पटना, 23 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी चुनावी बिसात बिछा दी है। गठबंधन के दो सबसे बड़े घटक दलों— भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) [JD(U)]— ने अपने-अपने खाते की सभी 101-101 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की अंतिम घोषणा कर दी है। यह पहली बार है जब दोनों दल बिहार में बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जो राज्य की राजनीति में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

जेडीयू और बीजेपी की इन 202 सीटों की घोषणा के साथ, एनडीए ने बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट कर दी है। शेष सीटें सहयोगी दलों – लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP (R)] को 29, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 6-6 सीटों पर आवंटित की गई हैं।

दोनों दलों की सूचियों का विश्लेषण स्पष्ट करता है कि जीत की संभावना, जातीय संतुलन, और मौजूदा विधायकों पर भरोसा ही टिकट वितरण का मुख्य आधार रहा है।


भाग 1: बीजेपी की ‘विस्तारवादी’ रणनीति: 101 सीटों का जातीय गणित

बीजेपी की 101 उम्मीदवारों की सूची उसके पारंपरिक वोट बैंक को साधने के साथ-साथ अत्यंत पिछड़े वर्ग (EBC) और ओबीसी के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के ‘विस्तारवादी’ दृष्टिकोण को दर्शाती है।

प्रमुख जातीय समीकरण और प्रतिनिधित्व (लगभग आँकड़े):

वर्ग उम्मीदवारों की संख्या (लगभग) मुख्य दांव
ओबीसी (गैर-यादव) लगभग 30-32 ओबीसी को साधने पर स्पष्ट फोकस, जिसमें कुशवाहा (8-10) और वैश्य (6-8) प्रमुख हैं।
अति पिछड़ा वर्ग (EBC) लगभग 20-22 ईबीसी को साधने का प्रयास, जो नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक माना जाता है।
सवर्ण (Forwards) लगभग 35-40 राजपूत (15-17) और भूमिहार (12-14) पर सबसे ज्यादा भरोसा। यह बीजेपी का पारंपरिक मजबूत आधार है। ब्राह्मण (7-9) और कायस्थ (2-3) को भी जगह।
दलित (SC/ST) लगभग 10-12 आरक्षित सीटों पर मजबूत दावेदार।
महिला उम्मीदवार लगभग 12-15 महिला मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए अनुभवी और नए चेहरों को मौका।

बीजेपी के मुख्य दांव और दिग्गज चेहरे:

  1. उप-मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता:
    • विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय): पार्टी के सबसे बड़े ओबीसी (कुर्मी) चेहरे और अनुभवी नेता, जो डिप्टी सीएम हैं।
    • सम्राट चौधरी (तारापुर): ओबीसी (कुशवाहा) समाज के बड़े नेता, जो डिप्टी सीएम हैं।
    • मंगल पांडेय (सीवान): सवर्ण (ब्राह्मण) नेता, पार्टी का एक मजबूत चेहरा।
    • रेणु देवी (बेतिया): अति-पिछड़ा वर्ग (नोनिया) से आने वाली और पूर्व उपमुख्यमंत्री।
    • प्रेम कुमार (गया शहर): पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में से एक।
  2. लोकप्रिय चेहरे और नए प्रयोग:
    • नितिन नवीन (बांकीपुर), संजीव चौरसिया (दीघा), संजय सरावगी (दरभंगा), नंद किशोर यादव (पटना साहिब) जैसे अनुभवी विधायकों को रिपीट किया गया है।
    • बिहार की राजनीति में सवर्ण (विशेष रूप से राजपूत और भूमिहार) मतदाताओं पर बीजेपी का भारी भरोसा बरकरार है, लेकिन ओबीसी/ईबीसी के प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है।
    • आनंद मिश्रा (बक्सर) जैसे पूर्व आईपीएस अधिकारियों को टिकट देकर ‘स्वच्छ छवि’ वाले नेताओं को मैदान में उतारने का प्रयास किया गया है।
    • मैथिली ठाकुर (अलीनगर) जैसे युवा और लोकप्रिय चेहरे को टिकट देकर युवा और महिला वोटरों को लुभाने का प्रयास है।

बीजेपी की रणनीति का फोकस:

बीजेपी की सूची में क्षेत्रीय संतुलन पर ध्यान दिया गया है, जिसमें उत्तरी बिहार (मिथिलांचल) और मध्य बिहार (पटना/मगध) क्षेत्रों पर विशेष ध्यान है। पार्टी का लक्ष्य अपने पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक को बनाए रखते हुए, नीतीश कुमार के कोर EBC वोट बैंक में सेंध लगाना है।


भाग 2: जेडीयू की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ सूची: नीतीश का ‘लव-कुश’ और EBC कार्ड

जनता दल (यूनाइटेड) ने अपनी 101 सीटों की सूची में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर एक बार फिर भरोसा जताया है। जेडीयू की टिकट वितरण का मुख्य आधार EBC + लव-कुश (कुर्मी-कुशवाहा) + महिला मतदाता हैं।

प्रमुख जातीय समीकरण और प्रतिनिधित्व (लगभग आँकड़े):

वर्ग उम्मीदवारों की संख्या (लगभग) मुख्य दांव
ओबीसी (लव-कुश) लगभग 25-30 कुर्मी (10-12) और कुशवाहा (12-14) को सबसे ज्यादा टिकट देकर कोर वोट बैंक को मजबूत किया गया है।
अति पिछड़ा वर्ग (EBC) लगभग 20-25 EBC पर सबसे ज्यादा भरोसा, यह नीतीश कुमार की राजनीति की आधारशिला है।
सवर्ण (Forwards) लगभग 20-22 सवर्णों को उचित प्रतिनिधित्व (भूमिहार 8-10, राजपूत 7-9) देकर बीजेपी के साथ संतुलन बनाया गया है।
दलित (SC/ST) लगभग 15-18 आरक्षित सीटों के अलावा भी दलितों को प्रतिनिधित्व।
यादव लगभग 8-10 आरजेडी के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए ‘गैर-यादव ओबीसी’ पर ज्यादा फोकस।
मुस्लिम 4-5 अल्पसंख्यक समुदाय से चार (सबा जफर, जमा खान, आदि) को टिकट देकर धर्मनिरपेक्ष छवि बनाए रखने का प्रयास।
महिला उम्मीदवार 13 महिला वोटरों के महत्व को समझते हुए 101 सीटों पर 13 महिलाओं को टिकट।

जेडीयू के मुख्य दांव और अनुभवी चेहरे:

  1. नीतीश कुमार के करीबी मंत्री:
    • श्रवण कुमार (नालंदा): सीएम के गृह जिले और करीबी मंत्री, कुर्मी समाज से।
    • विजय कुमार चौधरी (सरायरंजन): अनुभवी नेता और विधानसभा अध्यक्ष।
    • बिजेन्द्र प्रसाद यादव (सुपौल): पार्टी के वरिष्ठतम मंत्री।
    • महेश्वर हजारी (कल्याणपुर): एससी समुदाय से आने वाले मंत्री।
  2. दलबदलुओं और ‘बाहरी’ को टिकट:
    • जेडीयू ने कई सीटों पर पुराने उम्मीदवारों को बदला है और दलबदलुओं को भी टिकट दिया है।
    • आरजेडी से आए चेतन आनंद (नबीनगर) और अन्य को टिकट देकर राजनीतिक पाला बदलने वाले प्रभावशाली चेहरों पर दांव खेला गया है।
    • बाहुबली अनंत सिंह की सीट (मोकामा) से जेडीयू ने राज कुमार सिंह को उतारा है, जो एक बड़ा मुकाबला होगा।

जेडीयू की रणनीति का फोकस:

नीतीश कुमार ने अपने कोर वोट बैंक ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) को प्राथमिकता दी है, जिसके साथ अति-पिछड़ा वर्ग (EBC) को जोड़कर अपनी राजनीतिक ताकत को मजबूत किया है। महिलाओं को 13 टिकट देकर महिला वोटरों को साधने पर विशेष जोर है, जो बिहार चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।


भाग 3: एनडीए का ‘बराबर’ बंटवारा और सीट शेयरिंग का दांव

ऐतिहासिक समानता और बीजेपी का उदय:

यह पहली बार है जब बीजेपी और जेडीयू 101-101 सीटों पर लड़ रहे हैं। पिछले चुनावों में जेडीयू को हमेशा बीजेपी से अधिक सीटें मिलती थीं। यह समानता न केवल बीजेपी के बढ़ते कद को दर्शाती है, बल्कि चुनाव के बाद संभावित ‘बड़े भाई’ की भूमिका को लेकर भी संकेत देती है।

सहयोगियों का समीकरण:

  • लोजपा (रामविलास) [LJP(R)] (29 सीटें): चिराग पासवान को 29 सीटें देकर एनडीए ने पासवान वोट बैंक को अपने साथ बनाए रखने की कोशिश की है, हालांकि चिराग को पिछली बार से अधिक सीटें मिली हैं।
  • हम (HAM) और आरएलएम (RLM) (6-6 सीटें): जीतनराम मांझी (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा (RLM) को 6-6 सीटें देकर एनडीए ने दलित (मांझी) और कुशवाहा (उपेंद्र कुशवाहा) समुदाय के प्रभाव को साधने का प्रयास किया है, हालांकि दोनों को सीमित सीटें मिली हैं।

बदलती हुई सीटें (Swap Seats):

कई सीटें बीजेपी और जेडीयू के बीच ‘अदला-बदली’ (Swap) हुई हैं। यह अदला-बदली क्षेत्रीय प्रभाव और उम्मीदवार की जीत की संभावना के आधार पर की गई है। उदाहरण के लिए, पिपरा जैसी कुछ सीटें जेडीयू से बीजेपी को मिली हैं, जबकि मोकामा जैसी सीटें अब जेडीयू लड़ रही है।


भाग 4: प्रमुख मुकाबला और चुनावी माहौल

बीजेपी और जेडीयू की सूची जारी होने के बाद कई हाई-प्रोफाइल मुकाबले तय हो गए हैं:

  • मोकामा: जेडीयू के राजकुमार सिंह का मुकाबला आरजेडी के उम्मीदवार से होगा।
  • सीवान: बीजेपी के मंगल पांडेय का मुकाबला स्थानीय मजबूत उम्मीदवार से होगा।
  • सासाराम: आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता का मुकाबला भी चर्चा में है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और एनडीए की तैयारी:

  • महागठबंधन ने एनडीए के टिकट बंटवारे को ‘जातिवादी और पूंजीपतियों को प्राथमिकता देने वाला’ बताया है और आरोप लगाया है कि दोनों सूचियों में युवाओं और गरीबों को जगह नहीं मिली है।
  • इसके विपरीत, एनडीए का दावा है कि उन्होंने ‘सामाजिक संतुलन’ और ‘योग्यता’ को सर्वोपरि रखा है। अब, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 अक्टूबर से शुरू होने वाले ताबड़तोड़ प्रचार अभियान से एनडीए इन सभी 243 सीटों पर एक मजबूत लहर बनाने का प्रयास करेगा।

निष्कर्ष

बीजेपी और जेडीयू की 101-101 उम्मीदवारों की सूची बिहार चुनाव के लिए एनडीए के जातीय समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और सत्ता विरोधी लहर को कम करने की विस्तृत योजना को दर्शाती है। जहां बीजेपी ने सवर्णों के साथ ओबीसी/ईबीसी पर ध्यान केंद्रित करके अपना आधार बढ़ाया है, वहीं जेडीयू ने ‘लव-कुश’ और ईबीसी पर अपनी पकड़ मजबूत की है। अब, असली मुकाबला मैदान में शुरू होगा, जहां इन उम्मीदवारों को मतदाताओं के सामने ‘डबल इंजन’ के विकास के दावे को सही साबित करना होगा। यह लिस्ट 2025 के बिहार चुनाव की दिशा तय करने में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

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