बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मधेपुरा जिले की सिंघेश्वर (Singheshwar) (SC आरक्षित) सीट पर मुकाबला अत्यंत दिलचस्प रहने की उम्मीद है, खासकर 2020 के करीबी मुकाबले को देखते हुए।
मौजूदा राजनीतिक माहौल और पिछले चुनावों के आंकड़ों के आधार पर, यह अनुमान लगाना कठिन है कि कौन सा उम्मीदवार निश्चित रूप से जीतेगा, लेकिन महागठबंधन (राष्ट्रीय जनता दल – RJD) के उम्मीदवार चंद्रहास चौपाल और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (जनता दल यूनाइटेड – JDU) के उम्मीदवार रमेश ऋषिदेव के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है।
संभावित विजेता: चंद्रहास चौपाल (राष्ट्रीय जनता दल – RJD)
2020 में RJD के चंद्रहास चौपाल ने यह सीट JDU के रमेश ऋषिदेव को 5,573 वोटों के मामूली अंतर से हराकर जीती थी।
चंद्रहास चौपाल (RJD) के पक्ष में जीत के विश्लेषण और तथ्य:
- मौजूदा विधायक होने का लाभ (Anti-Incumbency Factor को मात देना):
- विधायक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान यदि उन्होंने ज़मीनी स्तर पर काम किया है और जनता से जुड़ाव बनाए रखा है, तो उन्हें इसका सीधा लाभ मिलेगा। RJD ने उन्हें फिर से टिकट दिया है (राजद की सूची के अनुसार), जो उनकी लोकप्रियता और पार्टी में विश्वास को दर्शाता है।
- RJD का पारंपरिक कोर वोट बैंक (M-Y समीकरण):
- बिहार की राजनीति में RJD का यादव और मुस्लिम (M-Y) समीकरण काफी मजबूत है। सिंघेश्वर सीट पर भी यह समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकता है। अगर ये मतदाता एकजुट होकर मतदान करते हैं, तो RJD को बड़ी बढ़त मिलेगी।
- युवाओं और तेजस्वी यादव का प्रभाव:
- RJD नेता तेजस्वी यादव की रैलियों में युवाओं की भागीदारी और “तेजस्वी फैक्टर” इस सीट पर भी RJD के पक्ष में माहौल बना सकता है। RJD सरकार बनने पर नौकरी जैसे वादों का असर हो सकता है।
- पिछले चुनाव में जीत का मनोबल:
- 2020 में यह सीट RJD ने JDU से छीनी थी, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा है।
विपक्षी उम्मीदवार रमेश ऋषिदेव (JDU/NDA) के हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:
- करीबी हार और एंटी-इनकम्बेंसी (2020):
- रमेश ऋषिदेव 2020 में 5,573 वोटों के कम अंतर से हारे थे। यह दर्शाता है कि 2010 से 2020 तक लगातार विधायक रहने के बाद (बीच में 2020 में हार), उनके खिलाफ कुछ हद तक सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) काम कर रही थी।
- JDU का घटता वोट शेयर (हालिया चुनावों में):
- अगर JDU का गठबंधन NDA में बरकरार रहता है, तो भी हाल के कुछ चुनावों में (2024 लोकसभा चुनाव को छोड़कर, जिसमें NDA को बढ़त मिली थी), JDU के व्यक्तिगत वोट शेयर में गिरावट आई है। सिंघेश्वर सीट पर 2020 में JDU हार गई थी, जो पार्टी के लिए एक चिंता का विषय है।
- लगातार हार का दबाव:
- यदि JDU/NDA उम्मीदवार रमेश ऋषिदेव फिर से मैदान में उतरते हैं, तो उन पर पिछली हार का मानसिक दबाव होगा और उन्हें चौपाल की तुलना में अधिक प्रयास करना होगा।
- जातीय समीकरण में बिखराव:
- यदि NDA का पारंपरिक वोट बैंक (उच्च जातियां, कुछ महादलित और अति-पिछड़ा वर्ग) अलग-अलग दलों या नए विकल्पों की तरफ मुड़ता है, तो JDU की राह मुश्किल होगी। 2020 के चुनाव में चंद्रहास चौपाल के जीतने का एक कारण यह भी हो सकता है कि उन्होंने JDU के पारंपरिक महादलित वोटों में सेंध लगाई हो।
निष्कर्ष और अतिरिक्त समीकरण:
सिंघेश्वर (एससी) सीट पर मुकाबला हमेशा जातीय समीकरणों, स्थानीय विकास के मुद्दे और पार्टी/गठबंधन के प्रभाव पर निर्भर करता है।
- यह सीट 2005 से 2015 तक JDU का गढ़ मानी जाती थी (रमेश ऋषिदेव ने लगातार 2010 और 2015 में जीत हासिल की)। 2020 में यह सीट RJD ने जीती, जिससे यह एक “स्विन्ग सीट” बन गई है।
- 2024 लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन: यदि हाल के लोकसभा चुनाव में NDA को इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त मिली है, तो यह JDU/NDA के लिए सकारात्मक संकेत होगा। अन्यथा, RJD अपनी पकड़ मजबूत रखेगी।
- नए और छोटे दलों की भूमिका: जन सुराज जैसे किसी तीसरे विकल्प के मैदान में आने से दोनों प्रमुख गठबंधनों के वोट कटेंगे, जिससे मुकाबले का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा।
पूर्वानुमान: वर्तमान परिस्थितियों और 2020 के परिणामों को देखते हुए, चंद्रहास चौपाल (RJD) के लिए अपनी सीट बचाए रखना आसान नहीं होगा, लेकिन RJD के मजबूत M-Y वोट आधार और चंद्रहास चौपाल के मौजूदा विधायक होने के कारण, उनके जीतने की संभावना थोड़ी अधिक है। हालांकि, JDU के रमेश ऋषिदेव कड़ा मुकाबला देंगे और यह सीट “कांटे की टक्कर” वाली बनी रहेगी।