बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान महागठबंधन के अंदर उत्पन्न संकट ने राजनीति के समीकरण बदल दिए हैं। दरभंगा जिले की गौरा-बौराम विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपने ही प्रत्याशी मोहम्मद अफजल अली खान को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। यह कदम गठबंधन के भीतर उठ रही मतभेद और अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

घटना का सार और कारण

आरजेडी ने पहले ही गौरा-बौराम सीट से अफजल अली खान को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया था और उन्होंने विधिवत नामांकन भी दाखिल किया था। लेकिन चुनाव से कुछ समय बाद गठबंधन के तहत यह सीट विकासशील इंसान पार्टी (VIP) को सौंपी गई। VIP के तरफ से संतोष सहनी को महागठबंधन का प्रत्याशी बनाया गया। इस परिस्थिति में आरजेडी नेतृत्व ने अफजल अली खान को अपना नामांकन वापस लेने और गठबंधन के उम्मीदवार का समर्थन करने के लिए कहा, ताकि तालमेल बना रहे और वोट बंटावड़ा प्रभावशाली रूप से हो।

लेकिन अफजल अली ने पार्टी नेतृत्व के इस आदेश की अवहेलना की और अपना नामांकन वापस नहीं लिया। वे हठधर्मिता दिखाते हुए गठबंधन धर्म का उल्लंघन करते हुए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने पर अड़े रहे। इस वजह से पार्टी ने एक कड़ा कदम उठाया और उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया।

आरजेडी का कड़ा रुख और गठबंधन की एकता

राष्ट्रीय जनता दल की इस कार्रवाई को पार्टी अनुशासन और गठबंधन के समन्वय को बनाए रखने की निष्ठा की मिसाल माना जा रहा है। पार्टी ने साफ किया है कि गठबंधन धर्म का उल्लंघन करने वालों के लिए कोई छूट नहीं होगी। यह कदम उन अन्य असंतुष्ट नेताओं के लिए भी संदेश है जो पार्टी लाइन से हटकर कार्रवाई कर रहे हैं।

तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली आरजेडी ने कई अन्य नेताओं को भी चुनावी अनुशासन की अवहेलना के कारण पार्टी से निष्कासित किया है। इसीलिए इस मामले को महागठबंधन की एकता के लिए बड़ा प्रयोग माना जा रहा है।

राजनीतिक प्रभाव और चुनावी समीकरण

अफजल अली के निष्कासन से न केवल आरजेडी बल्कि पूरे महागठबंधन की स्थिति गौरा-बौराम सीट पर चुनौतीपूर्ण हो गई है। अब इस सीट पर VIP के प्रत्याशी संतोष सहनी और बागी अफजल अली के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है। यह चुनावी लड़ाई महागठबंधन के अंदर टूट और बाहरी गठबंधन एनडीए के लिए फायदेमंद हो सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस परिस्थिति में बीजेपी को भी मौका मिल सकता है, यदि गठबंधन कमजोर होता है तो वोट विभाजन से एनडीए को फायदा होगा। आमतौर पर गठबंधन के भीतर सामंजस्य और तालमेल से जीत सुनिश्चित होती है, लेकिन इस मामले में यह सामंजस्य टूटा दिख रहा है।

पार्टी के नजरिए से निष्कासन

आरजेडी ने अपने आधिकारिक निष्कासन पत्र में अफजल अली को गंभीर अनुशासनहीनता का दोषी ठहराया है। पार्टी ने कहा कि यह न केवल पार्टी की अनुशासनहीनता थी, बल्कि इससे गठबंधन के भीतर गलत संदेश गया। उनकी स्वतंत्र चुनाव लड़ाई को गठबंधन विरोधी माना गया, और इसे सीट की मजबूत पकड़ को कमजोर करने वाला कदम बताया गया।

पार्टी नेतृत्व ने कहा कि गठबंधन के फैसले का सम्मान करना राजनीतिक जिम्मेदारी है और जिस सदस्य ने इसका उल्लंघन किया, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अपरिहार्य थी। इस कदम के जरिए पार्टी ने अपनी सख्ती दिखाते हुए आगे के चुनाव के लिए संदेश भेजा कि अनुशासन की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निष्कर्ष

गौरा-बौराम सीट पर आरजेडी और महागठबंधन के बीच उत्पन्न विवाद बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ लाएगा। यह दिखाता है कि गठबंधन बाध्यकारी न होकर कभी-कभी टूट भी सकता है, जिससे चुनावी मुकाबला और जटिल हो जाता है।

अफजल अली के निष्कासन से महागठबंधन के अंदर अनुशासन सख्त होगा, लेकिन साथ ही यह गठबंधन के लिए चुनावी कमजोरी भी बन सकता है। अब यह देखना होगा कि सीट पर वोटर इस विवाद को कैसे लेते हैं और आने वाले चुनाव में इसका प्रभाव क्या होता है। अंतिम निर्णय 14 नवंबर को मतगणना के बाद स्पष्ट होगा, जब बिहार की जनता अपनी राय भावपूर्ण रूप से व्यक्त करेगी।

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