बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में किशनगंज जिले की बहादुरगंज (Bahadurganj) विधानसभा सीट पर, वर्तमान राजनीतिक समीकरणों और पिछले परिणामों के विश्लेषण के आधार पर, महागठबंधन (राष्ट्रीय जनता दल – RJD) के उम्मीदवार और वर्तमान विधायक मोहम्मद अंजार नईमी के जीतने की प्रबल संभावना है।
यह सीट मुख्य रूप से अल्पसंख्यक (मुस्लिम) बहुल है और यहां की लड़ाई हमेशा महागठबंधन और AIMIM/कांग्रेस के बीच केंद्रित रहती है, न कि सीधे NDA के साथ।
विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन उम्मीदवार – मोहम्मद अंजार नईमी, RJD)
बहादुरगंज सीट पर मोहम्मद अंजार नईमी (RJD) की संभावित जीत के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. MY समीकरण और व्यक्तिगत जनाधार का मिलन:
- निर्णायक मुस्लिम मतदाता: बहादुरगंज बिहार की सबसे मजबूत मुस्लिम बहुल सीटों में से एक है, जहां 66% से अधिक मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं। मुस्लिम और यादव (MY) समीकरण, जो RJD का आधार है, यहां सबसे अधिक प्रभावी होता है।
- विधायक की स्थिति: अंजार नईमी वर्तमान विधायक हैं। उन्होंने 2020 में AIMIM के टिकट पर प्रचंड जीत हासिल की थी और मार्च 2022 में वह RJD में शामिल हो गए। उनका यह कदम मुस्लिम वोटों को AIMIM के बजाय RJD के पक्ष में निर्णायक रूप से एकजुट कर सकता है।
- एंटी-NDA वोट का समेकन: सीमांचल के मुस्लिम मतदाता अक्सर उस उम्मीदवार को चुनते हैं जो NDA को हराने की सबसे अधिक क्षमता रखता हो। RJD-कांग्रेस गठबंधन के भीतर होने के कारण नईमी को पारंपरिक ‘सेकुलर’ वोट का पूरा समर्थन मिलने की संभावना है।
2. 2020 के AIMIM वोटों का RJD में स्थानांतरण:
- पिछले प्रदर्शन का आधार: 2020 में नईमी ने 85,855 वोटों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की थी। उनका पार्टी बदलना, AIMIM के उन भारी वोटों को अब RJD के खाते में स्थानांतरित कर देगा, जिससे महागठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत हो जाएगी।
3. कांग्रेस के किले का टूटना:
- कांग्रेस का पतन: यह सीट ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस का गढ़ रही है, जिसने 10 बार जीत दर्ज की है। लेकिन 2020 में कांग्रेस उम्मीदवार (मोहम्मद तौसीफ आलम) तीसरे स्थान पर चले गए थे। कांग्रेस का जनाधार छिन्न-भिन्न हो चुका है और इस बार भी यदि कांग्रेस यहां से उम्मीदवार उतारती है, तो वह केवल RJD के मुस्लिम वोटों को ही काटेगी, जिससे NDA को कोई विशेष लाभ नहीं होगा।
विपक्षी दलों की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (AIMIM, कांग्रेस, NDA)
बहादुरगंज सीट पर अन्य उम्मीदवारों/दलों की जीत की राह में बाधा बनने वाले मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. AIMIM की चुनौती (मोहम्मद तौसीफ आलम/अख्तरुल ईमान)
- पार्टी की कमजोरी: 2020 में AIMIM ने 5 सीटें जीती थीं, लेकिन 4 विधायक RJD में शामिल हो गए। इस दलबदल ने पार्टी को कमजोर किया है और मुस्लिम मतदाताओं के बीच यह संदेश दिया है कि AIMIM स्थायी राजनीतिक विकल्प नहीं है।
- मतदाता का संदेह: मुस्लिम समुदाय के मतदाता अपने वोट को बर्बाद करने से बचने के लिए उस पार्टी के साथ रहना पसंद करेंगे, जिसकी राज्य में सरकार बनाने की संभावना हो।
- उम्मीदवार की स्थिति: यदि पूर्व विधायक तौसीफ आलम AIMIM से लड़ते हैं, तो वह अंजार नईमी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाएंगे, लेकिन यह सेंध जीतने लायक वोटों में बदलने की बजाय केवल त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनाएगी, जिसमें RJD भारी पड़ सकती है।
2. कांग्रेस की कमजोर स्थिति
- खराब प्रदर्शन (2020): कांग्रेस के कद्दावर नेता मोहम्मद तौसीफ आलम 2020 में 30,204 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे।
- सीट बंटवारे का संघर्ष: महागठबंधन में यह सीट RJD और कांग्रेस दोनों दावा कर सकते हैं, जिससे दोनों के बीच अनबन की संभावना है। यदि कांग्रेस चुनाव लड़ती है, तो वह केवल RJD के वोट काटेगी और अपनी हार सुनिश्चित करेगी।
3. NDA (BJP/JDU) के लिए प्रतिकूल स्थितियाँ
- अत्यधिक मुस्लिम बहुल क्षेत्र: 66% मुस्लिम मतदाताओं के कारण, यह सीट NDA के लिए जीतना लगभग असंभव है। भाजपा यहां केवल एक बार (1995) जीत पाई है।
- ध्रुवीकरण की सीमा: NDA तभी जीत सकती है जब मुस्लिम वोट RJD, AIMIM, कांग्रेस, और अन्य के बीच चार-पांच भागों में बंट जाएं। 2020 में NDA की सहयोगी VIP दूसरे स्थान पर थी, लेकिन उसने AIMIM के मुकाबले बहुत कम वोट (40,640) प्राप्त किए थे। NDA के पक्ष में हिंदू (अल्पसंख्यक) वोटों का ध्रुवीकरण भी जीत के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
निष्कर्ष:
बहादुरगंज सीट पर मोहम्मद अंजार नईमी का वर्तमान विधायक होना, उनका RJD में शामिल होना, और मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण का मजबूत आधार उन्हें स्पष्ट बढ़त दिलाता है। AIMIM एक मजबूत चुनौती पेश कर सकती है, लेकिन नईमी की मौजूदा स्थिति मुस्लिम वोट बैंक को AIMIM के बजाय RJD के पक्ष में मजबूती से एकजुट कर सकती है। NDA के लिए यह सीट जीतना केवल विपक्षी वोटों के अत्यधिक विखंडन पर निर्भर करता है, जिसकी संभावना कम है।