परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)

वारिसनगर सीट वर्तमान में जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के कब्जे में है, लेकिन 2020 में यहाँ भाकपा (माले) (CPI-ML(L)) ने मजबूत चुनौती पेश की थी, जबकि लोजपा (LJP) ने निर्णायक वोट काटा था। 2025 में, चूंकि JDU और LJP(RV) NDA में एकजुट हो गए हैं, इसलिए यह सीट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पक्ष में झुकी हुई मानी जा रही है, लेकिन महागठबंधन (INDIA) और उसके सहयोगी भाकपा (माले) की जमीनी पकड़ इसे कड़ा मुकाबला बनाएगी।

  • संभावित विजेता (रुझानों के आधार पर): NDA के उम्मीदवार (JDU के अशोक कुमार)

NDA उम्मीदवार की स्थिति मजबूत होने का मुख्य कारण 2024 लोकसभा चुनाव में बड़ी बढ़त और वोटों का एकजुट होना है।1


प्रमुख दावेदार और जीत के लिए मुख्य विश्लेषण

उम्मीदवार/पार्टी वर्तमान स्थिति 2020 चुनाव परिणाम मुख्य राजनीतिक गठबंधन
अशोक कुमार (JDU) मौजूदा विधायक (तीन बार से) 68,356 वोट (जीत) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)
फूलबाबू सिंह (CPI-ML(L)) उपविजेता 54,555 वोट (हार) महागठबंधन (INDIA)

1. अशोक कुमार (JDU) की जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA की मजबूती)

अशोक कुमार (JDU) की संभावित जीत का आधार निम्नलिखित कारकों पर टिका होगा:

  • लगातार तीन बार की जीत (2010 से):
    • अशोक कुमार 2010 से इस सीट पर काबिज हैं, जो उनकी व्यक्तिगत मजबूत पकड़ और स्थानीय मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता को दर्शाता है।
  • NDA का मजबूत जातीय समीकरण (कुर्मी-कोइरी + सवर्ण + पासवान एकजुटता):
    • वारिसनगर में कुर्मी और कोइरी (कुशवाहा) समुदाय के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। JDU के उम्मीदवार को इन समुदायों का मजबूत समर्थन मिलता है।
    • 2020 में JDU को कमजोर करने वाले LJP के 23,928 वोट इस बार NDA के खेमे में वापस आ सकते हैं, क्योंकि LJP (रामविलास) अब NDA का हिस्सा है।
    • सवर्ण और पासी (पासवान) मतदाताओं का बड़ा हिस्सा NDA के पक्ष में मजबूती से ध्रुवीकृत होने की संभावना है।
  • 2024 लोकसभा चुनाव में भारी बढ़त (सबसे बड़ा सांख्यिकीय तथ्य):
    • 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA (LJP-RV) को वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र से 33,342 वोटों की बहुत बड़ी बढ़त मिली थी।2 यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्र में NDA के प्रति मजबूत लहर है, जो 2025 के विधानसभा चुनाव में भी निर्णायक साबित हो सकती है।

2. फूलबाबू सिंह (CPI-ML(L)) की जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन का आधार)

फूलबाबू सिंह (CPI-ML(L)) की जीत की संभावनाएँ निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करेंगी:

  • मजबूत वामपंथी आधार और जमीनी संघर्ष:
    • भाकपा (माले) का पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र के गरीब, दलित (मुख्यतः रविदास) और मजदूर वर्ग के बीच मजबूत संगठन और जमीनी आंदोलन रहा है। 2020 में 54,555 वोट प्राप्त करना इस मजबूत आधार को दर्शाता है।
  • महागठबंधन का MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण:
    • वारिसनगर में मुस्लिम (12.5%) और यादव मतदाताओं की अच्छी संख्या है। यदि आरजेडी (RJD) का यह कोर वोटबैंक पूरी तरह से भाकपा (माले) को हस्तांतरित होता है, तो वह NDA को कड़ी टक्कर दे सकता है।
  • एंटी-इनकम्बेंसी का लाभ:
    • अशोक कुमार 15 साल से विधायक हैं।3 उनके खिलाफ संभावित एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का सीधा फायदा फूलबाबू सिंह उठा सकते हैं।
  • तेजस्वी यादव का आकर्षण (राज्य-व्यापी):
    • यदि तेजस्वी यादव का “रोजगार” और “बदलाव” का राज्य-व्यापी मुद्दा हावी होता है, तो महागठबंधन उम्मीदवार को इसका लाभ मिलेगा।

अन्य उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी

NDA उम्मीदवार (अशोक कुमार) के लिए प्रतिकूल तथ्य (चुनौतियाँ)

प्रतिकूल तथ्य/चुनौती विश्लेषण
तीसरी बार की एंटी-इनकम्बेंसी लगातार तीन बार जीतने के बाद, 15 साल की सत्ता विरोधी लहर उनके खिलाफ जा सकती है, जिससे गैर-कोर मतदाता उनसे छिटक सकते हैं।
वोट शेयर में कमी (2020 में) 2015 में 61.7% वोट शेयर से 2020 में 35.97% पर आना (LJP के कारण) उनकी घटती व्यक्तिगत लोकप्रियता का संकेत था। यदि NDA गठबंधन का वोट एकजुट नहीं हुआ, तो स्थिति मुश्किल होगी।
भाकपा (माले) की जमीनी ताकत माले का स्थानीय रूप से मजबूत आधार, विशेषकर दलित/गरीब वोटबैंक में, JDU के कोर वोट को नुकसान पहुंचा सकता है।

महागठबंधन उम्मीदवार (फूलबाबू सिंह) के लिए प्रतिकूल तथ्य (बाधाएँ)

प्रतिकूल तथ्य/सांख्यिकी विश्लेषण
2024 लोकसभा की भारी लीड NDA को मिली 33,342 वोटों की विशाल बढ़त महागठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। उन्हें इस अंतर को पाटने के लिए भारी ध्रुवीकरण की आवश्यकता होगी।
NDA का वोट एकजुट होना 2020 में LJP के 23,928 वोट (12.59%) ने JDU को नुकसान पहुंचाया था। इस बार LJP(RV) के NDA में रहने से यह वोट JDU के पक्ष में जाने की प्रबल संभावना है, जिससे महागठबंधन के लिए राह कठिन हो जाएगी।
जातीय समीकरण की सीमाएँ माले मुख्य रूप से दलित और कुछ हद तक मुस्लिम/यादव वोट पर निर्भर है। कुशवाहा/कुर्मी और सवर्ण वोटों का बड़ा हिस्सा (जो निर्णायक हैं) JDU/NDA के पक्ष में जाने से जीत मुश्किल हो सकती है।

निष्कर्ष:

समस्तीपुर की वारिसनगर सीट पर JDU के अशोक कुमार एक अनुभवी और मजबूत नेता हैं। 2020 में उनकी जीत का अंतर कम हुआ था, लेकिन 2025 में NDA गठबंधन में LJP(RV) के वोटों का वापस आना और 2024 लोकसभा में NDA की भारी बढ़त उनके पक्ष में निर्णायक रूप से काम कर सकती है। महागठबंधन के उम्मीदवार फूलबाबू सिंह की माले के मजबूत जमीनी संगठन और MY समीकरण पर निर्भरता रहेगी। चुनावी गणित स्पष्ट रूप से NDA के पक्ष में अधिक झुकाव दिखाता है, लेकिन माले की संगठनात्मक शक्ति और एंटी-इनकम्बेंसी अंतिम समय में कोई भी बड़ा उलटफेर कर सकती है।

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