कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित एक अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। यह विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय, जातीय समीकरण और विकास की मांगों का प्रमुख केंद्र रहा है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में कुटुंबा का विशेष महत्व है क्योंकि यह क्षेत्र जातीय राजनीति और समावेशी विकास के लिहाज से रणनीतिक मोर्चा साबित हो रहा है। कुटुंबा विधानसभा का राजनीतिक इतिहास, स्थानीय मुद्दे, प्रमुख नेता और आगामी चुनाव की रणनीति इस रिपोर्ट में विस्तार से प्रस्तुत है।​


कुटुंबा क्षेत्र का भौगोलिक एवं समाजिक परिदृश्य

कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र औरंगाबाद जिले का एक ग्रामीण और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में कुल 34 पंचायत आते हैं, जिनमें कुटुंबा, नवीनगर, देव प्रखंड शामिल हैं।
मतदाता लगभग 2.77 लाख हैं जिनमें अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 29.2% और मुस्लिम मतदाता लगभग 7.8% की भागीदारी रखते हैं।
क्षेत्र का प्रमुख आर्थिक आधार कृषि है जिसमे सिंचाई, जल आपूर्ति और सड़कों जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। भाजपा, कांग्रेस, राजद और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के बीच यहां राजनीति की जटिलता रहती है।​


राजनीतिक इतिहास और सियासी परिदृश्य

कुटुंबा विधानसभा सीट की स्थापना 1952 में हुई और तब से यहां लंबे समय तक राजनीति की विविध रंगतें देखी गईं।

  • जनता दल (यू) और कांग्रेस ने दशकभर इस सीट पर शासन किया।

  • 2015 में कांग्रेस के राजेश कुमार की जीत ने क्षेत्र में कांग्रेस की वापसी की।

  • 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेश कुमार ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के श्रवण भुइयां को पराजित किया, लेकिन मतदान में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने राजनीतिक चुनौतियों को बढ़ा दिया।

  • जदयू और राजद का प्रभाव धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।​


2020 का चुनाव परिणाम

2020 के चुनाव में कांग्रेस के राजेश कुमार ने 50,822 वोट प्राप्त किए जबकि उनके प्रतिद्वंदी ‘हम’ के श्रवण भुइयां को 46,409 वोट मिले।
मतदान प्रतिशत 52.06% था जो कि क्षेत्र की राजनीतिक जागरूकता को बताता है। यह मुकाबला बहुत ही कड़ा था, जिसमें कांग्रेस ने तनिक बढ़त बना कर जीत हासिल की।
राजनीतिक समीकरण में जातीय और राजनीतिक गठबंधन प्रमुख कारक रहे।​


2025 चुनाव की रणनीति और प्रमुख प्रत्याशी

2025 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने राजेश कुमार को पुनः उम्मीदवार बनाया है जो क्षेत्र में अपनी लोकप्रियता बरकरार रखने की कोशिश में हैं।
‘हम’ ने भी कड़ी चुनौती पेश करने की तैयारी कर रखी है।
जदयू, राजद एवं अन्य विपक्षी दल भी इस क्षेत्र में सक्रिय होकर वोट बैंक जुटाने की रणनीति बना रहे हैं।
चुनावी मुद्दे शिक्षा, महिला सुरक्षा, कृषि विकास, रोजगार एवं आधारभूत संरचना पर केंद्रित होंगे।​


जातीय समीकरण

कुटुंबा विधानसभा चुनावों में अनुसूचित जाति, मुस्लिम, यादव, कुर्मी इत्यादि कई जातीय समूह निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
जातीय गठबंधन चुनाव परिणामों को प्रभावित करता है।
मतदाता अब जाति आधारित राजनीति के साथ-साथ विकास और सामाजिक न्याय को भी महत्व देते हैं।​


स्थानीय विकास एवम् प्रमुख मुद्दے

  • सिंचाई व्यवस्था और पानी की उपलब्धता

  • शिक्षा संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों का संवर्द्धन

  • रोजगार और युवाओ के लिए अवसरों का सृजन

  • महिला सुरक्षा एवं सामाजिक कल्याण कार्यक्रम

  • सड़क, बिजली, जल की बेहतर व्यवस्था

  • सामाजिक न्याय और दलित उत्थान​


महिला एवं युवा मतदाताओं की भूमिका

महिला मतदाता क्षेत्र में सक्रिय और जागरूक हैं। यादव और दलित महिलाओं ने मतदान में खास हिस्सेदारी दी है।
युवा वर्ग शिक्षा, रोजगार और तकनीकी विकास को लेकर सतर्क और उत्सुक है। राजनीतिक दलों द्वारा इन्हें जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।​


चुनाव कार्यक्रम

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में 11 नवंबर को मतदान होगा।
नामांकन प्रक्रिया 13 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक होगी। परिणाम 14 नवंबर को घोषित किया जाएगा।​


निष्कर्ष

कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति की सामाजिक और विकास संबंधी चुनौतियों का मार्मिक उदाहरण है।
2025 के चुनावों में यहां जातीय राजनीति, विकास मुद्दे और सामाजिक समावेशन निर्णायक होंगे।
राजेश कुमार और अन्य राजनीतिक दिग्गजों के बीच मुकाबला बिहार की राजनीति में रुझान तय करेगा।
यह क्षेत्र बिहार लोकतंत्र की विविधता और विकास के प्रति जनता के दृष्टिकोण का आईना है।
कुटुंबा विधानसभा चुनाव 2025 में बिहार की राजनीति को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा।

 

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