिला स्वसशक्तिकरण एवं कल्याण कार्यक्रमों ने वोटर बेस को सक्रिय किया है।
युवाओं की अपेक्षाएं रोजगार, शिक्षा व नवीनता पर आधारित हैं। राजनीतिक दल युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए सचेत हैं।
चुनाव कार्यक्रम
2025 बिहार विधानसभा चुनाव के तहत कुर्था विधानसभा क्षेत्र में मतदान 11 नवंबर को होगा। नामांकन की प्रक्रिया 13 से 20 अक्टूबर तक चलेगी, और चुनाव परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे।
निष्कर्ष
कुर्था विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति के उतार-चढ़ाव का मंंच रहा है, जहां परिवारवाद, जातीय राजनीति और विकास की मांग आमने-सामने रही हैं।
2025 का चुनाव यहां की जनता के लिए विकास, न्याय, और सामाजिक भागीदारी का निर्णायक परीक्षा होगी।
राजद और जदयू के बीच टक्कर इस चुनाव के मुख्य आकर्षण रहेगी, जो बिहार विधानसभा की राजनीतिक तस्वीर को नए आयाम प्रदान करेगी।
कुर्था विधानसभा से जुड़े राजनीतिक इतिहास, सामाजिक-सांस्कृतिक आधार और आर्थिक मुद्दे इसे बिहार के सबसे दिलचस्प चुनाव क्षेत्रों में से एक बनाते हैं।
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