सीतामढ़ी विधानसभा (सीट क्रम संख्या 28) जिले की सबसे महत्वपूर्ण और पूर्णतः शहरी सीट है। यह सीट धार्मिक महत्व के साथ-साथ वैश्य समुदाय की निर्णायक भूमिका के लिए जानी जाती है, जिसके कारण यह सीट अक्सर बीजेपी के लिए एक मजबूत गढ़ साबित हुई है।1
प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| मिथिलेश कुमार (विजेता) | BJP (NDA) | 90,236 | 11,475 वोट |
| सुनील कुमार | RJD (महागठबंधन) | 78,761 | – |
मिथिलेश कुमार/NDA (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| वैश्य और सवर्णों का मजबूत आधार | सीतामढ़ी एक शहरी सीट है, जहाँ वैश्य समुदाय के मतदाता चुनाव परिणामों को सीधे प्रभावित करते हैं। ऐतिहासिक रूप से, यह वर्ग बीजेपी का मजबूत समर्थक रहा है, और उनकी संगठित गोलबंदी NDA के पक्ष में निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा, ब्राह्मण और राजपूत मतदाता भी NDA का समर्थन करते हैं। |
| धार्मिक और राष्ट्रवादी ध्रुवीकरण | माता सीता की जन्मस्थली होने के कारण यह सीट धार्मिक भावनाओं के केंद्र में रहती है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और पुनौरा धाम में माता जानकी मंदिर के भव्य पुनर्निर्माण की घोषणा जैसे मुद्दे भाजपा के राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के एजेंडे को धार देते हैं, जिससे सवर्ण और अतिपिछड़ा वर्ग के वोट आसानी से ध्रुवीकृत होते हैं। |
| सीटिंग MLA की मजबूत पकड़ | मिथिलेश कुमार 2020 में 11,475 वोटों के अच्छे अंतर से जीते थे। यह दिखाता है कि क्षेत्र में उनकी और पार्टी की पकड़ मजबूत है। बीजेपी एक बार फिर उन्हीं पर दाँव लगा सकती है। |
| स्थानीय बनाम बाहरी की छवि | बीजेपी अक्सर अपने उम्मीदवारों को स्थानीय विकास और साफ-सुथरी छवि वाले के रूप में पेश करती है, जो शहरी मतदाताओं को आकर्षित करता है। |
सुनील कुमार/महागठबंधन (RJD) की जीत की राह और BJP उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (BJP की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) | विधायक के लगातार जीतने के बाद स्थानीय स्तर पर कुछ हद तक सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय मुद्दे जैसे शहर में लाइलाज बनी जाम की समस्या और अन्य शहरी बुनियादी ढाँचे की कमियाँ मतदाताओं की नाराजगी बढ़ा सकती हैं। |
| M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण | यह शहरी सीट होने के बावजूद, यहाँ मुस्लिम और यादव मतदाताओं की संख्या भी निर्णायक मानी जाती है। यदि RJD अपने पारंपरिक M-Y समीकरण को पूरी तरह से एकजुट करने में सफल रहता है, तो वह BJP को कड़ी टक्कर दे सकता है। 2015 में RJD के सुनील कुमार ने यह सीट जीती भी थी, जो इस समीकरण की ताकत को दर्शाता है। |
| निर्दलीय/अन्य दलों की चुनौती | इस सीट पर यदि कोई मजबूत गैर-M-Y/गैर-सवर्ण निर्दलीय या छोटे दल का उम्मीदवार खड़ा होता है, जो NDA के वोटों में सेंध लगाता है, तो इससे RJD को सीधे फायदा हो सकता है। |
| स्थानीय नेतृत्व का सवाल | यदि मौजूदा विधायक मिथिलेश कुमार को लेकर जनता में कोई बड़ा असंतोष है, तो NDA के प्रमुख वोट बैंक (वैश्य/सवर्ण) का एक हिस्सा भी छिटक सकता है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
सीतामढ़ी विधानसभा सीट पर मुकाबला हमेशा से NDA (BJP) बनाम महागठबंधन (RJD) के बीच सीधी टक्कर का रहा है।
BJP के पास वैश्य और सवर्णों का संगठित शहरी वोट बैंक है, जो उसे एक मजबूत शुरुआती बढ़त देता है। इसके अलावा, माता सीता के नाम पर धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश भी इस सीट पर NDA के पक्ष में माहौल बना सकती है।
RJD की ताकत उसका M-Y समीकरण है, जो 2015 में उसे जीत दिला चुका है। हालाँकि, शहरी क्षेत्र में केवल M-Y के दम पर जीत हासिल करना मुश्किल होता है।
विश्लेषण के आधार पर, धार्मिक और शहरी/वैश्य मतदाता आधार की मजबूत गोलबंदी के कारण, सीतामढ़ी सीट पर NDA (BJP) का पलड़ा एक बार फिर भारी दिख रहा है। RJD को यह सीट जीतने के लिए NDA के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगानी होगी या किसी तरह का मजबूत एंटी-इनकम्बेंसी फैक्टर खड़ा करना होगा।
संभावित विजेता: BJP के मिथिलेश कुमार, जिनके लिए सीट बनाए रखना आसान माना जा रहा है।