बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कटिहार सदर विधानसभा सीट एक हाई-प्रोफाइल और कांटे की टक्कर वाली सीट है। यह सीट पिछले 4 बार से लगातार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास है, जिसका प्रतिनिधित्व पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद करते हैं। उपलब्ध ऐतिहासिक आँकड़ों और वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के आधार पर, यह मुकाबला बेहद करीबी होने की उम्मीद है, लेकिन तारकिशोर प्रसाद (BJP/NDA) का पलड़ा थोड़ा भारी दिखता है।


विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA – तारकिशोर प्रसाद)

संभावित विजेता: तारकिशोर प्रसाद (BJP)

1. लगातार चार जीत का मजबूत आधार (एंटी-इनकम्बेंसी से लड़ना):

  • अजेय रिकॉर्ड: तारकिशोर प्रसाद 2005 (अक्टूबर), 2010, 2015 और 2020 में लगातार चार बार इस सीट से विधायक रहे हैं। यह उनके व्यक्तिगत जनाधार और संगठनात्मक पकड़ को दर्शाता है।
  • उपमुख्यमंत्री का प्रभाव: 2020-2022 तक उपमुख्यमंत्री रहने के कारण, कटिहार में उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों (जैसे ड्रेनेज सिस्टम और पुलों का निर्माण) को एनडीए भुनाने की कोशिश करेगा। इससे उन्हें एक मजबूत ‘विकास-पुरुष’ की छवि बनाने में मदद मिलेगी।

2. वैश्य-सवर्ण वोट बैंक पर वर्चस्व:

  • कटिहार सदर सीट पर वैश्य (बनिया), सवर्ण (राजपूत, ब्राह्मण) और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है, जो परंपरागत रूप से भाजपा का कोर वोट बैंक रहा है।
  • तारकिशोर प्रसाद स्वयं वैश्य समुदाय से आते हैं, और यह वोट बैंक उनके पक्ष में एकमुश्त और निर्णायक रूप से खड़ा रहता है, जो उन्हें एक मजबूत आधार देता है।

3. करीबी जीत की आदत:

  • 2020 में, उन्होंने राजद के राम प्रकाश महतो को 10,519 वोटों के अंतर से हराया था, जबकि 2015 में भी उन्होंने जेडीयू के उम्मीदवार को 14,894 वोटों से हराया था। यह दिखाता है कि वह कड़े मुकाबले में भी अपनी सीट बचाने में सक्षम हैं।
  • एनडीए के मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व (प्रधानमंत्री मोदी) और राज्य के नेतृत्व (मुख्यमंत्री नीतीश कुमार) का समर्थन उन्हें अतिरिक्त बल प्रदान करेगा।

अन्य उम्मीदवार की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (महागठबंधन – RJD/कांग्रेस)

संभावित उपविजेता: महागठबंधन का उम्मीदवार (संभवतः RJD के राम प्रकाश महतो)

1. मजबूत मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण के बावजूद हार:

  • कटिहार विधानसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक (मुस्लिम) और यादव मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है, जो महागठबंधन (RJD) का मुख्य आधार है।
  • 2020 में भी, RJD ने MY समीकरण और राम प्रकाश महतो की व्यक्तिगत पकड़ के बावजूद, तारकिशोर प्रसाद को हराने में सफलता नहीं पाई। यह स्पष्ट करता है कि महागठबंधन को जीत के लिए केवल MY समीकरण ही नहीं, बल्कि EBC और सवर्ण वोटों में भी सेंध लगानी होगी, जिसमें वह असफल रहा है।

2. उम्मीदवार पर पूर्ण निर्भरता का जोखिम:

  • महागठबंधन के पास तारकिशोर प्रसाद जैसा लगातार चार बार जीतने वाला कोई चेहरा नहीं है। अगर RJD पूर्व प्रत्याशी राम प्रकाश महतो को फिर से मैदान में उतारता है, तो उनके लिए 2020 के अंतर को पाटना एक बहुत बड़ी चुनौती होगी।
  • कांग्रेस या RJD के बीच अंतिम क्षणों में टिकट को लेकर खींचतान (जैसा कि सीमांचल की अन्य सीटों पर देखा जा रहा है) महागठबंधन के वोटरों को भ्रमित कर सकती है।

3. शहरी मतदाताओं पर कमजोर पकड़:

  • कटिहार सदर एक शहरी-केंद्रित सीट है, जहाँ 60% से अधिक मतदाता शहरी क्षेत्रों से आते हैं। शहरी मतदाता आमतौर पर भाजपा की तरफ झुके होते हैं और विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर वोट करते हैं, जो एनडीए के पक्ष में काम करता है।
  • मुस्लिम वोट का बिखराव (AIMIM या निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में आने की स्थिति में) महागठबंधन के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है।

4. 2020 का कम अंतर, फिर भी निर्णायक हार:

  • हालांकि 2020 में हार का अंतर 10,519 वोट था (जो कि पूर्णिया सदर से कम था), यह अंतर दिखाता है कि तारकिशोर प्रसाद का आधार मजबूत है और महागठबंधन इसे भेद नहीं पा रहा है। इस सीट पर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को व्यक्तिगत साख (Personal Goodwill) और जातीय ध्रुवीकरण से मात दी जा रही है।

निष्कर्ष

कटिहार सदर सीट पर तारकिशोर प्रसाद (BJP) का पलड़ा भारी है, और उनके द्वारा पाँचवीं बार जीत दर्ज करने की प्रबल संभावना है। उनकी जीत का मुख्य कारण उनका अभेद्य वैश्य-सवर्ण-EBC आधार और पिछले 20 वर्षों का चुनावी अनुभव है। महागठबंधन को यह सीट जीतने के लिए जातीय समीकरण से ऊपर उठकर एक मजबूत लहर और निर्णायक एंटी-इनकम्बेंसी को भुनाना होगा, जिसके लिए फिलहाल मजबूत संकेत नहीं दिख रहे हैं

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