चेतावनी: यह विश्लेषण उपलब्ध आँकड़ों, पिछले चुनावी रुझानों और वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम (जैसे टिकट कटने के बाद निर्दलीय लड़ने की घोषणा) पर आधारित है। चुनाव का परिणाम अप्रत्याशित हो सकता है और यह केवल एक संभावित भविष्यवाणी है, अंतिम परिणाम नहीं।

नरकटियागंज विधानसभा सीट (संख्या 3) पश्चिमी चंपारण जिले में आती है।1 यह सीट एक उच्च जातीय वर्चस्व और मुस्लिम मतदाताओं की महत्वपूर्ण संख्या के कारण हमेशा से ही बीजेपी और कांग्रेस/महागठबंधन के बीच एक करीबी और दिलचस्प मुकाबला रही है।

 


 

संभावित विजेता: भारतीय जनता पार्टी (BJP)

 

नरकटियागंज सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार, संजय पांडे की जीत की संभावना अधिक है, लेकिन यह जीत पार्टी की संगठनात्मक शक्ति और बाग़ी वोट को नियंत्रित करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

 

जीतने के पक्ष में विश्लेषणात्मक तथ्य (BJP)

 

  1. संगठनात्मक ताकत: नरकटियागंज बीजेपी का एक पारंपरिक गढ़ माना जाता है, जहाँ संगठन की मज़बूती और ‘उच्च जातियों के समर्थन’ (सवर्ण वोट बैंक) ने इसे लगातार बढ़त दी है। 2020 में, बीजेपी की रश्मि वर्मा ने कांग्रेस के विनय वर्मा को 21,134 वोटों (13.00% अंतर) के बड़े अंतर से हराया था।2

     

  2. वोट का ध्रुवीकरण: इस क्षेत्र में मजबूत मुस्लिम आबादी (20% से अधिक) है, जो आमतौर पर महागठबंधन को वोट करती है। इसके जवाब में, बीजेपी उच्च जातियों और अति पिछड़े वर्गों (EBC) के एक बड़े हिस्से का ध्रुवीकरण करने में सफल रही है।
  3. महागठबंधन में आंतरिक कलह/वोट बंटवारा:
    • यह सीट महागठबंधन में कांग्रेस के पास है (2020 में उपविजेता)।
    • 2025 के चुनाव में, AIMIM और अन्य छोटे दलों की उपस्थिति मुस्लिम वोटों को विभाजित कर सकती है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा। (AIMIM ने बिहार में 25 उम्मीदवार उतारे हैं)।3

       

  4. लोकसभा प्रदर्शन: क्षेत्र में एनडीए गठबंधन की हालिया चुनावी सफलताएँ (जैसे 2024 लोकसभा चुनाव में वाल्मीकि नगर सीट पर प्रदर्शन) बीजेपी के लिए सकारात्मक माहौल बनाती हैं।

 

प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (महागठबंधन/विपक्षी उम्मीदवार)

 

  1. वर्मा परिवार की राजनीतिक विरासत और बाग़ी तेवर (सबसे बड़ा खतरा):
    • निवर्तमान विधायक रश्मि वर्मा का टिकट कट गया है, और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है।
    • रश्मि वर्मा 2014 उपचुनाव और 2020 में बीजेपी के टिकट पर जीती थीं।4 उनका दावा है कि उनके पास जनता का समर्थन है और वह 1 लाख पार के नारे के साथ मैदान में हैं।

       

    • नरकटियागंज सीट पर वर्मा परिवार (रश्मि वर्मा और कांग्रेस के विनय वर्मा) का लंबा राजनीतिक प्रभाव रहा है। रश्मि वर्मा का निर्दलीय लड़ना बीजेपी के कोर वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है, जिससे सीधा लाभ महागठबंधन के उम्मीदवार शाश्वत केदार पांडे (कांग्रेस, यदि उम्मीदवार हैं) या अन्य विपक्षी उम्मीदवार को मिलेगा।
  2. पारंपरिक वोट बैंक की लामबंदी: महागठबंधन, खासकर RJD, अपने मज़बूत ‘मुस्लिम-यादव’ (M-Y) समीकरण पर निर्भर करता है। यदि कांग्रेस, RJD के समर्थन से मुस्लिम (20%+), यादव और कुशवाहा जैसे महत्वपूर्ण वर्गों के वोट को एकजुट करने में सफल होती है, तो यह सीट बीजेपी के लिए एक कठिन मुकाबला बन जाएगी।
  3. एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर): रश्मि वर्मा के प्रति स्थानीय स्तर पर कोई असंतोष था या नहीं, यह उनके टिकट कटने का एक कारण हो सकता है। यदि यह असंतोष बीजेपी के नए उम्मीदवार संजय पांडे के खिलाफ भी जाता है, तो विपक्ष को लाभ होगा।

 

प्रमुख विपक्षी उम्मीदवार (INC/महागठबंधन) के हारने के तथ्य

 

नरकटियागंज सीट पर बीजेपी का मुख्य मुकाबला कांग्रेस/महागठबंधन से ही है। महागठबंधन के हारने का मुख्य कारण बीजेपी के पक्ष में वोट का बिखराव और बाग़ी उम्मीदवार के खेल को नियंत्रित न कर पाना हो सकता है।

तथ्य/आँकड़े नरकटियागंज सीट पर प्रभाव क्यों हार सकते हैं?
बीजेपी के बड़े अंतर से जीत 2020 में कांग्रेस के विनय वर्मा 21,134 वोटों से हारे थे। यह अंतर केवल एक एंटी-इनकंबेंसी लहर से नहीं भरा जा सकता। महागठबंधन को बीजेपी के कोर सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ की ज़रूरत होगी, जो अभी तक स्पष्ट नहीं है।
बाग़ी रश्मि वर्मा का फैक्टर रश्मि वर्मा (निवर्तमान बीजेपी विधायक) का निर्दलीय लड़ना। रश्मि वर्मा बीजेपी के सवर्ण/कोर वोट बैंक से बड़े पैमाने पर वोट काटेंगी, लेकिन इसका लाभ सीधे तौर पर महागठबंधन को तभी मिलेगा, जब उनके कोर वोट (M-Y) पूरी तरह से उनके पक्ष में एकजुट रहें। यदि रश्मि वर्मा ने मुस्लिम वोटों में भी सेंध लगाई, तो महागठबंधन हार सकता है।
मुस्लिम वोटों का विभाजन AIMIM ने बिहार में उम्मीदवार उतारे हैं। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की महत्वपूर्ण संख्या है। AIMIM या अन्य मुस्लिम उम्मीदवारों की उपस्थिति महागठबंधन के पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक को विभाजित कर सकती है, जिससे BJP की राह आसान होगी।
वंशवाद का मुद्दा कांग्रेस के उम्मीदवार रहे विनय वर्मा का संबंध भी इसी क्षेत्र के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से है। बीजेपी हमेशा परिवारवाद के मुद्दे को उठाकर जनता को प्रभावित कर सकती है, जबकि बीजेपी ने यहाँ संजय पांडे के रूप में एक नया चेहरा दिया है (हालांकि, रश्मि वर्मा के बगावत के कारण यह मुद्दा कमजोर हो सकता है)।

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