बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पूर्णिया जिले की अमौर (Amour) सीट सीमांचल की सबसे हॉट सीटों में से एक है। यह सीट AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान का गढ़ है, जिन्होंने 2020 में 52,515 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी। अमौर एक मुस्लिम बहुल सीट है (लगभग 70% मुस्लिम मतदाता)।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और 2020 के परिणामों के विश्लेषण के आधार पर, AIMIM के अख्तरुल ईमान की जीत की संभावना प्रबल है, बशर्ते सेक्युलर वोटों का बिखराव 2020 जैसा ही रहे।
विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (AIMIM – अख्तरुल ईमान)
अमौर सीट पर AIMIM के अख्तरुल ईमान की संभावित जीत के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. अख्तरुल ईमान का व्यक्तिगत और राजनीतिक कद:
- क्षेत्रीय स्वीकार्यता (सबसे बड़ा फैक्टर): अख्तरुल ईमान केवल AIMIM के उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि सीमांचल के एक प्रमुख मुस्लिम चेहरा और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। 2020 में उन्होंने 94,459 वोट हासिल किए थे, जो उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और AIMIM के मजबूत संगठन को दर्शाता है।
- 2020 की प्रचंड जीत का मनोवैज्ञानिक प्रभाव: 52,515 वोटों के विशाल अंतर से मिली जीत एक अभेद्य किला बन चुकी है। यह जीत न केवल प्रतिद्वंद्वियों का मनोबल तोड़ती है, बल्कि मतदाताओं में यह विश्वास भी मजबूत करती है कि अख्तरुल ईमान ही जीत सकते हैं, जिससे एंटी-NDA मुस्लिम वोट उनके पक्ष में और एकजुट हो सकते हैं।
- दलबदल से अछूते रहना: AIMIM के चार विधायक (कोचाधामन सहित) RJD में शामिल हो गए, लेकिन अख्तरुल ईमान ने पार्टी नहीं छोड़ी। यह तथ्य उन्हें ईमानदारी और स्थिरता के प्रतीक के रूप में पेश करता है, जिसका लाभ उन्हें 2025 में मिल सकता है।
2. मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण और बिखराव का फायदा:
- अमौर एक ऐसा क्षेत्र है जहां AIMIM, कांग्रेस और JDU तीनों ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। 2020 में JDU (NDA) को 41,944 और कांग्रेस (महागठबंधन में) को 31,863 वोट मिले थे।
- महागठबंधन की चुनौती: यदि इस बार RJD/कांग्रेस एक ही उम्मीदवार नहीं उतारते हैं, या RJD की परंपरागत मुस्लिम-वोट बैंक में कांग्रेस/AIMIM सेंध लगाती है, तो वोटों का बिखराव होगा। इस बिखराव का सीधा फायदा अख्तरुल ईमान को मिलेगा, क्योंकि उनका कोर वोट बैंक सबसे मजबूत है।
3. विकास बनाम पहचान की राजनीति:
- अख्तरुल ईमान ने अपने कार्यकाल में पुल-पुलिया और सड़क निर्माण जैसे विकास कार्यों का दावा किया है। साथ ही, वे सीमांचल के मुद्दों को मुखरता से उठाते हैं, जिससे उनकी पहचान की राजनीति को भी बल मिलता है।
अन्य उम्मीदवारों की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (महागठबंधन और NDA)
अमौर सीट पर NDA और महागठबंधन के उम्मीदवारों की राह में बाधा बनने वाले मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. महागठबंधन उम्मीदवार (संभावित कांग्रेस/RJD)
- सबसे बड़ी चुनौती – सेक्युलर वोटों का विभाजन: 2020 में, महागठबंधन में शामिल कांग्रेस के उम्मीदवार (अब्दुल जलील मस्तान) की हार का मुख्य कारण AIMIM के साथ मुस्लिम वोटों का बंटवारा था। 2025 में भी, अगर महागठबंधन और AIMIM अलग-अलग लड़ते हैं, तो मुस्लिम वोट फिर से विभाजित होंगे, जिसका लाभ अंततः AIMIM को मिलेगा।
- कांग्रेस के गढ़ का पतन: अमौर कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था (अब्दुल जलील मस्तान 8 बार विधायक रहे)। 2020 में कांग्रेस उम्मीदवार का तीसरे स्थान पर खिसक जाना (31,863 वोट) यह दिखाता है कि पार्टी का पारंपरिक जनाधार AIMIM के कारण कमजोर हो चुका है।
- स्थानीय नेतृत्व की कमजोरी (AIMIM की तुलना में): अख्तरुल ईमान की तुलना में महागठबंधन का स्थानीय मुस्लिम नेतृत्व उतना मजबूत नहीं दिखता, जो पूरे मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट कर सके।
2. NDA उम्मीदवार (संभावित JDU – सबा ज़फर)
- 2020 की करारी हार: JDU के सबा ज़फर 2020 में 52,515 वोटों के बड़े अंतर से हारे थे। यह अंतर यह दर्शाता है कि NDA (JDU) के मुस्लिम उम्मीदवार भी AIMIM की लहर को रोक नहीं पाए थे।
- मुस्लिम बहुल सीट पर सीमित आधार: 70% से अधिक मुस्लिम आबादी वाली सीट पर NDA के उम्मीदवार को केवल हिन्दू और गैर-AIMIM मुस्लिम वोटों पर निर्भर रहना होगा। 2020 में JDU को 41,944 वोट मिले थे, जो यह बताता है कि NDA का वोट बैंक सीमित है और AIMIM के संयुक्त मुस्लिम वोट बैंक को टक्कर नहीं दे सकता।
- पहचान का संकट: सबा ज़फर पहले BJP के टिकट पर भी जीत चुके हैं। NDA में होने के कारण, मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा उन्हें AIMIM के मुकाबले विकल्प के रूप में नहीं मानेगा।
निष्कर्ष:
अमौर सीट पर जीत का फैसला पूरी तरह AIMIM, RJD और कांग्रेस के बीच मुस्लिम वोटों के बंटवारे पर निर्भर करेगा।
- AIMIM (अख्तरुल ईमान) की जीत की संभावना सबसे अधिक है क्योंकि वह स्थिर नेतृत्व और सबसे मजबूत व्यक्तिगत जनाधार का प्रतिनिधित्व करते हैं, और वोटों के बंटवारे में उन्हें फायदा होगा।
- यदि RJD और कांग्रेस संयुक्त रूप से एक अत्यंत मजबूत और विश्वसनीय मुस्लिम उम्मीदवार उतारते हैं, और AIMIM विरोधी मुस्लिम वोट को एकजुट करने में सफल होते हैं, तभी महागठबंधन AIMIM को चुनौती दे सकता है।
- NDA गठबंधन इस सीट पर तीसरे स्थान पर रहने की संभावना है।