हरलाखी विधानसभा (सीट क्रम संख्या 31) बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के मधुबनी जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है।1 ऐतिहासिक रूप से, इस सीट पर कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) का प्रभुत्व रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कब्जे में रही है। यह क्षेत्र पूरी तरह से ग्रामीण है और इसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर करती है।
प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| सुधांशु शेखर (विजेता) | JDU (NDA) | 60,393 | 17,593 वोट |
| राम नरेश पांडेय | CPI (महागठबंधन) | 42,800 | – |
| मोहम्मद शाबीर | निर्दलीय (तीसरे स्थान पर) | 16,339 | – |
सुधांशु शेखर/NDA (JDU) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| व्यक्तिगत लोकप्रियता और ‘विकास पुरुष’ छवि | JDU के सुधांशु शेखर (जो 2016 के उपचुनाव से विधायक हैं) ने 2020 में 17 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। यह जीत उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों पर जनता के भरोसे को दर्शाती है। |
| NDA का मजबूत गठबंधन आधार | NDA के कोर वोटर (सवर्ण, वैश्य, और नीतीश-मोदी सरकार के योजनाओं के लाभार्थी) का वोट बैंक JDU के साथ मजबूत है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सामूहिक नेतृत्व इस ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं को आकर्षित करता है। |
| महागठबंधन के वोटों का विभाजन | 2020 में, CPI महागठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन एक मुस्लिम निर्दलीय उम्मीदवार (मोहम्मद शाबीर) ने 16 हजार से अधिक वोट पाकर महागठबंधन के अल्पसंख्यक (मुस्लिम) वोट बैंक में सेंध लगाई, जिसका सीधा लाभ JDU को मिला। 2025 में यदि महागठबंधन में RJD और CPI के बीच सीटों को लेकर तालमेल गड़बड़ाता है या कोई मजबूत तीसरा उम्मीदवार आता है, तो NDA के लिए जीत आसान होगी। |
| मिथिला क्षेत्र के मुद्दे | नीतीश सरकार द्वारा ग्रामीण सड़कों का निर्माण और हर घर नल का जल जैसी योजनाएं, जिनका जिक्र मुख्यमंत्री ने अपनी रैलियों में किया था, स्थानीय मतदाताओं को प्रभावित करती हैं। |
राम नरेश पांडेय/महागठबंधन (CPI) की जीत की राह और JDU उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (JDU की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) | सुधांशु शेखर 2016 से लगातार विधायक हैं। इतने लंबे समय तक पद पर रहने से स्वाभाविक सत्ता विरोधी लहर पैदा हो सकती है। यदि स्थानीय लोग विधायक के काम से असंतुष्ट हैं, तो वे बदलाव के लिए वोट कर सकते हैं। |
| वामपंथ का मजबूत ऐतिहासिक आधार | हरलाखी सीट पर कांग्रेस और CPI ने 6-6 बार जीत दर्ज की है। CPI के उम्मीदवार राम नरेश पांडेय एक स्थापित नेता हैं, जिनका अपना एक समर्पित कोर कैडर (दलित, गरीब और अतिपिछड़ा) है। महागठबंधन (RJD-CPI) के M-Y समीकरण के साथ अगर यह कोर कैडर एकजुट होता है, तो मुकाबला पलट सकता है। |
| गठबंधन की एकजुटता | यदि 2025 में महागठबंधन के घटक दल (विशेषकर RJD और वाम दल) अपने यादव और अल्पसंख्यक वोटों को CPI उम्मीदवार के पक्ष में पूरी तरह से एकजुट करने में सफल होते हैं, और वोटों का विभाजन नहीं होता है, तो NDA के लिए बड़ी चुनौती खड़ी होगी। |
| स्थानीय कृषि और नेपाल सीमा के मुद्दे | कृषि आधारित इस क्षेत्र में बाढ़ की समस्या, कृषि उत्पादों की कीमत और नेपाल सीमा से जुड़े सुरक्षा/तस्करी के मुद्दे प्रमुख हैं। इन ज्वलंत समस्याओं पर विधायक की विफलता मतदाताओं को NDA के खिलाफ मतदान करने के लिए प्रेरित कर सकती है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
हरलाखी की लड़ाई मुख्य रूप से JDU के सुधांशु शेखर की व्यक्तिगत छवि और NDA के ‘विकास’ फैक्टर तथा CPI के राम नरेश पांडेय की वामपंथी जड़ें और महागठबंधन के M-Y आधार के बीच है।
2025 के चुनाव में, JDU के सुधांशु शेखर की व्यक्तिगत पकड़ और NDA का मजबूत कोर वोट बैंक उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है। उनका पिछला जीत का अंतर (17,593) भी काफी बड़ा है। हालांकि, यदि महागठबंधन इस बार अपने अल्पसंख्यक वोट को बिखरने से रोकने में सफल होता है और वामपंथी आधार को मजबूत करता है, तो यह सीट कांटे की टक्कर में बदल जाएगी।
संभावित विजेता: JDU के सुधांशु शेखर (NDA)। (बड़ी जीत के अंतर, स्थापित व्यक्तिगत छवि और मजबूत गठबंधन आधार के चलते JDU इस सीट को बरकरार रखने की प्रबल दावेदार है।2 महागठबंधन की एकमात्र उम्मीद वोटों के विभाजन को पूरी तरह से रोकना और सत्ता विरोधी लहर का लाभ उठाना है।)