गोरियाकोठी विधानसभा सीट सीवान जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जो 2010 से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बीच ‘एक बार बीजेपी, एक बार आरजेडी’ के पैटर्न पर रही है। यह सीट वर्तमान में बीजेपी के कब्जे में है, जिससे 2025 का मुकाबला इसे बनाए रखने और पलटने की चुनौती बन गया है।

जीत की संभावना (पूर्वानुमान)

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य, मजबूत जातीय गणित और पिछले चुनावों में अपेक्षाकृत बड़े अंतर को देखते हुए, देवेश कान्त सिंह (BJP / NDA) के लिए अपनी सीट बरकरार रखने की संभावना अधिक (Higher) है। यह सीट NDA के मजबूत गढ़ों में से एक है।1


विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (देवेश कान्त सिंह – BJP / NDA)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
जातीय समीकरण का मजबूत आधार गोरियाकोठी विधानसभा क्षेत्र में उच्च जातियों (सवर्ण), अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और दलित मतदाताओं की संख्या अधिक है। इन समुदायों का बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से बीजेपी और NDA गठबंधन का मजबूत आधार रहा है। उम्मीदवार देवेश कान्त सिंह (राजपूत) को सवर्ण वोट का लगभग 90% और EBC/दलित का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मिलने की पूरी उम्मीद है।
पिछली निर्णायक जीत का अंतर 2020 के चुनाव में, देवेश कान्त सिंह ने RJD की नूतन देवी को 11,891 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। यह अंतर (6.30% वोट प्रतिशत) यह दर्शाता है कि NDA का आधार वोट महागठबंधन के ‘M-Y’ समीकरण को प्रभावी ढंग से संतुलित करने में सक्षम है।
केंद्र और राज्य सरकार के कार्यों का लाभ विधायक के रूप में देवेश कान्त सिंह (या बीजेपी) को केंद्र और राज्य की NDA सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (जैसे आवास, मुफ्त राशन, नल जल योजना) और राष्ट्रवादी लहर (यदि मौजूद हो) का सीधा लाभ मिलेगा।
लोकसभा चुनाव 2024 में बढ़त गोरियाकोठी, महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र के तहत आता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA के उम्मीदवार जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने इस विधानसभा क्षेत्र में 16,864 वोटों की बड़ी बढ़त हासिल की थी। यह बढ़त आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत संकेत देती है।

अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (RJD / महागठबंधन)

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
‘M-Y’ कोर वोट की अपर्याप्तता RJD का मुख्य वोट बैंक मुस्लिम (लगभग 16.9%) और यादव मतदाताओं का है। 2020 में, RJD उम्मीदवार नूतन देवी को यह कोर वोट मिलने के बावजूद, वह 11,891 वोटों से हार गईं। इसका अर्थ है कि यह कोर वोट बेस गोरियाकोठी में निर्णायक जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, और RJD को अन्य जातियों (जैसे अति पिछड़ा, सवर्ण) में सेंध लगाने की जरूरत है, जो कठिन है।
वोट शेयर में गिरावट (2015 से 2020) 2015 में RJD के सत्यदेव प्रसाद सिंह ने यह सीट जीती थी, लेकिन 2020 में RJD का वोट शेयर गिर गया। RJD को 2015 की तुलना में लगभग $3.3\%$ कम वोट मिले, जबकि BJP का वोट शेयर $+7.52\%$ बढ़ा। यह ट्रेंड RJD के लिए प्रतिकूल है।
स्थानीय मुद्दों पर मजबूत पकड़ की कमी यदि विधायक के खिलाफ ‘सत्ता विरोधी लहर’ के बजाय स्थानीय स्तर पर RJD कोई मजबूत मुद्दा या वैकल्पिक नेतृत्व पेश नहीं कर पाता है, तो जातीय समीकरण पर निर्भरता RJD को जीत दिलाने में सक्षम नहीं होगी।
त्रिकोणीय मुकाबले का खतरा प्रशांत किशोर की जन सुराज जैसी पार्टियों की संभावित एंट्री RJD और BJP दोनों के वोट काट सकती है। हालांकि, बीजेपी की मजबूत आधार वाली सवर्ण जातियों में सेंध लगने से RJD को फायदा हो सकता है, लेकिन RJD के यादव या मुस्लिम वोट में बंटवारा होने पर BJP की जीत और भी आसान हो जाएगी। चूंकि 2020 में RJD पहले से ही बड़े अंतर से हारी थी, इसलिए किसी भी छोटे बंटवारे से उनकी वापसी की राह और कठिन हो जाएगी।

यह विश्लेषण उपलब्ध चुनावी डेटा, जातीय समीकरणों और हालिया राजनीतिक रुझानों पर आधारित है। हालांकि NDA की स्थिति मजबूत दिख रही है, बिहार चुनाव में अंतिम परिणाम महागठबंधन की एकजुटता और राज्यव्यापी लहर पर भी निर्भर करेगा।

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