मुजफ्फरपुर जिले की बोचहां (सुरक्षित) विधानसभा सीट ने हाल के वर्षों में कई राजनीतिक उलटफेर देखे हैं। यह सीट दिवंगत दलित नेता रमई राम की परंपरागत सीट रही है। 2022 के उपचुनाव में, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने यह सीट भारी अंतर से जीती थी, जिससे उसका मनोबल बढ़ा है।
वर्तमान राजनीतिक समीकरणों, खास तौर पर 2022 उपचुनाव के परिणाम और NDA में हुए नए गठबंधन (LJP-R के साथ) को देखते हुए, बोचहां सीट पर इस बार NDA गठबंधन (LJP-R/BJP) की उम्मीदवार बेबी कुमारी की जीत की संभावना अधिक है, क्योंकि NDA गठबंधन ने एक मजबूत दलित-सवर्ण-EBC समीकरण साधने की कोशिश की है।
संभावित विजेता: बेबी कुमारी (लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास/LJP-R) – NDA
बेबी कुमारी (NDA) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:
- उपचुनाव की हार को जीत में बदलने की रणनीति:
- 2022 के उपचुनाव में, बेबी कुमारी (तब BJP उम्मीदवार) को RJD के अमर पासवान से वोटों के भारी अंतर से हार मिली थी। यह हार VIP के मुसाफिर पासवान के निधन के बाद उपजे सहानुभूति लहर और RJD के मजबूत MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण के कारण हुई थी।
- 2025 में, NDA ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए बेबी कुमारी को LJP (रामविलास) के चुनाव चिह्न ‘हेलीकॉप्टर’ पर उतारा है। यह कदम दो महत्वपूर्ण लाभ देगा:
- चिराग पासवान का ‘युवा-दलित’ अपील: चिराग पासवान की लोकप्रियता खासकर युवा दलितों (पासवान उप-जाति सहित) में काफी अधिक है। बेबी कुमारी को चिराग पासवान के नाम पर बड़ा पासवान वोट बैंक मिल सकता है।
- दलित वोटों का समीकरण: यह सीट SC आरक्षित है, जहां पासवान मतदाताओं की संख्या निर्णायक है। LJP-R का सिंबल मिलने से यह वोट बैंक पूरी तरह NDA की ओर झुक सकता है।
- RJD विधायक के प्रति ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर):
- वर्तमान RJD विधायक अमर पासवान के कार्यकाल में भी बुधनगरा घाट पर पुल निर्माण जैसी दशकों पुरानी समस्या जस की तस बनी हुई है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, विकास कार्यों को लेकर जनता में असंतोष है। 2022 की सहानुभूति लहर 2025 तक खत्म हो चुकी होगी और लोग विधायक के प्रदर्शन पर वोट करेंगे।
- सवर्ण और वैश्य वोट का मजबूत ध्रुवीकरण:
- NDA के पक्ष में उच्च जाति (सवर्ण) और वैश्य मतदाताओं का मजबूत ध्रुवीकरण हमेशा रहता है। LJP-R के साथ आने से दलित (खासकर पासवान) वोट, सवर्ण और EBC वोट एकजुट होकर एक बड़ा वोट बैंक बना लेंगे, जो RJD के MY समीकरण को चुनौती दे सकता है।
अमर कुमार पासवान (RJD) की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:
यदि महागठबंधन RJD के अमर कुमार पासवान को ही उम्मीदवार बनाता है, तो उनके सामने निम्नलिखित प्रतिकूल कारक होंगे:
- ‘सहानुभूति लहर’ का खत्म होना:
- अमर पासवान ने 2022 का उपचुनाव अपने पिता मुसाफिर पासवान के निधन के बाद उपजी सहानुभूति लहर पर जीता था। इस उपचुनाव में उन्हें वोट मिले थे। 2025 के आम चुनाव में यह सहानुभूति कारक पूरी तरह समाप्त हो चुका होगा।
- विकास का मुद्दा और स्थानीय असंतोष:
- बोचहां के प्रमुख मुद्दे, जैसे- बूढ़ी गंडक नदी पर पुल का न बनना, जलजमाव, और सीमित स्वास्थ्य/शिक्षा सुविधाएं, विधायक अमर पासवान के खिलाफ जा सकते हैं। विपक्ष इन स्थानीय मुद्दों को जोर-शोर से उठाएगा, जिससे कोर वोट बैंक में भी निराशा फैल सकती है।
- LJP-R (चिराग) के कारण पासवान वोटों में भारी सेंध:
- अमर पासवान खुद पासवान समुदाय से हैं, लेकिन LJP (R) के मजबूत उम्मीदवार (बेबी कुमारी) के मैदान में होने से पासवान वोटों का एक बड़ा हिस्सा चिराग पासवान के नाम पर NDA को मिल जाएगा। पासवान वोट बँटने की स्थिति में RJD की जीत लगभग असंभव हो जाएगी, क्योंकि RJD की जीत केवल MY + पासवान वोटों के एक बड़े हिस्से पर निर्भर करती है।
- MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण पर अत्यधिक निर्भरता:
- RJD पूरी तरह से मुस्लिम ( के आसपास) और यादव वोटों पर निर्भर है। अनुसूचित जाति ( के आसपास, जिसमें पासवान निर्णायक हैं) के वोटों का बँटवारा होने पर केवल MY वोट RJD को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे, खासकर अगर NDA एक मजबूत दलित-EBC चेहरा पेश करे।
निष्कर्ष और पूर्वानुमान:
बोचहां सीट पर 2025 का चुनाव RJD के लिए सत्ता बरकरार रखने की चुनौती और NDA के लिए 2022 के उपचुनाव की हार का बदला लेने का मौका है।
RJD के अमर पासवान को अपने कोर मुस्लिम-यादव वोट बैंक को मजबूत करना होगा और स्थानीय असंतोष को दबाना होगा। वहीं, NDA की बेबी कुमारी (LJP-R) को चिराग पासवान की लोकप्रियता का पूरा लाभ मिलेगा, जिससे दलित (पासवान) वोट NDA की ओर मुड़ सकता है।
इस ‘दलित बनाम दलित’ की लड़ाई में, LJP-R के माध्यम से NDA का सफल जातीय समीकरण (सवर्ण + वैश्य + पासवान) RJD के MY आधार पर भारी पड़ सकता है। इसलिए, बेबी कुमारी (NDA) की जीत की संभावना अधिक है।