गोविंदगंज (पूर्वी चंपारण) विधानसभा सीट की राजनीति हमेशा से ‘दबंगई और अपनत्व’ के मिश्रण वाली रही है, जहाँ मतदाता हर बार ‘बदलाव’ को प्राथमिकता देते हैं।
परिणाम की भविष्यवाणी:
गोविंदगंज विधानसभा सीट पर इस बार $NDA$ गठबंधन के भीतर बड़ा बदलाव हुआ है, जहाँ पिछली बार की विजेता $BJP$ ने यह सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के लिए छोड़ दी है। इस सीट पर LJP(R) के राजू तिवारी (जो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं) की जीत की संभावना अधिक है।
$NDA$ की संयुक्त ताकत और राजू तिवारी की व्यक्तिगत चुनावी सफलता के इतिहास के कारण, उन्हें महागठबंधन के उम्मीदवार पर स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है।
I. LJP(R) के राजू तिवारी की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)
राजू तिवारी ($LJP(R)$) की जीत को मज़बूती देने वाले प्रमुख विश्लेषणात्मक कारक निम्नलिखित हैं:
1. $NDA$ की संगठनात्मक शक्ति और वोटों का हस्तांतरण
- $NDA$ की एकजुटता: $NDA$ गठबंधन ($BJP$, $JDU$, $LJP(R)$, $HAM$, $RLM$) की सामूहिक शक्ति राजू तिवारी को मिलेगी।
- $BJP$ का कोर वोट बैंक: 1$2020$ में 2$BJP$ के सुनील मणि तिवारी ने कांग्रेस को 3$27,924$ वोटों के बड़े अंतर से हराया था।4 $BJP$ के समर्थक (सवर्ण, वैश्य, और अति पिछड़ा वर्ग) का एक बड़ा हिस्सा अब $LJP(R)$ उम्मीदवार को हस्तांतरित होगा, जिससे उनकी जीत का आधार मज़बूत होगा।
- चिराग पासवान का प्रभाव: चिराग पासवान ने गोविंदगंज सीट को लेकर विशेष जोर दिया था और $NDA$ में इसे हासिल किया। चिराग की ‘बिहार फर्स्ट’ अपील और युवा मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता, राजू तिवारी के पक्ष में चिराग फैक्टर के रूप में काम करेगी।
- पिछली जीत का रिकॉर्ड: राजू तिवारी 5$2015$ में 6$LJP$ के टिकट पर कांग्रेस के ब्रजेश कुमार को 7$27,920$ वोटों के बड़े अंतर से हरा चुके हैं।
2. जातिगत समीकरण में पकड़
- गोविंदगंज में ब्राह्मण, राजपूत और यादव वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। $NDA$ का पारंपरिक सवर्ण-अति पिछड़ा आधार, राजू तिवारी (ब्राह्मण) को मज़बूती देगा, जबकि $LJP(R)$ का दलित-पासवान वोट बैंक भी उन्हें मिलेगा।
3. ‘डबल इंजन’ सरकार पर फोकस
- $LJP(R)$ और चिराग पासवान का पूरा प्रचार अभियान केंद्र और राज्य में $NDA$ की ‘डबल इंजन’ सरकार के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित रहेगा, जिसका सीधा लाभ राजू तिवारी को मिलेगा।
II. कांग्रेस के शशि भूषण राय @ गप्पू राय की हार के विपक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य)
महागठबंधन (कांग्रेस) के उम्मीदवार शशि भूषण राय @ गप्पू राय की जीत की संभावनाओं को कम करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
1. महागठबंधन के भीतर कमजोर प्रदर्शन
- कमजोर ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 9$2020$ के चुनाव में, कांग्रेस के उम्मीदवार ब्रजेश कुमार को 10$BJP$ से 11$27,924$ वोटों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।12 $2015$ में भी $LJP$ के राजू तिवारी ने उन्हें लगभग उसी मार्जिन से हराया था।
- कांग्रेस का सीमित जनाधार: गोविंदगंज कभी कांग्रेस का गढ़ रहा था (13$1952-1967$), लेकिन 14$1980$ के बाद से कांग्रेस यहाँ अपनी जीत दोहरा नहीं पाई है।15 वर्तमान में, कांग्रेस के पास इस सीट पर $RJD$ के $M-Y$ (मुस्लिम-यादव) वोटों के अलावा कोई मज़बूत कोर वोट बैंक नहीं है।
- $RJD$ के MY वोट पर निर्भरता: $RJD$ का मुख्य $M-Y$ वोट बैंक कांग्रेस को मिलेगा, लेकिन यह वोट बैंक $NDA$ के व्यापक सामाजिक आधार के सामने जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता, खासकर जब $BJP$ का कोर वोट $LJP(R)$ को हस्तांतरित हो रहा हो।
2. व्यक्तित्व-केंद्रित राजनीति का जोखिम
- गोविंदगंज की राजनीति ‘दबंगई और अपनत्व’ के व्यक्तिगत कारकों से प्रभावित रही है। हालाँकि, $NDA$ के पक्ष में $BJP$ और $LJP(R)$ की मजबूत संगठनात्मक मशीनरी का होना, व्यक्तिगत आकर्षण को पीछे छोड़ सकता है।
- स्थानीय मुद्दों का प्रभाव: स्थानीय मतदाताओं के बीच कुछ क्षेत्रों में भ्रष्टाचार (सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी) और युवाओं के लिए रोजगार जैसे स्थानीय मुद्दे हैं। यदि मतदाता इसका दोष $NDA$ गठबंधन पर डालते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक मौका हो सकता है। लेकिन बड़े मार्जिन को कम करना मुश्किल होगा।
निष्कर्ष: गोविंदगंज सीट पर $NDA$ गठबंधन की समग्र संगठनात्मक ताकत और राजू तिवारी का $2015$ का जीत का अनुभव उनके पक्ष में मज़बूती से काम करता है। कांग्रेस के लिए शशि भूषण राय @ गप्पू राय को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें $NDA$ के व्यापक और हस्तांतरित वोट बैंक को तोड़ने के लिए एक अभूतपूर्व लहर की आवश्यकता होगी। इसलिए, LJP(R) के राजू तिवारी की जीत की संभावना सबसे अधिक है।