जीरादेई, भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जन्मभूमि, सीवान जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है। यह सीट हाल के वर्षों में वामपंथी राजनीति का एक मजबूत गढ़ बन गई है। यह निर्वाचन क्षेत्र जीरादेई, नौतन और मैरवा प्रखंडों को मिलाकर बना है। यह मुकाबला मुख्य रूप से महागठबंधन (CPI(ML)L) और NDA के बीच केंद्रित रहेगा।

जीत की संभावना (पूर्वानुमान)

जीरादेई सीट पर वर्तमान विधायक और CPI(ML)L के अमरजीत कुशवाहा की स्थिति मजबूत मानी जा सकती है। 2020 में उनकी बड़ी जीत (25,510 वोटों का अंतर) और महागठबंधन के यादव-मुस्लिम-वाम समीकरण को देखते हुए, अमरजीत कुशवाहा (CPI(ML)L / महागठबंधन) को इस सीट पर आगे माना जा सकता है।


विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (अमरजीत कुशवाहा – CPI(ML)L / महागठबंधन)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
2020 की प्रचंड जीत अमरजीत कुशवाहा ने 2020 में JDU उम्मीदवार कमला सिंह को 25,510 वोटों के विशाल अंतर से हराया था। यह जीत 17.67% का मार्जिन दर्शाती है, जो इस सीट पर वामपंथ के प्रति एक मजबूत लहर या आधार को स्थापित करता है।
मजबूत ‘महागठबंधन’ आधार CPI(ML)L महागठबंधन का एक अभिन्न अंग है। इसे RJD के पारंपरिक यादव और मुस्लिम मतदाताओं का पूरा समर्थन मिलता है। जीरादेई क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा और यादव वोट बैंक एकजुट होने पर यह गठबंधन अजेय हो जाता है।
कुशवाहा जाति का वोट बैंक CPI(ML)L उम्मीदवार अमरजीत कुशवाहा स्वयं कुशवाहा समुदाय से आते हैं। यह उन्हें महागठबंधन के M-Y आधार के साथ-साथ अपने पिछड़ा वर्ग (कोयरी) के वोटों को भी साधने में मदद करता है, जिससे उनकी स्थिति मजबूत होती है।
ग्राउंड लेवल पर संगठन CPI(ML)L अपनी मजबूत जमीनी पकड़, गरीब, किसान और भूमिहीन वर्गों के बीच सक्रियता के लिए जानी जाती है। यह संगठनात्मक शक्ति अक्सर कम मतदान वाले ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साबित होती है।

अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (NDA उम्मीदवार – संभावित JDU/BJP)

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
2024 लोकसभा चुनाव की लीड (NDA) 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA (JDU) को जीरादेई विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन पर बढ़त मिली थी। यह सबसे बड़ा प्रतिकूल तथ्य है। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय मुद्दों और बड़े गठबंधन की एकजुटता होने पर NDA पिछड़ा वर्ग (कुशवाहा) और अति-पिछड़ा वर्ग के वोटों को एकजुट करके वाम दल को चुनौती दे सकती है।
सीट पर अस्थिर चुनावी इतिहास 1985 के बाद से इस सीट पर किसी भी पार्टी ने लगातार दो बार जीत हासिल नहीं की है (शहाबुद्दीन को छोड़कर, जिन्होंने 1990 और 1995 में जीत दर्ज की थी)। यह तथ्य मौजूदा विधायक के लिए एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का खतरा पैदा करता है।
उच्च जातियों का मजबूत आधार जीरादेई में उच्च जाति के मतदाताओं (भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण) की एक बड़ी संख्या है। यह मतदाता पूरी तरह से NDA (विशेषकर BJP) के पक्ष में ध्रुवीकृत होता है, जो NDA उम्मीदवार को एक मजबूत शुरुआती बढ़त प्रदान करता है।
कम मतदान प्रतिशत जीरादेई में मतदान प्रतिशत अक्सर 52% के आसपास रहता है। कम मतदान प्रतिशत शहरी और उच्च-जाति के मतदाताओं के बीच निराशा या उदासीनता का संकेत हो सकता है। यदि NDA समर्थक मतदाता भारी संख्या में मतदान करने आते हैं, तो यह अंतर को कम कर सकता है।

निष्कर्ष:

जीरादेई सीट पर अमरजीत कुशवाहा (CPI(ML)L) का पलड़ा भारी दिख रहा है, जिसका मुख्य कारण 2020 की बड़ी जीत और यादव-मुस्लिम-वाम वोट बैंक का मजबूत समीकरण है। NDA (संभावित रूप से JDU या BJP) के लिए यह सीट जीतना एक बड़ी चुनौती होगी, खासकर तब जब उन्हें CPI(ML)L की संगठनात्मक शक्ति का सामना करना पड़े। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव की बढ़त और उच्च-जाति तथा NDA के कुशवाहा-अतिपिछड़ा वर्ग के वोटों का ध्रुवीकरण इस मुकाबले को कड़ा बना सकता है। यदि NDA 2024 की लीड को बरकरार रखने में कामयाब रहती है, तो अप्रत्याशित परिणाम भी आ सकता है।

(अस्वीकरण: यह विश्लेषण मौजूदा राजनीतिक डेटा, जातीय समीकरणों और पिछले चुनावों के रुझानों पर आधारित एक अनुमान है। अंतिम परिणाम चुनावी दिन के मतदान, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा।)

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