बाबूबरही विधानसभा (सीट क्रम संख्या 34) बिहार के मधुबनी जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जिसे यादव और अति-पिछड़ी जाति (EBC) के वोटों का गढ़ माना जाता है। इस सीट का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है, जहाँ RJD ने चार बार और JDU ने तीन बार (हाल ही में लगातार दो बार) जीत दर्ज की है।
प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| मीना कुमारी (विजेता) | JDU (NDA) | 77,367 | 11,488 वोट |
| उमाकांत यादव | RJD (महागठबंधन) | 65,879 | – |
मीना कुमारी/NDA (JDU) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| पारंपरिक EBC वोट बैंक पर पकड़ | यह सीट स्वर्गीय कपिल देव कामत की विरासत से जुड़ी है, जो अति-पिछड़ी जाति (EBC) से आते थे। उनकी बहू, मीना कुमारी (JDU), ने 2020 में यह सीट जीती। JDU की जीत का मुख्य आधार नीतीश कुमार का कुशवाहा, अति-पिछड़ा और महादलित वोट बैंक है। यह कोर समर्थन JDU को मजबूत आधार प्रदान करता है। |
| हाल के लोकसभा चुनावों का प्रदर्शन | JDU की लगातार जीत और NDA गठबंधन का लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन यह दर्शाता है कि स्थानीय मुद्दों के बावजूद राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय नेतृत्व का समर्थन इस सीट पर बरकरार है। |
| यादव वोटों का बिखराव (संभावित) | बाबूबरही में सबसे बड़ा मतदाता समूह यादव (14.50%) हैं, लेकिन RJD का यादव उम्मीदवार हमेशा जीत नहीं पाया है (JDU ने लगातार दो बार जीता है)। यदि RJD खेमे में कोई आंतरिक मतभेद या यादव वोटों में विभाजन होता है, तो JDU की जीत का अंतर बढ़ सकता है। |
| NDA गठबंधन की एकजुटता | यदि 2025 में NDA गठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ता है (JDU और BJP का संयुक्त आधार), तो यह RJD के M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण पर भारी पड़ सकता है, क्योंकि NDA को सवर्ण, वैश्य, और EBC का मजबूत समर्थन प्राप्त है। |
उमाकांत यादव/महागठबंधन (RJD) की जीत की राह और JDU उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (JDU की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| विधायक के प्रति ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ | कई स्थानीय रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि वर्तमान विधायक मीना कुमारी के खिलाफ क्षेत्र में भारी असंतोष (Anti-Incumbency) है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पिछले 10 वर्षों में कोई काम धरातल पर नहीं हुआ है और विधायक उनसे बात करने के लिए भी उपलब्ध नहीं होती हैं। |
| M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण की ताकत | बाबूबरही यादव (14.50%) और मुस्लिम (11.30%) मतदाताओं की बहुलता वाली सीट है। यदि RJD के उम्मीदवार उमाकांत यादव इस M-Y कोर वोट बैंक को पूरी तरह से गोलबंद करने में सफल होते हैं, और इसमें तेजस्वी यादव के रोजगार के वादे का युवा वोट जुड़ता है, तो वे आसानी से 11,488 वोटों का अंतर पाट सकते हैं। |
| उम्मीदवार बदलने की मांग | स्थानीय जनता के एक वर्ग ने खुले तौर पर कहा है कि यदि JDU उम्मीदवार को नहीं बदलती है, तो एनडीए के लिए यह सीट जीतना बहुत मुश्किल होगा, भले ही वे मोदी जी के नाम पर वोट दे रहे हों। यह कैंडिडेट-विशेष असंतोष JDU के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। |
| पलायन का मुद्दा | क्षेत्र से युवाओं का रोजगार के लिए भारी पलायन एक बड़ी समस्या है, जिसे महागठबंधन (RJD) मजबूती से चुनावी मुद्दा बना सकता है, जिससे JDU के खिलाफ ग्रामीण क्षेत्रों में गुस्सा बढ़ सकता है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
बाबूबरही विधानसभा सीट पर मुकाबला कड़ा और द्विपक्षीय रहने की संभावना है। यह सीट मीना कुमारी/JDU के लिए एंटी-इनकम्बेंसी के खिलाफ उनकी विरासत और NDA के कोर वोट बैंक को बचाने की चुनौती है, जबकि उमाकांत यादव/RJD के लिए यह कोर M-Y समीकरण की एकजुटता और स्थानीय असंतोष का फायदा उठाने का मौका है।
2025 के चुनाव में, यदि JDU वर्तमान विधायक को ही मैदान में उतारती है और स्थानीय असंतोष मजबूत रहता है, तो RJD के उमाकांत यादव की जीत की संभावना अधिक होगी। हालांकि, यदि JDU एक मजबूत वैकल्पिक उम्मीदवार उतारती है, या अंतिम समय में राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय लहर हावी होती है, तो परिणाम NDA के पक्ष में जा सकता है।
संभावित विजेता: उमाकांत यादव (RJD – महागठबंधन)। (विधायक के खिलाफ मजबूत एंटी-इनकम्बेंसी और M-Y समीकरण की ताकत, जो JDU की 11,488 वोटों की पिछली जीत को पलटने के लिए काफी हो सकती है।)