पातेपुर विधानसभा (संख्या 130), जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, वैशाली जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है।1 2020 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर NDA को बड़ी जीत मिली थी, जिससे 2025 में भी इसका पलड़ा भारी दिखाई देता है।
संभावित विजेता: लखेंद्र कुमार रौशन, BJP (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन – NDA)2
(यह भविष्यवाणी पिछले चुनाव के बड़े अंतर, मौजूदा विधायक के मजबूत जनाधार और आरक्षित सीट पर NDA के सामाजिक समीकरण की सफलता पर आधारित है।)
जीत के मुख्य कारण और विश्लेषण (लखेंद्र रौशन/BJP के पक्ष में तथ्य)
| तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| निर्णायक जीत का बड़ा अंतर (2020) | 2020 के चुनाव में, लखेंद्र रौशन ने RJD के शिवचंद्र राम को 25,839 वोटों के भारी अंतर से हराया था। यह अंतर लगभग 15.80% था, जो इस सीट पर NDA की मजबूत पकड़ को दर्शाता है और इसे पलटना महागठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। |
| NDA का सफल सामाजिक समीकरण (दलित-ओबीसी गठजोड़) | पातेपुर में रविदास, पासवान और कुर्मी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। रविदास (दलित) और पासवान (दलित) वोटरों का एक बड़ा हिस्सा ‘मोदी फैक्टर’ और NDA के स्थानीय गठजोड़ के कारण BJP के पक्ष में मजबूत रहा है। कुर्मी वोटों पर JDU की पकड़ भी NDA को अतिरिक्त लाभ देती है। |
| वोट प्रतिशत में बड़ी बढ़त | लखेंद्र रौशन ने 2020 में 52.2% वोट हासिल किए थे, जो कि एक आरक्षित सीट के लिए बहुमत से कहीं अधिक है। यह स्पष्ट करता है कि NDA ने महागठबंधन के आधार वोटों में सेंध लगाई थी। |
| जाति से ऊपर ‘विकास’ और ‘राष्ट्रवाद’ का मुद्दा | 2020 में यह सीट जिस बड़े मार्जिन से जीती गई, वह यह दर्शाता है कि यहां जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर, केंद्र और राज्य में NDA सरकार के ‘विकास’ और ‘राष्ट्रवाद’ के मुद्दों ने मतदाताओं को प्रभावित किया था। |
| RJD के कोर वोट बैंक (MY) का सीमित प्रभाव | आरक्षित सीट होने के कारण, RJD का मुख्य आधार यादव-मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव अन्य सामान्य सीटों की तुलना में यहां सीमित हो जाता है, जिससे BJP को बढ़त बनाए रखने में आसानी होती है। |
अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य (शिवचंद्र राम/RJD के संदर्भ में)
NDA के विपरीत, महागठबंधन की तरफ से RJD के शिवचंद्र राम (या महागठबंधन का कोई अन्य उम्मीदवार, RJD ने पूर्व में प्रेमा चौधरी को भी टिकट दिया है) मैदान में उतर सकते हैं।
| प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| पिछले चुनाव में बड़ी हार | शिवचंद्र राम 2020 में 25,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हारे थे। यह आंकड़े RJD के लिए वोट बैंक एकजुट करने की गंभीर चुनौती को दर्शाते हैं। |
| दलित वोट बैंक पर NDA की सेंध | पातेपुर एक SC आरक्षित सीट है, जहाँ RJD दलित वोटरों को अपेक्षित रूप से आकर्षित करने में विफल रही। दलित (रविदास और पासवान) वोटरों के बीच ‘NDA फैक्टर’ की मजबूती RJD के लिए सबसे बड़ी प्रतिकूल स्थिति है। |
| RJD के परंपरागत उम्मीदवार को निराशा | पातेपुर का एक पुराना इतिहास रहा है, जहाँ RJD की प्रेमा चौधरी भी विधायक रह चुकी हैं, लेकिन 2020 में महागठबंधन के उम्मीदवार को मिली बड़ी हार बताती है कि RJD का आधार वोट बैंक इस सीट पर डगमगाया हुआ है। |
| सीट को पलटने के लिए बहुत अधिक ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ की आवश्यकता | 25,000 वोटों के अंतर को पलटने के लिए RJD को वर्तमान विधायक (लखेंद्र रौशन) के खिलाफ अत्यधिक मजबूत सत्ता विरोधी लहर (Strong Anti-Incumbency) पैदा करनी होगी, जिसकी संभावना मजबूत जीत के बाद कम होती है। |
निष्कर्ष:
पातेपुर (SC) विधानसभा सीट पर NDA के लखेंद्र कुमार रौशन (BJP) की जीत की संभावना अधिक मजबूत है।
- NDA की जीत का आधार: 2020 के चुनाव में हासिल किया गया बड़ा मार्जिन, दलित-ओबीसी गठजोड़ का प्रभावी क्रियान्वयन, और केंद्र तथा राज्य सरकार के प्रति सकारात्मक रुझान।
- महागठबंधन के लिए चुनौती: महागठबंधन को इस सीट पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए यादव-मुस्लिम आधार के अलावा दलित और ईबीसी (EBC) वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी करनी होगी, जो मौजूदा सांख्यिकी के अनुसार काफी मुश्किल कार्य है।