बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दरभंगा जिले की केवटी सीट एक बेहद हाई-प्रोफाइल और कांटे की टक्कर वाली सीट है। यह वह सीट है जहां जातीय समीकरण और कद्दावर नेताओं का दांव हमेशा परिणाम को अप्रत्याशित बनाते हैं। 2020 में भाजपा ने राजद के एक मजबूत नेता को हराकर यह सीट जीती थी।

वर्तमान राजनीतिक माहौल, 2024 लोकसभा चुनाव के रुझानों और जातीय समीकरणों को देखते हुए, केवटी सीट पर NDA गठबंधन (BJP) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है, हालांकि यह मुकाबला बेहद कड़ा रहेगा।

संभावित विजेता: डॉ. मुरारी मोहन झा (भारतीय जनता पार्टी – BJP) – NDA (यदि NDA उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाती है)


डॉ. मुरारी मोहन झा (BJP) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:

  1. कद्दावर नेता को हराने का श्रेय (2020):
    • 2020 में, भाजपा के मुरारी मोहन झा ने राजद के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी को 5,126 वोटों (लगभग 3.20%) के अंतर से हराया था। एक युवा चेहरे का राजद के इतने बड़े नेता को हराना उनकी व्यक्तिगत अपील और भाजपा के मजबूत आधार को दर्शाता है।
  2. जातिगत समीकरण का जटिल मिश्रण:
    • केवटी में मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, रविदास और पासवान मतदाताओं की निर्णायक संख्या है।
    • डॉ. मुरारी मोहन झा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, जिनका एक बड़ा और एकजुट वोट बैंक उन्हें मिलता है।
    • भाजपा/NDA को सवर्ण (ब्राह्मण/राजपूत), अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और दलित (पासवान/रविदास) वोटों का एक बड़ा हिस्सा मिलता है। 2024 लोकसभा चुनाव में NDA की एकजुटता का प्रभाव इन वर्गों में स्पष्ट दिखा।
  3. NDA की वर्तमान एकजुटता और लोकसभा रुझान:
    • 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA ने इस विधानसभा खंड में अच्छी बढ़त हासिल की, जो दर्शाता है कि केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार होने का लाभ उन्हें मिल रहा है। JDU के EBC और लोजपा (रामविलास) के पासवान वोटों का सीधा स्थानांतरण BJP उम्मीदवार को बड़ी मजबूती प्रदान करता है।
  4. विकास के मुद्दे:
    • दरभंगा जिले में एम्स निर्माण, आईटी पार्क और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स के चलते क्षेत्र में भाजपा के प्रति एक सकारात्मक माहौल बना है।

महागठबंधन/RJD उम्मीदवार की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:

यदि महागठबंधन RJD के डॉ. फ़राज़ फ़ातमी (जो 2015 में जीते थे और 2025 के लिए संभावित उम्मीदवार हैं) को मैदान में उतारता है, तो उनके सामने निम्नलिखित चुनौतियाँ होंगी:

  1. मुस्लिम वोटों में संभावित बंटवारा:
    • केवटी में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी है, जो पारंपरिक रूप से RJD का कोर वोट बैंक है। हालांकि, AIMIM या अन्य मुस्लिम-केंद्रित दलों की उपस्थिति या कुछ स्थानीय मुस्लिम नेताओं के दल-बदल करने की खबरें मुस्लिम वोटों के बिखराव का कारण बन सकती हैं, जिसका सीधा लाभ BJP को मिलेगा।
  2. यादव वोटों का पूर्ण स्थानांतरण मुश्किल:
    • RJD का मुख्य आधार ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण है। 2020 में, RJD ने एक मुस्लिम उम्मीदवार (अब्दुल बारी सिद्दीकी) को उतारा था, फिर भी वे हार गए थे। यह दिखाता है कि सिर्फ ‘MY’ समीकरण जीत की गारंटी नहीं है, और RJD को गैर-यादव OBC/EBC वोटों को आकर्षित करने में कठिनाई हो रही है।
  3. लगातार हार का इतिहास (2020):
    • 2015 में RJD (तब JDU के साथ) की जीत के बाद, 2020 में पार्टी इस सीट को हार गई। यह मनोवैज्ञानिक दबाव RJD पर बना रहेगा कि वह अपना किला वापस कैसे फतह करे।
  4. प्रतिस्पर्धा का कड़ा इतिहास:
    • यह सीट 2005 और 2010 में भी भाजपा के पास थी, और 2020 में भी भाजपा ने जीती। यह सिद्ध करता है कि यह भाजपा के लिए कोई कमजोर सीट नहीं है, बल्कि एक मजबूत गढ़ रही है, जिसे RJD सिर्फ महागठबंधन की मदद से ही जीत पाई थी।

निष्कर्ष और पूर्वानुमान:

केवटी सीट पर NDA के डॉ. मुरारी मोहन झा को RJD/महागठबंधन के उम्मीदवार से कड़ी टक्कर मिलेगी। हालांकि, ब्राह्मण वोटों की एकजुटता, NDA गठबंधन की संयुक्त शक्ति (विशेषकर EBC और SC वोटों का साथ), और RJD के ‘MY’ समीकरण में सेंधमारी की संभावनाओं को देखते हुए, डॉ. मुरारी मोहन झा (BJP-NDA) इस प्रतिष्ठित सीट पर अपनी जीत बरकरार रख सकते हैं।

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