बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दरभंगा (शहरी) विधानसभा सीट पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यह सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गढ़ रही है, और यहां से वर्तमान में संजय सरावगी विधायक हैं। राजनीतिक समीकरण और पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए, इस बार भी उनके ही जीतने की प्रबल संभावना है।
संभावित विजेता: संजय सरावगी (भारतीय जनता पार्टी – BJP) – NDA
संजय सरावगी (BJP) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:
- बीजेपी का गढ़ और अजेय रिकॉर्ड (2005 से कब्ज़ा):
- दरभंगा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। संजय सरावगी ने साल 2005 से लगातार इस सीट पर जीत हासिल की है। 2005 (दो बार), 2010, 2015 और 2020 में जीत के साथ, वह लगातार चार बार के विधायक हैं।
- यह लगातार जीत उनकी मजबूत व्यक्तिगत पकड़, पार्टी के प्रति स्थानीय जनता के अटूट विश्वास और संगठनात्मक क्षमता को दर्शाती है।
- सवर्ण/वैश्य मतदाता और शहरी वोट बैंक:
- दरभंगा एक शहरी सीट है (लगभग 76.76% शहरी मतदाता)। इस सीट पर सवर्ण (ब्राह्मण, भूमिहार) और वैश्य (Bania) समुदाय के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा है, जिन्हें पारंपरिक रूप से बीजेपी का मुख्य वोट बैंक माना जाता है।
- सरावगी स्वयं वैश्य समुदाय से आते हैं, और ब्राह्मण, भूमिहार तथा अन्य अगड़ी जातियों के वोट उनके पक्ष में बड़ी संख्या में एकजुट होते हैं।
- 2020 की जीत का मजबूत अंतर:
- 2020 के चुनाव में, सरावगी ने महागठबंधन (RJD) के अमरनाथ गामी को 10,639 वोटों के अच्छे अंतर से हराया था। यह दिखाता है कि RJD के ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण के बावजूद, बीजेपी अपने मजबूत आधार को बनाए रखने में सफल रही।
- सरावगी को 84,144 वोट (49.3%) मिले थे, जो उनके मजबूत जनाधार का प्रमाण है।
- 2024 लोकसभा चुनाव में NDA की बढ़त:
- 2024 के लोकसभा चुनाव में, दरभंगा लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों में NDA ने मजबूत बढ़त हासिल की थी। यह रुझान बताता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गठबंधन सरकार के प्रति मतदाताओं का विश्वास कायम है, जिसका सीधा फायदा संजय सरावगी को विधानसभा चुनाव में मिलेगा।
- संगठनात्मक पकड़ और विकास की छवि:
- एक स्थापित और अनुभवी नेता होने के नाते, सरावगी की इलाके में अच्छी संगठनात्मक पकड़ है। उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो क्षेत्र के विकास कार्यों पर ध्यान देते हैं।
महागठबंधन/RJD उम्मीदवार की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:
महागठबंधन/RJD के उम्मीदवार (संभावित रूप से अमरनाथ गामी या कोई अन्य उम्मीदवार) को निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:
- MY समीकरण का सीमित प्रभाव:
- दरभंगा सीट पर मुस्लिम मतदाता लगभग 23.3% हैं, और यादवों का भी अच्छा प्रभाव है। यह RJD का मुख्य आधार है। हालांकि, यह सीट शहरी होने के कारण और गैर-मुस्लिम/गैर-यादव वोटों के धुव्रीकरण के चलते, MY समीकरण यहां दरभंगा ग्रामीण जितना निर्णायक नहीं हो पाता है।
- सवर्ण/वैश्य वोटों की भारी एकजुटता RJD के MY समीकरण पर भारी पड़ जाती है।
- बीजेपी के अजेय दुर्ग को भेदने की चुनौती:
- लगातार चार बार हारने के बाद, महागठबंधन के उम्मीदवार के लिए यह सीट जीतना एक मनोवैज्ञानिक चुनौती बन जाती है। मतदाताओं के मन में यह धारणा मजबूत हो चुकी है कि यह सीट बीजेपी की ही है।
- स्थानीय बनाम स्थापित नेता का संघर्ष:
- RJD ने 2020 में अमरनाथ गामी जैसे मजबूत उम्मीदवार को उतारा था, लेकिन वे भी संजय सरावगी के चार बार के अनुभव और गहरी जड़ें जमा चुके जनाधार को भेद नहीं पाए। इस बार भी, किसी भी नए चेहरे के लिए यह किला तोड़ना अत्यंत कठिन होगा।
- विकास का मुद्दा:
- हालांकि RJD रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दे उठाती है, लेकिन शहरी दरभंगा के मतदाता अक्सर स्थिरता, शहरी विकास और राष्ट्रीय राजनीति के रुझानों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं, जो BJP के पक्ष में जाता है।
निष्कर्ष और पूर्वानुमान:
दरभंगा विधानसभा सीट पर मुकाबला कड़ा हो सकता है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के संजय सरावगी की स्थिति बहुत मजबूत है। उनका चार बार का रिकॉर्ड, मजबूत शहरी/सवर्ण/वैश्य वोट बैंक, और 2024 के लोकसभा चुनाव में NDA के पक्ष में आए रुझान उनकी जीत की नींव हैं।
महागठबंधन को केवल MY समीकरण के भरोसे यह सीट जीतना लगभग असंभव है, जब तक कि वह सवर्ण/वैश्य/अन्य पिछड़ी जातियों में कोई बड़ी सेंध न लगा पाए।
पूर्वानुमान: संजय सरावगी (BJP-NDA) एक बार फिर दरभंगा विधानसभा सीट जीतकर अपना गढ़ बरकरार रखेंगे।