बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में, किशनगंज जिले की ठाकुरगंज (Thakurganj) विधानसभा सीट पर वर्तमान राजनीतिक समीकरणों और पिछले परिणामों के विश्लेषण के आधार पर, महागठबंधन (राष्ट्रीय जनता दल – RJD) के उम्मीदवार और वर्तमान विधायक सऊद आलम के जीतने की प्रबल संभावना है।

यह सीट मुस्लिम बहुल होते हुए भी एक अस्थिर सीट रही है, जहां बार-बार विधायक बदले हैं और मुकाबला अक्सर त्रिकोणीय या निर्दलीय बनाम मुख्य दलों के बीच रहा है।


विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन उम्मीदवार – सऊद आलम, RJD)

ठाकुरगंज सीट पर सऊद आलम (RJD) की संभावित जीत के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. मजबूत MY (मुस्लिम-यादव) आधार:

  • मुस्लिम मतदाता निर्णायक: ठाकुरगंज में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 65% है, जो किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। RJD का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण इस सीट पर सबसे मजबूत आधार प्रदान करता है।
  • वर्तमान विधायक का लाभ: सऊद आलम वर्तमान विधायक हैं और 2020 में उन्होंने 79,909 वोट प्राप्त करके जीत हासिल की थी। विधायक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान किए गए कार्य और उनकी व्यक्तिगत पकड़ उन्हें ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) से बचा सकती है।
  • सीट का इतिहास: मुस्लिम बहुल होने के कारण इस सीट पर परंपरागत रूप से कांग्रेस और RJD को लाभ मिलता रहा है। RJD ने 2025 के लिए भी सऊद आलम को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जिससे MY वोट एकजुट होंगे।

2. विपक्षी वोटों का विभाजन:

  • निर्दलीय चुनौती: 2020 में RJD की जीत निर्दलीय उम्मीदवार गोपाल कुमार अग्रवाल (56,022 वोट) से कड़े मुकाबले के बाद हुई थी। यदि 2025 में भी गोपाल अग्रवाल या उनके जैसे कोई मजबूत निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में आता है, तो वह मुख्य रूप से गैर-मुस्लिम और कुछ एंटी-RJD मुस्लिम वोटों को काटेगा।
  • AIMIM का सीमित प्रभाव: सीमांचल क्षेत्र में AIMIM की मौजूदगी RJD के मुस्लिम वोटों को काटती है। हालांकि, ठाकुरगंज में 2020 में AIMIM को बहादुरगंज या अन्य सीटों जितना बड़ा वोट शेयर नहीं मिला था। यदि AIMIM मजबूत उम्मीदवार उतारती है, तो यह मुख्य रूप से RJD के जीत के अंतर को कम करेगा, न कि उनकी जीत को पूरी तरह रोकेगा।

3. NDA उम्मीदवार के प्रति मुस्लिम समुदाय की अरुचि:

  • NDA का संघर्ष: NDA (JDU/BJP) के लिए इस सीट पर जीतना मुश्किल रहा है। 2020 में JDU के नौशाद आलम तीसरे स्थान पर रहे थे, जिन्हें केवल 22,082 वोट मिले थे। मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण, मुस्लिम तबके का अधिकांश वोट ‘सेकुलर’ गठबंधन (RJD+) के पक्ष में केंद्रित होने की संभावना है, जिससे NDA उम्मीदवार पीछे रह जाएगा।

विपक्षी दलों की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (NDA, निर्दलीय/AIMIM)

ठाकुरगंज सीट पर अन्य उम्मीदवारों/दलों की जीत की राह में बाधा बनने वाले मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. NDA (JDU/BJP) के लिए प्रतिकूल स्थितियाँ

  • सीमित वोट आधार: 2020 में NDA की सहयोगी JDU को बहुत कम वोट मिले थे, जो यह दर्शाता है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र में उनका जनाधार सीमित है।
  • ध्रुवीकरण की सीमा: NDA तभी जीत सकती है जब मुस्लिम वोट अत्यधिक रूप से विभाजित हों। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में JDU को इस विधानसभा क्षेत्र में एक छोटी सी बढ़त मिली थी, जो यह दर्शाती है कि NDA के लिए पलटवार की उम्मीद तो है, लेकिन मजबूत एंटी-NDA वोटिंग के सामने यह चुनौती बनी रहेगी।

2. निर्दलीय/गोपाल अग्रवाल की चुनौती

  • दलगत समर्थन का अभाव: निर्दलीय उम्मीदवार गोपाल अग्रवाल ने 2015 में LJP और 2020 में निर्दलीय के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया था। उनका मुख्य नुकसान यह है कि उन्हें किसी बड़े दल का संपूर्ण संगठनात्मक समर्थन नहीं मिलता, जिससे अंतिम समय में मतदाताओं का समर्थन एकजुट नहीं हो पाता।
  • RJD के लिए खतरे की घंटी: यदि सऊद आलम के प्रदर्शन से असंतुष्ट मुस्लिम मतदाता और मजबूत हिंदू-गैर-मुस्लिम मतदाता गोपाल अग्रवाल का समर्थन करते हैं, तो मुकाबला कड़ा होगा। 2020 में अग्रवाल ने 56,022 वोट लेकर सऊद आलम को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन 23,887 वोटों के अंतर से हार गए थे।

3. AIMIM की निर्णायक क्षमता

  • वोट-कटवा की छवि: AIMIM के पास सीमांचल में प्रभावशाली उपस्थिति है, लेकिन ठाकुरगंज में उन्हें 2020 में केवल 18,000 के आसपास वोट मिले थे। यदि AIMIM मजबूत होती है, तो वह मुख्य रूप से RJD के मुस्लिम वोट काटेगी। यदि मुकाबला RJD और निर्दलीय के बीच रहता है, तो AIMIM के वोट निर्दलीय को फायदा पहुँचाकर RJD को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन यह स्थिति RJD की जीत को खतरे में डालने की बजाय मुकाबले को कड़ा बनाएगी।

निष्कर्ष:

ठाकुरगंज सीट पर सऊद आलम (RJD) के पास सबसे मजबूत मुस्लिम-यादव आधार है और वह वर्तमान विधायक होने का लाभ उठाएंगे। विपक्षी वोटों का संभावित विभाजन (निर्दलीय/AIMIM/NDA) RJD के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यह सीट एक कड़ा मुकाबला देखेगी, लेकिन RJD उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है, बशर्ते महागठबंधन के भीतर कोई बड़ा मतभेद न हो।

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