झंझारपुर विधानसभा (सीट संख्या 38) मधुबनी जिले की एक सामान्य वर्ग की सीट है, जिसका राजनीतिक इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। यह सीट बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र की कर्मभूमि रही है और वर्तमान में उनके पुत्र नीतीश मिश्रा (BJP) इसका प्रतिनिधित्व करते हैं।1
प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| नीतीश मिश्रा (विजेता) | BJP (NDA) | 94,854 | 41,788 वोट |
| राम नारायण यादव | CPI (महागठबंधन) | 53,066 | – |
(टिप्पणी: 2020 में नीतीश मिश्रा ने रिकॉर्ड 41,788 वोटों (23.30%) के भारी अंतर से जीत हासिल की थी, जो उनकी क्षेत्र में एकतरफा मज़बूत पकड़ को दर्शाता है।)2
नीतीश मिश्रा / NDA (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| ऐतिहासिक और पारिवारिक राजनीतिक विरासत | नीतीश मिश्रा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पुत्र हैं। मिश्र परिवार का इस सीट पर 33 वर्षों से अधिक समय तक प्रतिनिधित्व रहा है। यह मज़बूत पारिवारिक साख उन्हें ब्राह्मण मतदाताओं और क्षेत्र की जनता के बीच गहरी पैठ देती है। |
| रिकॉर्ड तोड़ जीत का अंतर | 2020 में 41,788 वोटों के विशाल अंतर से जीतना यह दर्शाता है कि यह सीट NDA का अभेद किला बन चुकी है। यह अंतर महागठबंधन के लिए एक बड़ी मनोवैज्ञानिक बाधा है। |
| कोर सवर्ण और अति पिछड़ा (EBC) वोट बैंक | झंझारपुर में ब्राह्मण (लगभग 19-20%) और अति पिछड़ा वर्ग (EBC, लगभग 35%) की बहुलता है। नीतीश मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से हैं, जबकि EBC वर्ग का बड़ा हिस्सा मोदी और नीतीश कुमार की नीतियों के कारण NDA का समर्थन करता है। |
| विकास के कार्य और मोदी-फैक्टर | विधायक नीतीश मिश्रा की उपलब्धि के तौर पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण, मिथिला हाट और तटबंधों का सुदृढ़ीकरण जैसी विकास योजनाएँ प्रमुख हैं। इन कार्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पड़ने वाला वोट NDA के पक्ष में माहौल बनाएगा। |
| विपक्ष में भ्रम और देरी | NDA ने नीतीश मिश्रा को तुरंत उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जबकि महागठबंधन (RJD/वाम दल) में उम्मीदवार को लेकर असमंजस और विलंब है। यह विपक्षी खेमे में बेचैनी पैदा कर रहा है और NDA को प्रचार में बढ़त दे रहा है। |
महागठबंधन (RJD/CPI) की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य और विश्लेषण
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (महागठबंधन की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| पारंपरिक ‘M-Y’ समीकरण का अपर्याप्त होना | झंझारपुर में यादव (लगभग 20%) और मुस्लिम (लगभग 15%) मतदाता महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, इन दोनों को मिलाने पर भी (लगभग 35%) का यह आंकड़ा NDA के सवर्ण+EBC गठबंधन को तोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है, खासकर जब मुकाबला नीतीश मिश्रा जैसे मज़बूत उम्मीदवार से हो। |
| स्थानीय समस्याओं को भुनाने में असफलता | क्षेत्र में झंझारपुर को जिला बनाने की मांग, जल निकासी (जलजमाव), बाढ़ विस्थापितों का पुनर्वास और स्थानीय रोजगार/पलायन जैसे बड़े मुद्दे हैं। इन समस्याओं के बावजूद, महागठबंधन 2020 में 41,000 वोटों की खाई को पाटने में नाकाम रहा, जो दर्शाता है कि महागठबंधन की ज़मीनी पकड़ कमज़ोर है। |
| कम्युनिस्ट उम्मीदवार की सीमित अपील | 2020 में CPI उम्मीदवार राम नारायण यादव दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन उनका वोट मुख्यतः परंपरागत वामपंथी और कुछ जातीय वोट ही था। CPI की सीमित संगठनात्मक ताकत RJD के M-Y आधार को NDA के सवर्ण+EBC आधार के बराबर लाने में असमर्थ है। |
| उम्मीदवार चयन की दुविधा | महागठबंधन अभी तक अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पाया है। यदि RJD गुलाब यादव (2015 के विजेता) को वापस लाती है, तो 2020 के रिकॉर्ड अंतर की हार के बाद आत्मविश्वास की कमी रहेगी। वहीं, यदि कोई नया उम्मीदवार आता है, तो उसे नीतीश मिश्रा की साख के सामने जगह बनाने में बहुत कम समय मिलेगा। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
झंझारपुर विधानसभा सीट पर NDA (BJP) की स्थिति अत्यंत मज़बूत है। विधायक नीतीश मिश्रा की पारिवारिक साख, विकास के मुद्दे, और 41,788 वोटों के भारी अंतर से मिली पिछली जीत उन्हें एक अजेय बढ़त देती है।
2025 के चुनाव में, नीतीश मिश्रा को हराने के लिए महागठबंधन को न केवल अपने यादव-मुस्लिम आधार को पूरी तरह से एकजुट करना होगा, बल्कि EBC (अति-पिछड़ा) या दलित वोटों में एक बड़ी सेंधमारी करनी होगी, जिसकी संभावना कम है।
संभावित विजेता: नीतीश मिश्रा (BJP – NDA)।