परसा विधानसभा सीट (संख्या 121) बिहार के सारण जिले में स्थित है और यह सीट लंबे समय से ‘यादव बनाम यादव’ की राजनीति का केंद्र रही है, जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय के परिवार का दबदबा रहा है। हालांकि, 2020 के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के छोटे लाल राय ने इस विरासत को तोड़ते हुए एक बड़ी जीत दर्ज की थी। 2025 का चुनाव भी इसी ध्रुवीकरण और जातीय समीकरण पर केंद्रित रहेगा।

यहां 2025 के चुनाव परिणाम का विश्लेषण, प्रमुख उम्मीदवार (संभावित) और जीतने के कारणों का विस्तृत विवरण दिया गया है।


संभावित विजेता: छोटे लाल राय (जनता दल यूनाइटेड – JDU) / NDA

(यह भविष्यवाणी छोटे लाल राय के दलबदल, दारोगा राय परिवार की नई पीढ़ी के उम्मीदवार, और RJD के वोट विभाजन के ऐतिहासिक पैटर्न पर आधारित है।)

जीत के मुख्य कारण और विश्लेषण (फेवर में जाने वाले तथ्य)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
यादव वोटों का विभाजन (छोटेलाल फैक्टर) परसा में यादव समुदाय की आबादी सबसे बड़ी है (लगभग 27%) और यह सीट ‘यादव बहुल’ रही है। 2020 में, छोटे लाल राय RJD के टिकट पर जीते थे। इस बार छोटेलाल राय JDU (NDA) में हैं और महागठबंधन ने पूर्व सीएम दारोगा राय की पोती करिश्मा राय (RJD) को टिकट दिया है। छोटेलाल राय की व्यक्तिगत पैठ यादव वोटों में सेंध लगाएगी, जिससे RJD का पारंपरिक कोर वोट विभाजित होगा।
NDA का संयुक्त गैर-यादव वोट बैंक NDA को सवर्ण (राजपूत, भूमिहार) और गैर-यादव OBC/EBC (कुशवाहा, कुर्मी, अति-पिछड़ा) का एक मजबूत आधार प्राप्त है। यादव वोटों के बंटने की स्थिति में, NDA का यह मजबूत और एकजुट गैर-यादव वोट बैंक छोटेलाल राय की जीत को सुनिश्चित कर सकता है।
वर्तमान विधायक के अनुभव का लाभ छोटे लाल राय पहले भी (2005 और 2010 में JDU से) इस सीट पर जीत दर्ज कर चुके हैं। उनका राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनका नेटवर्क उन्हें नए उम्मीदवार करिश्मा राय के मुकाबले अधिक मजबूती देता है।
NDA की सत्ता-विरोधी लहर को थामने की रणनीति छोटे लाल राय का दलबदल NDA की एक रणनीतिक चाल है। यह सीट को सीधे यादव उम्मीदवार के माध्यम से RJD के यादव गढ़ में घुसपैठ करने का मौका देता है, जिससे लालू यादव के समधी (चंद्रिका राय) के चुनाव हारने से उपजी निराशा का लाभ भी कम हो जाएगा।

अन्य उम्मीदवार (करिश्मा राय/RJD/महागठबंधन) के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
यादव वोटों का सीधा विभाजन 2020 में छोटे लाल राय ने RJD के टिकट पर चंद्रिका राय (JDU) को 17,293 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। इस बार, छोटे लाल राय के NDA में जाने से यादव वोटों में सीधा बंटवारा होगा। नए चेहरे (करिश्मा राय) के लिए यह विभाजन पार कर पाना मुश्किल होगा।
विरासत और युवा बनाम अनुभव की टक्कर करिश्मा राय एक युवा और नया चेहरा हैं, लेकिन उनका सीधा मुकाबला एक अनुभवी और पूर्व विजेता (छोटे लाल राय) से है, जो पहले ही RJD के कोर वोट को जानते हैं। दारोगा राय परिवार की राजनीतिक विरासत अब RJD के लिए निर्णायक साबित होने के बजाय, यादव वोट बंटने का कारण बन सकती है।
स्थानीय विकास का अभाव और एंटी-इनकम्बेंसी परसा विधानसभा क्षेत्र में विकास की कमी (जैसे रेलवे/बस कनेक्टिविटी, अपूर्ण परियोजनाएं, और जल संसाधनों का प्रबंधन) एक बड़ा मुद्दा है। 73 वर्षों के चुनावी इतिहास के बावजूद पिछड़ापन बरकरार है। महागठबंधन को इन मुद्दों पर जनता का विश्वास जीतने के लिए केवल जातीय समीकरण से ज्यादा कुछ चाहिए होगा।
अतीत में BJP का कमजोर प्रदर्शन यह सीट BJP के लिए कभी भी मजबूत नहीं रही है। यहां BJP कभी भी दूसरे स्थान पर भी नहीं आई है। हालांकि, JDU के उम्मीदवार के रूप में छोटे लाल राय को उतारना, BJP के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ है, लेकिन यदि JDU कैडर एकजुटता नहीं दिखाता है, तो यह महागठबंधन के लिए लाभप्रद हो सकता है।

निष्कर्ष:

परसा विधानसभा सीट पर मुकाबला बहुत कड़ा है और यह सीट पूरी तरह से यादव वोटों के विभाजन के समीकरण पर टिकी है।

  • छोटे लाल राय (NDA) की जीत की संभावना अधिक है, क्योंकि उनका दलबदल RJD के कोर यादव वोट को विभाजित करेगा, जबकि NDA का गैर-यादव गठबंधन मजबूत है।
  • करिश्मा राय (RJD) के लिए चुनौती यह होगी कि वह लालू यादव परिवार की बहू होने के भावनात्मक जुड़ाव को छोटे लाल राय की ज़मीनी पकड़ पर भारी कैसे पड़ेंगी।

अगर RJD अपना पारंपरिक मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण पूरी तरह से एकजुट रखने और कुछ गैर-यादव OBC/EBC वोट जोड़ने में सफल होता है, तभी वह इस सीट को NDA से छीन सकती है। अन्यथा, यह सीट NDA (JDU) के पाले में जाने की संभावना है।

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