1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला

गठबंधन/पार्टी संभावित उम्मीदवार स्थिति और पृष्ठभूमि
NDA कुमार पुष्पंजय JD(U) के नए चेहरे/NDA प्रत्याशी। सुदर्शन कुमार का टिकट कटने के बाद नए उम्मीदवार।
महागठबंधन (INC/RJD) गजानंद शाही (मुन्ना शाही) 2020 में मात्र 113 वोटों से हारे। क्षेत्र में मजबूत पकड़ और कांग्रेस के प्रमुख दावेदार।
निर्दलीय सुदर्शन कुमार वर्तमान विधायक (2020 में JDU से जीते)। टिकट कटने के बाद निर्दलीय के रूप में मैदान में।

 

2️⃣ 🏆 गजानंद शाही (महागठबंधन) की जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)

महागठबंधन उम्मीदवार गजानंद शाही (कांग्रेस) की जीत की संभावनाएँ निम्नलिखित कारणों पर आधारित हैं:

  • रिकॉर्ड तोड़ कम अंतर: 2020 में उन्हें केवल 113 वोटों से हार मिली थी (जो कि कुल पड़े वोटों का मात्र 0.10% है)। यह दर्शाता है कि उनकी ज़मीनी पकड़ कितनी मजबूत है और वोटों का एक छोटा-सा बदलाव भी उन्हें विजेता बना सकता है।
  • वोटों का विभाजन (NDA के लिए): मौजूदा विधायक सुदर्शन कुमार के निर्दलीय चुनाव लड़ने से NDA (JDU) के पारंपरिक भूमिहार और कुर्मी वोट भारी संख्या में बँट रहे हैं। इसका सीधा लाभ गजानंद शाही को मिलेगा, क्योंकि NDA का आधार कमजोर हो रहा है।
  • MY+भूमिहार समीकरण की उम्मीद: बरबीघा में भूमिहार मतदाताओं की सर्वाधिक संख्या है, जिसके बाद कुर्मी, पासवान और यादव निर्णायक हैं। गजानंद शाही भूमिहार समुदाय से आते हैं, और यदि वह कांग्रेस के पारंपरिक भूमिहार वोटों को RJD के मजबूत मुस्लिम-यादव (MY) आधार के साथ मिला पाते हैं, तो उनकी जीत निश्चित हो सकती है।
  • एंटी-इनकम्बेंसी का लाभ: विधायक सुदर्शन कुमार के प्रति क्षेत्र में एंटी-इनकम्बेंसी (स्थानीय विकास और सिंचाई की कमी जैसे मुद्दों पर नाराजगी) का माहौल है, जिसका फायदा महागठबंधन उठा सकता है।

 

3️⃣ ❌ NDA उम्मीदवार (कुमार पुष्पंजय) की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य)

NDA उम्मीदवार कुमार पुष्पंजय के लिए यह सीट जीतना सबसे बड़ी चुनौती है:

  • गंभीर ‘विद्रोही’ खतरा: सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान विधायक सुदर्शन कुमार का निर्दलीय मैदान में होना है। सुदर्शन कुमार एक स्थापित चेहरा हैं और उनके निर्दलीय उतरने से NDA का कोर वोट (विशेषकर भूमिहार वोट का एक बड़ा हिस्सा) सीधे-सीधे कट जाएगा, जिससे NDA प्रत्याशी की हार लगभग तय हो सकती है।
  • नए चेहरे पर जोखिम: NDA ने एक नए चेहरे कुमार पुष्पंजय पर दांव लगाया है। ऐसे त्रिकोणीय मुकाबले में नए उम्मीदवार के लिए स्थापित चेहरों के बीच अपनी जगह बनाना और मतदाताओं के बीच तुरंत विश्वास कायम करना बहुत कठिन होता है।
  • स्थानीय विकास के मुद्दे: स्थानीय जनता में सिंचाई की कमी, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की ख़राब स्थिति को लेकर नाराजगी है। NDA सरकार के घटक दल होने के कारण, NDA उम्मीदवार को इन मुद्दों पर सीधे जनता के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
  • जातीय गणित का बिखराव: NDA के लिए यह आवश्यक है कि भूमिहार, कुर्मी और अतिपिछड़ा वोट एक साथ आएं। लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के कारण भूमिहार वोट के बँटने से यह समीकरण बिखर जाएगा।

 

4️⃣ निर्णायक फैक्टर: सुदर्शन कुमार के वोट किसे नुकसान पहुँचाएंगे?

इस सीट पर निर्णायक कारक यह होगा कि निर्दलीय सुदर्शन कुमार किसे अधिक नुकसान पहुँचाते हैं:

  • यदि सुदर्शन कुमार मुख्य रूप से NDA के भूमिहार वोटों में सेंध लगाते हैं, तो गजानंद शाही (महागठबंधन) की जीत आसान हो जाएगी।
  • यदि सुदर्शन कुमार महागठबंधन के वोट काटने में कामयाब होते हैं, तो मुकाबला फिर से कड़ा हो जाएगा, लेकिन NDA के नए उम्मीदवार के लिए जीत की राह अभी भी मुश्किल बनी रहेगी।
  • 2024 लोकसभा चुनाव में NDA की 29,000 वोटों की बढ़त थी, लेकिन यह बढ़त तब थी जब सुदर्शन कुमार JDU के साथ थे। निर्दलीय होकर वह JDU की इस बढ़त को खत्म कर देंगे, जिससे महागठबंधन को सबसे अधिक लाभ होने की संभावना है।

निष्कर्ष: बरबीघा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है। वर्तमान समीकरणों को देखते हुए, NDA उम्मीदवार (कुमार पुष्पंजय) की राह सबसे कठिन है। निर्दलीय सुदर्शन कुमार के मैदान में रहने से महागठबंधन के गजानंद शाही के जीतने की संभावनाएँ सर्वाधिक मजबूत हैं।

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