परिहार विधानसभा (सीट क्रम संख्या 25) सीतामढ़ी जिले की एक सामान्य सीट है, जो 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई।1 यह सीट NDA (BJP) का गढ़ रही है, जिसने लगातार तीन चुनावों (2010, 2015, 2020) में जीत हासिल की है।2 हालांकि, 2020 का चुनाव एक काँटे का मुकाबला था, जिससे 2025 में यह सीट एक हाई-वोल्टेज संघर्ष का केंद्र बन गई है।
प्रमुख दावेदार (2025 के अनुसार):
- गायत्री देवी (NDA/BJP): वर्तमान विधायक (2015 और 2020 की विजेता)।3
- डॉ. स्मिता पूर्वे/रीतू जायसवाल (महागठबंधन/RJD या कांग्रेस): राजद/कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार, जो इस सीट पर प्रबल दावेदार हैं। (2020 में RJD की रीतू जायसवाल मात्र 1569 वोटों से हारी थीं)।4
- अन्य उम्मीदवार: वोटों का बंटवारा करने वाले छोटे दलों के उम्मीदवार।
गायत्री देवी/NDA (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| ऐतिहासिक गढ़ और हैट्रिक | 2008 में सीट बनने के बाद से अब तक तीनों विधानसभा चुनाव (2010, 2015, 2020) BJP ने जीते हैं, जो इस क्षेत्र में पार्टी के गहरे और स्थायी संगठनात्मक आधार को दर्शाता है। |
| कोर वोट बैंक पर पकड़ | परिहार सीट पर यादव (लगभग 15%), बनिया (लगभग 10%) और अतिपिछड़ा मतदाताओं का दबदबा है। NDA को परंपरागत रूप से बनिया और अतिपिछड़ा समुदाय का मजबूत समर्थन मिलता रहा है, जिससे वे चुनावी मुकाबले में मजबूत बने रहते हैं। |
| “मोदी फैक्टर” और राष्ट्रीय मुद्दे | नेपाल सीमा से सटा क्षेत्र होने के कारण, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दे प्रभावी हो सकते हैं। केंद्र और राज्य में NDA सरकार के विकास कार्यों और मजबूत नेतृत्व के नाम पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण BJP के पक्ष में हो सकता है। |
| स्थानीय प्रभाव (विधायक) | दो बार की विधायक गायत्री देवी का अपना स्थानीय प्रभाव और महिला मतदाताओं के बीच पकड़ है, जो करीबी मुकाबले में निर्णायक हो सकती है। |
महागठबंधन (RJD) के लिए जीत की राह और BJP उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (BJP की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| बेहद कम जीत का अंतर (2020) | 2020 में गायत्री देवी की जीत का अंतर मात्र 1569 वोट था, जो कुल वोटों का केवल 0.90% था। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि महागठबंधन ने BJP को कड़ी टक्कर दी थी और 2025 में एक छोटे से बदलाव से परिणाम पलट सकता है। |
| मजबूत विपक्षी उम्मीदवार की दावेदारी | महागठबंधन की ओर से रीतू जायसवाल (2020 की उपविजेता) या डॉ. स्मिता पूर्वे जैसी मजबूत महिला उम्मीदवार के मैदान में होने की संभावना है, जिनकी अपनी सामाजिक सक्रियता के कारण अच्छी ज़मीनी पकड़ है। |
| यादव और मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण | परिहार में यादव (लगभग 15%) और मुस्लिम (लगभग 10%) मतदाताओं की एक बड़ी संख्या है। यदि M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण पूरी तरह से महागठबंधन के पक्ष में एकजुट होता है, तो 1569 वोटों का अंतर आसानी से पाटा जा सकता है। |
| स्थानीय मुद्दे और एंटी-इनकम्बेंसी | यह क्षेत्र बाढ़ की समस्या, कृषि संकट और रोजगार के सीमित अवसरों से जूझ रहा है। पूरी तरह से ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र होने के कारण, इन स्थानीय मुद्दों पर सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का गहरा प्रभाव पड़ सकता है। |
| अन्य उम्मीदवारों की भूमिका | 2020 में तीसरे नंबर पर रहे RLSP उम्मीदवार अमजद हुसैन अनवर ने भी अच्छा वोट प्रतिशत हासिल किया था। 2025 में, यदि छोटे दल या नए गठबंधन वोटों का बंटवारा करते हैं, तो यह सीधे तौर पर सबसे करीबी मुकाबले वाले दल (महागठबंधन) को फायदा पहुंचा सकता है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
परिहार विधानसभा सीट एक अति-संवेदनशील सीट है जहाँ जीत का मार्जिन बहुत कम रहा है। NDA (BJP) के पास अपनी ऐतिहासिक सफलता और कोर वोट बैंक की ताकत है, लेकिन विधायक के प्रति एंटी-इनकम्बेंसी और महागठबंधन के मजबूत उम्मीदवार के कारण यह सीट उनके लिए बड़ा खतरा बन गई है।
वर्तमान राजनीतिक विश्लेषण के आधार पर, यह सीट 2025 में NDA और महागठबंधन के बीच एक ‘टॉस-अप’ साबित होगी, लेकिन महागठबंधन के लिए 2020 के बेहद करीबी अंतर को पाटने की एक ठोस संभावना मौजूद है।
संभावित विजेता: NDA (BJP) काँटे के मुकाबले में अपने ऐतिहासिक प्रभुत्व और कोर वोट के बल पर मामूली बढ़त बनाए रख सकती है, लेकिन यदि महागठबंधन SC/EBC और M-Y समीकरण को साध लेता है तो परिणाम पलट भी सकता है।