परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)

बेगूसराय जिले की बछवाड़ा विधानसभा सीट बिहार की सबसे रोमांचक सीटों में से एक है, जहाँ 2020 में जीत का अंतर मात्र 484 वोट था। यह सीट किसी भी पार्टी के प्रति वफादार नहीं रही है और हर बार यहाँ जनादेश बदलता रहा है।

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और 2024 लोकसभा चुनाव के रुझान को देखते हुए, महागठबंधन (CPI) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है।

  • संभावित विजेता: महागठबंधन के उम्मीदवार (CPI के अवधेश कुमार राय/कांग्रेस के शिव प्रकाश गरीब दास)। (चूंकि महागठबंधन में ‘फ्रेंडली फाइट’ है, इसलिए NDA विरोधी वोट के एकजुट होने पर CPI या INC में से किसी एक की जीत की संभावना अधिक है)।
  • NDA के मुख्य दावेदार: सुरेन्द्र मेहता (NDA – BJP)

प्रमुख दावेदार और जीत/हार का निर्णायक विश्लेषण

उम्मीदवार/पार्टी वर्तमान स्थिति 2020 चुनाव परिणाम मुख्य राजनीतिक आधार
सुरेन्द्र मेहता (NDA – BJP) मौजूदा विधायक (मंत्री भी) 484 वोटों से विजेता (54,738 वोट) सवर्ण (ठाकुर/भूमिहार), EBC, मोदी/नीतीश की अपील
अवधेश कुमार राय (MGB – CPI) 3 बार के पूर्व विधायक 54,254 वोटों के साथ उपविजेता यादव (अहीर), मुस्लिम, पारंपरिक वामपंथी समर्थक
शिव प्रकाश गरीब दास (MGB – INC) नए उम्मीदवार (कांग्रेस कोटे से) 39,878 वोटों के साथ निर्दलीय के रूप में तीसरे स्थान पर कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक, सवर्ण जाति के वोटों में सेंध की क्षमता

1. महागठबंधन की जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA विरोधी रुझान और CPI का पारंपरिक आधार)

महागठबंधन (CPI/INC) के उम्मीदवार की संभावित जीत के मुख्य कारण और अनुकूल तथ्य निम्नलिखित हैं:

  • 2024 लोकसभा चुनाव का रुझान (BJP के लिए चेतावनी):
    • 2024 के लोकसभा चुनाव में, भले ही NDA के गिरिराज सिंह ने बेगूसराय सीट जीती, लेकिन वह बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में CPI के उम्मीदवार से 4,516 वोटों से पीछे थे। यह रुझान स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इस सीट पर विधायक (BJP) के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी है और मतदाता विधानसभा चुनाव में बदलाव चाहते हैं।
  • यादव-मुस्लिम-वामपंथी (Y+M+Left) समीकरण:
    • इस सीट पर यादव मतदाताओं (लगभग 25% से अधिक) की निर्णायक संख्या है, जिसके बाद मुस्लिम (लगभग 9%) और अनुसूचित जाति (लगभग 17%) के मतदाता हैं। CPI के अवधेश राय (यादव) इस कोर वोट बैंक को एकजुट करने की क्षमता रखते हैं। RJD के समर्थन से यह समीकरण और मजबूत होता है।
  • इतिहास का पैटर्न:
    • बछवाड़ा के मतदाताओं ने पिछले छह चुनावों से किसी भी पार्टी को लगातार दो बार जीत नहीं दी है। 2020 में BJP ने पहली बार यह सीट जीती थी, लेकिन अब सत्ता विरोधी लहर इस पैटर्न को दोहरा सकती है, जिससे NDA उम्मीदवार की हार हो सकती है।
  • सीपीआई और कांग्रेस दोनों के मजबूत दावेदार:
    • 2020 में CPI के अवधेश राय और निर्दलीय शिव प्रकाश गरीब दास (जो अब कांग्रेस के उम्मीदवार हैं) को मिले संयुक्त वोट NDA के सुरेंद्र मेहता से कहीं ज्यादा थे। अगर इस बार दोनों में से कोई एक उम्मीदवार, भले ही ‘फ्रेंडली फाइट’ में, NDA विरोधी वोटों को एकजुट कर पाता है, तो जीत सुनिश्चित हो जाएगी।

2. NDA (BJP) उम्मीदवार की हार के लिए चुनौतियाँ (अत्यधिक करीबी जीत और आंतरिक विरोध)

NDA उम्मीदवार के लिए जीत हासिल करने में ये कारक बाधा उत्पन्न करेंगे:

  • अत्यंत मामूली जीत का अंतर (484 वोट):
    • 2020 की जीत का अंतर इतना कम था कि यह एक प्रकार की फ्लूक जीत मानी जा सकती है, जो निर्दलीय उम्मीदवार द्वारा वोट काटने के कारण संभव हुई थी। इस अंतर को बचाए रखना BJP के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
  • महागठबंधन के भीतर ‘फ्रेंडली फाइट’ का जोखिम (अनुकूल तथ्य का कमजोर पड़ना):
    • सबसे बड़ी प्रतिकूलता महागठबंधन के भीतर है, जहाँ कांग्रेस (शिव प्रकाश गरीब दास) और CPI (अवधेश राय) दोनों मैदान में हैं।
      • अगर यह विभाजन बरकरार रहा, तो NDA विरोधी वोट बँट जाएंगे। 2020 में भी निर्दलीय शिव प्रकाश गरीब दास ने 39,878 वोट लिए थे। इस ‘फ्रेंडली फाइट’ के कारण BJP को कम वोट प्रतिशत पर भी जीत मिल सकती है। यह NDA उम्मीदवार के लिए सबसे अनुकूल लेकिन महागठबंधन के लिए सबसे प्रतिकूल तथ्य है।
  • स्थानीय अपेक्षाएँ और मंत्री पद का सीमित प्रभाव:
    • विधायक सुरेन्द्र मेहता को मंत्री बनाए जाने के बावजूद, 2024 के लोकसभा परिणामों ने दिखाया कि स्थानीय जनता की अपेक्षाएँ अभी भी अधूरी हैं। मंत्री पद की उपलब्धि को मतदाता विधानसभा चुनाव में अपनी समस्याओं के समाधान के रूप में नहीं देख रहे हैं।

निष्कर्ष

बछवाड़ा का चुनाव “484 बनाम 4,516” का मुकाबला है। NDA (BJP) के विधायक सुरेन्द्र मेहता ने पिछली बार बहुत कम अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में वह 4,516 वोटों से पीछे थे, जो NDA विरोधी लहर को दर्शाता है।

हालांकि, महागठबंधन की सबसे बड़ी कमजोरी उसके भीतर का टकराव है। यदि CPI और कांग्रेस के बीच का ‘फ्रेंडली फाइट’ बरकरार रहा और दोनों ने NDA विरोधी वोटों को विभाजित किया, तो NDA (BJP) मामूली अंतर से यह सीट बचा सकती है।

लेकिन, समीकरणों और हालिया रुझानों को देखते हुए, NDA विरोधी लहर मजबूत है। यदि अंतिम समय में महागठबंधन का कोई एक उम्मीदवार (चाहे CPI या INC) मजबूत होकर सामने आता है और दलित, यादव तथा मुस्लिम वोटों को एकजुट करता है, तो महागठबंधन का उम्मीदवार सीट जीतने में सफल होगा।

कुल मिलाकर, NDA के लिए यह सीट बचाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि 2020 की नजदीकी जीत और 2024 के लोकसभा रुझान दोनों ही उसके विपरीत हैं। महागठबंधन (MGB) की जीत की संभावना अधिक है, बशर्ते वह अपने वोटों को विभाजित होने से बचा ले।

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