बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में धमदाहा (Dhamdaha) सीट पर मुकाबला बिहार सरकार में मंत्री और जदयू (JDU) की कद्दावर नेता लेशी सिंह के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। यह सीट दशकों से जेडीयू का मजबूत गढ़ रही है, और यहाँ मुख्य मुकाबला लेशी सिंह (JDU/NDA) और संतोष कुशवाहा (महागठबंधन) के बीच होने की संभावना है, जिन्हें हालिया रिपोर्ट्स में महागठबंधन का संभावित उम्मीदवार बताया गया है।
उपलब्ध ऐतिहासिक आँकड़ों और वर्तमान राजनीतिक विश्लेषण के आधार पर, लेशी सिंह (JDU/NDA) की जीत की संभावनाएँ अत्यधिक प्रबल हैं।
विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA – लेशी सिंह)
संभावित विजेता: लेशी सिंह (JDU)
1. मजबूत व्यक्तिगत जनाधार और ‘लेशी फैक्टर’:
- लगातार पाँच बार की जीत: लेशी सिंह इस सीट से 2000 से लेकर 2020 तक लगातार पाँच बार (एक उपचुनाव को छोड़कर) जीत हासिल कर चुकी हैं। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि धमदाहा अब किसी पार्टी का नहीं, बल्कि लेशी सिंह का व्यक्तिगत गढ़ बन चुका है।
- विकास की छवि: मंत्री होने के नाते उन्होंने क्षेत्र में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिया है। उनके समर्थक उन्हें ‘विकास पुरुष’ (या महिला) की छवि के रूप में देखते हैं।
2. महिला सशक्तिकरण और ‘दीदियों से दिल की बात’ रणनीति:
- लेशी सिंह महिला मतदाताओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखती हैं। उनका ‘दीदियों से दिल की बात’ जैसा महिला-केंद्रित अभियान, जिसमें महिलाओं को 50% आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने पर ध्यान दिया जाता है, उन्हें महिलाओं का एक बड़ा वोट बैंक दिलाता है।
- NDA का कोर वोट बैंक: NDA का कोर वोट बैंक, जिसमें अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिला मतदाता शामिल हैं, लेशी सिंह के साथ मजबूती से खड़ा रहता है, जिससे उनकी जीत का अंतर बड़ा होता है।
3. जातिगत समीकरणों पर पकड़:
- धमदाहा में मुस्लिम, यादव, कुर्मी और कुशवाहा मतदाताओं की अच्छी संख्या है। लेशी सिंह कुर्मी समाज से आती हैं, जो उन्हें कुर्मी-कुशवाहा (Luv-Kush) समीकरण का सीधा लाभ दिलाता है।
- उनके व्यक्तिगत प्रभाव और मजबूत संगठनात्मक शक्ति के कारण वह सवर्ण वोटों और EBC के एक बड़े हिस्से को भी अपनी तरफ खींचने में सफल रहती हैं, जो RJD के पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को बेअसर कर देता है।
4. 2024 लोकसभा चुनाव में बड़ी बढ़त:
- 2024 लोकसभा चुनाव में, जब पूर्णिया सीट से निर्दलीय पप्पू यादव ने जीत दर्ज की थी, तब भी धमदाहा विधानसभा क्षेत्र में JDU उम्मीदवार को 15,455 वोटों की बढ़त मिली थी। यह आँकड़ा दिखाता है कि पप्पू यादव लहर भी धमदाहा में लेशी सिंह के प्रभाव को कम नहीं कर पाई, और यह सीट JDU के लिए सुरक्षित दुर्ग बनी हुई है।
अन्य उम्मीदवार की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (महागठबंधन – RJD/संतोष कुशवाहा)
संभावित उपविजेता: संतोष कुशवाहा (महागठबंधन)
1. उम्मीदवार पर अनिश्चितता और कमजोर विकल्प:
- RJD को धमदाहा में एक मजबूत उम्मीदवार उतारने में हमेशा मुश्किल का सामना करना पड़ा है। महागठबंधन ने पिछली बार दिलीप कुमार यादव को उतारा था, जिन्हें 33,594 वोटों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
- अगर महागठबंधन इस बार पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा (कुशवाहा समुदाय से) को मैदान में उतारता है, तो भी वह लेशी सिंह के कुर्मी-कुशवाहा समीकरण और व्यक्तिगत जनाधार को तोड़ने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं हो सकते हैं।
2. JDU का अभेद्य किला:
- धमदाहा JDU का ‘अभेद किला’ माना जाता है। इस किले को तोड़ने के लिए महागठबंधन को न केवल अपने MY समीकरण को एकजुट रखना होगा, बल्कि EBC और अति दलित वोटों में भी बड़ी सेंध लगानी होगी, जो लेशी सिंह की मजबूत पकड़ के कारण अत्यंत कठिन है।
3. बड़े अंतर से हार का इतिहास:
- 2020 के चुनाव में, लेशी सिंह ने RJD के दिलीप कुमार यादव को 16.90% यानी 33,594 वोटों के भारी अंतर से हराया था। यह आँकड़ा महागठबंधन के लिए इस सीट पर वापसी की राह को बेहद मुश्किल बनाता है।
4. स्थानीय मुद्दों पर कम असर:
- धमदाहा में अफसरशाही, मक्का किसानों की समस्याएँ, बाढ़ और कटाव जैसे मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन लेशी सिंह का ‘विकास’ और ‘महिला सशक्तिकरण’ का नैरेटिव इन स्थानीय असंतोषों को बेअसर कर देता है। महागठबंधन को इन मुद्दों को वोट में बदलने के लिए एक बहुत मजबूत और विश्वसनीय वैकल्पिक चेहरा चाहिए, जिसकी कमी बनी हुई है।
निष्कर्ष
धमदाहा विधानसभा सीट पर लेशी सिंह की लगातार जीत का इतिहास, महिला मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पैठ, कुर्मी-कुशवाहा समीकरण पर उनकी मजबूत पकड़ और हालिया लोकसभा चुनाव में JDU को मिली बड़ी बढ़त (15,455 वोट) यह संकेत देती है कि 2025 में भी लेशी सिंह (JDU/NDA) अपनी छठी जीत दर्ज करने की प्रबल दावेदार हैं। महागठबंधन को यह किला भेदने के लिए एक चमत्कारी उम्मीदवार और एक अभूतपूर्व राजनीतिक लहर की आवश्यकता होगी।