बनियापुर विधानसभा सीट सारण जिले की एक हाई-प्रोफाइल सीट है, जहाँ की राजनीति बाहुबली पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। यह सीट वर्तमान में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कब्जे में थी, लेकिन चुनाव से ठीक पहले यहाँ बड़ा उलटफेर हुआ है।

हाल ही में, लगातार तीन बार (2010, 2015, 2020) के RJD विधायक केदार नाथ सिंह (जो प्रभुनाथ सिंह के भाई हैं) ने पार्टी बदलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है, और NDA के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इसके जवाब में RJD ने चांदनी सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस दल-बदल और 2024 लोकसभा चुनाव के रुझानों के कारण, मुकाबला NDA के पक्ष में जाता दिख रहा है।

जीत की संभावना (पूर्वानुमान)

बनियापुर सीट पर इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार केदार नाथ सिंह (BJP) की जीत की संभावना अधिक (Higher) है। यह संभावना विधायक के दलबदल और 2024 लोकसभा चुनाव में NDA को मिली निर्णायक बढ़त पर आधारित है।


विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (NDA – केदार नाथ सिंह, BJP)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
विधायक का दलबदल और प्रभुनाथ सिंह परिवार का प्रभाव निवर्तमान विधायक केदार नाथ सिंह ने RJD छोड़कर BJP का टिकट लिया है। उनका प्रभाव (2010 से 3 बार लगातार जीत) और उनके भाई प्रभुनाथ सिंह का क्षेत्र में मजबूत दबदबा, जो राजपूत समुदाय के बीच व्यापक है, उन्हें एक बड़ा फायदा देगा। राजपूत मतदाता इस क्षेत्र में सबसे बड़ा एकल जातीय समूह हैं (लगभग 18.4%)।
लोकसभा 2024 में NDA की निर्णायक बढ़त 2024 के लोकसभा चुनाव में, BJP ने बनियापुर विधानसभा क्षेत्र में 23,400 वोटों की बहुत बड़ी बढ़त हासिल की थी। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विधानसभा चुनाव में RJD को वोट देने वाले मतदाता भी राष्ट्रीय चुनाव में ‘मोदी लहर’ के कारण NDA की ओर आकर्षित होते हैं। यह बढ़त NDA उम्मीदवार की जीत का मजबूत आधार है।
सवर्ण (राजपूत-भूमिहार-ब्राह्मण) मतों का ध्रुवीकरण बनियापुर में राजपूत (18.4%), भूमिहार और ब्राह्मण मतदाता प्रभावशाली संख्या में हैं। केदार नाथ सिंह (राजपूत) को BJP का टिकट मिलने से राजपूत और अन्य सवर्ण मतदाताओं का ध्रुवीकरण BJP के पक्ष में मजबूत होगा। 2020 में यह वोट तीन-चार हिस्सों में बँट गया था (JDU, VIP, LJP, निर्दलीय)। अब यह वोट एकजुट होकर NDA को मिलेगा।
एंटी-इनकम्बेंसी का निष्प्रभावी होना केदार नाथ सिंह के खिलाफ 15 साल की सत्ता विरोधी लहर हो सकती थी, लेकिन BJP में शामिल होने के कारण यह लहर अब RJD के खिलाफ मुड़ गई है। मतदाता अब उन्हें ‘सत्ताधारी गठबंधन’ के हिस्से के रूप में देखेंगे, जिसका लाभ उन्हें मिलेगा।

अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (महागठबंधन – चांदनी सिंह, RJD)

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
पारंपरिक उम्मीदवार का पार्टी छोड़ना (बड़ा झटका) RJD के लिए सबसे बड़ा झटका उसके मौजूदा विधायक का पार्टी छोड़ना है। केदार नाथ सिंह की लगातार तीन बार की जीत RJD के कोर यादव-मुस्लिम वोट बैंक के साथ राजपूत समुदाय के एक महत्वपूर्ण हिस्से को साधने की क्षमता पर निर्भर थी। उनके जाने से यह समीकरण बुरी तरह से टूट गया है।
चांदनी सिंह के लिए चुनौती RJD ने नई उम्मीदवार चांदनी सिंह को मैदान में उतारा है, जो दिवंगत विधायक अशोक सिंह की पत्नी हैं। उन्हें सहानुभूति लहर और बाहुबली प्रभुनाथ सिंह के विरोधियों का समर्थन मिलने की उम्मीद है, लेकिन उन्हें प्रभुनाथ सिंह परिवार के पारंपरिक दबदबे और केदार नाथ सिंह की तीन बार की जीत के कारण स्थापित हो चुके मजबूत व्यक्तिगत नेटवर्क को तोड़ना होगा। यह चुनौती बहुत बड़ी है।
लोकसभा चुनाव के परिणाम का दबाव RJD को 2024 लोकसभा चुनाव में बनियापुर सीट पर BJP से मिली 23,400 वोटों की विशाल हार का बोझ उठाना पड़ेगा। RJD का मुख्य आधार यादव (Y) और मुस्लिम (M) मतदाता हैं (मुस्लिम लगभग 12%), लेकिन यह संख्या राजपूत + भूमिहार + अन्य सवर्णों + गैर-यादव OBC के एकजुट वोट के सामने कम पड़ सकती है।
यादव वोट बैंक में संभावित विभाजन कुछ स्थानीय स्रोतों से पता चलता है कि प्रभुनाथ सिंह परिवार के जदयू के करीब जाने की ख़बरों और केदार नाथ सिंह के BJP में आने से यादव वोट बैंक भी भ्रमित हो सकता है। यदि RJD का कोर M-Y वोट बैंक भी पूरी तरह से एकजुट नहीं हुआ तो RJD के लिए जीत असंभव हो जाएगी।

यह विश्लेषण उपलब्ध राजनीतिक घटनाक्रमों और पूर्व चुनाव परिणामों पर आधारित है, जिसमें विधायक का दलबदल और 2024 लोकसभा में NDA की बड़ी बढ़त निर्णायक कारक हैं। अंतिम परिणाम मतदान के दिन मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।

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