परिचय
मनिहारी विधानसभा क्षेत्र बिहार के कटिहार जिले में स्थित है और यह कटिहार लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है और इसकी राजनीतिक परंपरा तथा सामाजिक संरचना इसे बिहार के अन्य विधानसभा क्षेत्रों से विशिष्ट बनाती है। मनिहारी विधानसभा की स्थापना 1951 में हुई थी और इसके बाद से इस क्षेत्र में कई बार राजनीतिक बदलाव और महत्वपूर्ण चुनाव हुए हैं।
राजनीतिक इतिहास
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1952 में पहली बार यह सीट अस्तित्व में आई थी, जिसमें कांग्रेस की पार्वती देवी विजयी हुईं।
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शुरुआती वर्षों में समाजवादी शक्ति के अनेक नेता जैसे युवराज, राम सिपाही यादव, मुबारक हुसैन, विश्वनाथ सिंह यहां विधायक रहे।
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2008 के परिसीमन के बाद इस सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया।
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तब से मनोहर प्रसाद सिंह, जो कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं, लगातार 2010, 2015 और 2020 में इस सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं।
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मनोहर प्रसाद सिंह ने बिहार विधानसभा में स्वतंत्र और प्रभावशाली छवि बनाई है, उनके विरुद्ध कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
प्रमुख उम्मीदवार और दल
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कांग्रेस के मनोहर प्रसाद सिंह, जो इस क्षेत्र के लगातार विधायक हैं, इस बार भी प्रमुख दावेदार हैं।
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जदयू, भाजपा, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP), और अन्य क्षेत्रीय दल भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं।
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समाजवादी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव में भाग लेते रहे हैं।
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जातीय समीकरण यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जिसमें विशेषकर अनुसूचित जनजाति की संख्या महत्वपूर्ण है।
मतदान और चुनावी आंकड़े
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2020 के विधानसभा चुनाव में मनोहर प्रसाद सिंह ने लगभग 83,032 वोट हासिल कर जदयू के शंभु कुमार सुमन को 21,209 वोटों से हराया।
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2020 में कुल मतदान 45.81% था, जो अपेक्षाकृत मध्यम स्तर पर रहा।
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पुराने चुनावों का आंकड़ा भी दिखाता है कि यहां मुकाबला कड़ा और प्रतिस्पर्धात्मक होता है।
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मनिहारी की सामाजिक और जातीय विविधता के कारण मतदाता का समर्थन व्यापक और परिवर्तनशील रहता है।
मुख्य चुनावी मुद्दे
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बुनियादी सुविधाओं में सुधार: बिजली, सड़क, जल आपूर्ति और शिक्षा पर मतदाताओं की मांग।
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रोजगार especially युवाओं के लिए और कृषि से जुड़े मुद्दे।
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अनुसूचित जनजाति के अधिकार, सामाजिक न्याय, और विकास योजनाएं।
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स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के उपाय।
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जातीय संतुलन और विवाद के न्यूनिकरण की अपेक्षा।
आगामी बिहार चुनाव 2025 में मनिहारी की भूमिका
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2025 का बिहार चुनाव इस क्षेत्र में भी कड़ा होगा, जहां कांग्रेस की पकड़ पर अन्य दल चुनौती पेश करेंगे।
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बीजेपी और जदयू गठबंधन के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय दल अपनी मजबूती बढ़ा रहे हैं।
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मतदाता की सक्रिय भागीदारी और विकास मुद्दों पर ध्यान केंद्रित चुनाव का निष्कर्ष तय करेगा।
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यह सीट बिहार की राजनीति में अनुसूचित जनजाति के मतों का महत्त्वपूर्ण केंद्र है।
पिछले चुनाव परिणामों का सारांश
| वर्ष | विजेता उम्मीदवार | पार्टी | वोट संख्या | वोट प्रतिशत | मुख्य प्रतिद्वंद्वी | वोट संख्या | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | मनोहर प्रसाद सिंह | कांग्रेस | 83,032 | 45.81% | शंभु कुमार सुमन (जदयू) | 61,823 | 34.11% |
| 2015 | मनोहर प्रसाद सिंह | कांग्रेस | 61,704 | 39% | अनिल कुमार उरांव (LJP) | 48,024 | 30% |
| 2010 | मनोहर प्रसाद सिंह | जदयू | 44,938 | 36% | गीता किष्कु (NCP) | 40,773 | 32% |
निष्कर्ष
मनिहारी विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां अनुसूचित जनजाति की बड़ी आबादी के कारण सामाजिक-राजनीतिक समीकरण जटिल हैं। मनोहर प्रसाद सिंह के लगातार तीन जीत इस क्षेत्र में कांग्रेस के स्थिर आधार को दर्शाता है, लेकिन अन्य दल कड़ी चुनौती दे रहे हैं। आगामी बिहार चुनाव 2025 में मतदाता के रुख, विकास के मुद्दे और सामाजिक न्याय के प्रति दलों की प्रतिबद्धता इस सीट के चुनावी परिणाम का निर्धारण करेगी।
यह जानकारी मनिहारी विधानसभा क्षेत्र के चुनाव इतिहास, प्रमुख राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, चुनावी आंकड़ों, मुख्य चुनावी मुद्दों और आगामी बिहार चुनाव 2025 की व्यापक समीक्षा प्रस्तुत करती है।
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