1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला
| गठबंधन/पार्टी | संभावित/वर्तमान उम्मीदवार | स्थिति और पृष्ठभूमि |
| महागठबंधन (RJD) | अनिरुद्ध कुमार (यादव) | वर्तमान विधायक। 2020 में BJP के रणविजय सिंह को 20,672 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। क्षेत्र में तीन बार विधायक रह चुके हैं। |
| NDA (BJP) | रणविजय सिंह (यादव) या नया चेहरा | 2020 में उपविजेता रहे। यह सीट 2000 के बाद से भाजपा और राजद के बीच तीन-तीन बार बंट चुकी है। NDA यहां पारापारी (बारी-बारी) के पैटर्न को दोहराने की उम्मीद करेगा। |
2️⃣ 🌟 अनिरुद्ध कुमार (RJD) की संभावित जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)
वर्तमान विधायक अनिरुद्ध कुमार (RJD) और महागठबंधन के पक्ष में उनकी संभावित जीत के निम्नलिखित निर्णायक कारक हैं:
- अत्यधिक मजबूत MY समीकरण: बख्तियारपुर में यादव और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। RJD के उम्मीदवार अनिरुद्ध कुमार खुद यादव समुदाय से आते हैं, जिससे यह कोर वोट बैंक महागठबंधन के पक्ष में मज़बूती से लामबंद होता है।
- तेजस्वी फैक्टर और युवा अपील: तेजस्वी यादव की ’10 लाख नौकरी’ और ‘युवा सरकार’ की छवि ने 2020 में मतदाताओं, खासकर युवाओं और बहुजन समाज को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया था। 2025 में भी यही मुद्दा RJD के पक्ष में एक महत्वपूर्ण स्विंग वोट ला सकता है।
- 2020 की बड़ी जीत का अंतर: अनिरुद्ध कुमार ने पिछले चुनाव में 20,672 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी, जो उनकी स्थानीय लोकप्रियता और संगठन की मज़बूती को दर्शाता है।
- एंटी-इनकम्बेंसी का अभाव: यह सीट बारी-बारी से जीती जाती रही है, लेकिन वर्तमान विधायक के खिलाफ स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर तीव्र एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का अभाव होने पर उन्हें लाभ मिल सकता है।
3️⃣ 📉 NDA उम्मीदवार की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य)
NDA (BJP) उम्मीदवार की हार के पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:
- जातीय गणित का सीधा टकराव: यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से यादव बहुल है। RJD का MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण यहां NDA के सवर्ण (भूमिहार/राजपूत/ब्राह्मण) और EBC/दलित वोटों के मुकाबले भारी पड़ता है, जब तक कि EBC और दलितों का बड़ा हिस्सा एकजुट होकर NDA के पक्ष में न आए।
- स्थानीय विकास और विधायक की पहुँच का मुद्दा: स्थानीय जनता ने शिकायत की है कि विधायक चुनाव के बाद क्षेत्र से दूर रहते हैं और अफसरशाही हावी है। यदि NDA इस स्थानीय नाराजगी को भुनाने में विफल रहता है, तो RJD को केवल अपने कोर वोट बैंक से ही जीत मिल जाएगी।
- कमज़ोर ‘पारापारी’ पैटर्न: यह सीट 2000 के बाद से एक बार BJP और एक बार RJD जीतती रही है। यदि मतदाता इस बारी-बारी के पैटर्न को तोड़कर लगातार दूसरी बार RJD को चुनते हैं (जैसा कि 2020 में उन्होंने किया), तो NDA की हार निश्चित है।
- बेहतर वैकल्पिक चेहरे का अभाव: यदि BJP उसी पुराने चेहरे को दोहराती है जिसे 2020 में बड़े अंतर से हार मिली थी, तो उन्हें RJD के मजबूत उम्मीदवार के खिलाफ कमज़ोर कैंडिडेट का टैग झेलना पड़ सकता है।
निष्कर्ष:
बख्तियारपुर विधानसभा सीट पर महागठबंधन (RJD) का पलड़ा भारी दिख रहा है, क्योंकि उनका MY समीकरण यहां बहुत मज़बूत है, और वर्तमान विधायक अनिरुद्ध कुमार ने पिछली बार एक बड़े मार्जिन से जीत हासिल की थी।
NDA (BJP) को यह सीट जीतने के लिए अपने ‘सवर्ण+EBC+दलित’ वोट बैंक को पूरी तरह से एकजुट करना होगा और RJD के यादव वोट बैंक में प्रभावी सेंध लगाने के लिए एक मज़बूत, ज़मीन से जुड़े और लोकप्रिय उम्मीदवार को उतारना होगा। वर्तमान समीकरणों के आधार पर, RJD के उम्मीदवार अनिरुद्ध कुमार के फिर से जीतने की संभावना अधिक है।