केसरिया (पूर्वी चंपारण) विधानसभा सीट की राजनीति ऐतिहासिक रूप से वामपंथ ($CPI$) और कांग्रेस के प्रभुत्व वाली रही है, लेकिन हाल के चुनावों में यह $NDA$ और महागठबंधन के बीच एक कड़े मुकाबले वाली सीट बन गई है।
परिणाम की भविष्यवाणी:
केसरिया विधानसभा सीट पर 1$NDA$ गठबंधन की ओर से जनता दल यूनाइटेड (2$JDU$) की शालिनी मिश्रा की जीत की संभावना अधिक है।3 हालांकि, यह मुकाबला 4$2020$ की तरह ही कड़ा रहने की उम्मीद है, जहाँ शालिनी मिश्रा ने मात्र 5$9,227$ वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी।6
शालिनी मिश्रा की पारिवारिक राजनीतिक विरासत और $NDA$ के व्यापक सामाजिक आधार को देखते हुए, उन्हें महागठबंधन के उम्मीदवार पर मामूली बढ़त हासिल होने की उम्मीद है।
I. $JDU$ की शालिनी मिश्रा की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)
शालिनी मिश्रा ($JDU$) की जीत को मज़बूती देने वाले प्रमुख विश्लेषणात्मक कारक निम्नलिखित हैं:
1. पारिवारिक राजनीतिक विरासत और व्यक्तिगत पहचान
- मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि: शालिनी मिश्रा दिवंगत पूर्व सांसद कमला मिश्रा ‘मधुकर’ की बेटी हैं, जिन्होंने केसरिया और मोतिहारी से कई बार सांसद के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था।7 यह विरासत उन्हें स्थानीय ब्राह्मण और सवर्ण समुदाय के साथ-साथ पुराने वामपंथी समर्थकों के एक वर्ग के बीच भावनात्मक समर्थन दिलाती है।
- पहचान का लाभ: शालिनी मिश्रा क्षेत्र की निवासी हैं और लगातार $5$ वर्षों तक विधायक रहने के कारण उनकी व्यक्तिगत पहचान स्थापित हुई है।
2. $NDA$ का संगठनात्मक आधार और सरकारी कार्य
- नीतीश-मोदी फैक्टर: शालिनी मिश्रा को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के $EBC$ (अति पिछड़ा वर्ग) और महिला वोट बैंक का समर्थन मिलेगा, जो $JDU$ का मुख्य आधार है। साथ ही, उन्हें $NDA$ के सबसे बड़े घटक $BJP$ का सवर्ण और वैश्य वोट बैंक भी मिलेगा। $NDA$ की संयुक्त संगठनात्मक शक्ति उन्हें मजबूत बनाती है।
- विकास का एजेंडा: उन्होंने सड़कों और बिजली की स्थिति में सुधार के कार्यों पर जोर दिया है। उनका चुनावी फोकस उच्च शिक्षा संस्थान और केसरिया बौद्ध स्तूप के सौंदर्यीकरण जैसे स्थानीय विकास के मुद्दों पर है, जो मतदाताओं को आकर्षित कर सकता है।
- महिला मतदाताओं का समर्थन: नीतीश कुमार की नीतियों के कारण महिलाएं $JDU$ की कोर समर्थक मानी जाती हैं, जिसका सीधा लाभ शालिनी मिश्रा को मिलेगा।
3. वोटों का कम अंतर
- $2020$ में $LJP$ के राम शरण प्रसाद यादव ने तीसरा स्थान हासिल किया था, जिसने वोटों का बिखराव किया था। इस बार $NDA$ के एकजुट होने से इन वोटों का बड़ा हिस्सा शालिनी मिश्रा के पक्ष में जाने की उम्मीद है।
II. महागठबंधन के उम्मीदवार की हार के विपक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य)
महागठबंधन (संभावित $RJD$ उम्मीदवार – संतोष कुशवाहा $2020$ के उपविजेता थे) की जीत की संभावनाओं को कम करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
1. $NDA$ के व्यापक सामाजिक आधार के सामने $M-Y$ की सीमा
- $M-Y$ पर अत्यधिक निर्भरता: महागठबंधन (मुख्य रूप से $RJD$) की जीत का आधार मुस्लिम-यादव ($M-Y$) वोट बैंक पर निर्भर करता है। केसरिया में $NDA$ का सवर्ण + अति पिछड़ा + महिला का व्यापक आधार $M-Y$ समीकरण से बड़ा और अधिक प्रभावशाली हो सकता है।
- पिछली हार का बड़ा अंतर: 8$2020$ में 9$RJD$ के संतोष कुशवाहा 10$40,219$ के मुकाबले 11$30,992$ वोट पाकर 12$9,227$ वोटों के अंतर से हार गए थे।13 इस अंतर को पाटना एक बड़ी चुनौती होगी, खासकर जब $NDA$ एकजुट हो।
2. स्थानीय बनाम राज्य/केंद्र का मुद्दा
- तेजस्वी यादव का $RJD$ फैक्टर: भले ही $RJD$ के उम्मीदवार को तेजस्वी यादव के नाम पर वोट मिले, लेकिन $JDU$ की स्थानीय उम्मीदवार (शालिनी मिश्रा) की मजबूत पकड़, पारिवारिक विरासत और $NDA$ की ‘डबल इंजन’ रणनीति के सामने $RJD$ के स्थानीय उम्मीदवार को व्यक्तिगत स्तर पर चुनौती देने में कठिनाई हो सकती है।
3. स्थानीय असंतोष का अभाव
- विधायक शालिनी मिश्रा के खिलाफ कोई बड़ा एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर सामने नहीं आया है। सड़क और बिजली जैसे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उनके प्रयासों ने एक हद तक स्थानीय असंतोष को नियंत्रित किया है।
निष्कर्ष: केसरिया विधानसभा सीट पर $JDU$ की शालिनी मिश्रा की मजबूत पारिवारिक राजनीतिक विरासत, $JDU$ के महिला-अति पिछड़ा आधार और $NDA$ के एकजुट समर्थन से उनकी जीत की संभावना अधिक है। महागठबंधन को जीत हासिल करने के लिए $M-Y$ वोट बैंक को मज़बूत करने के साथ-साथ $NDA$ के आधार वोट बैंक में बड़ी सेंध लगानी होगी, जो एक कड़ा और चुनौतीपूर्ण कार्य है।