मोकामा विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में हुए दुलारचंद यादव हत्या कांड ने बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में भारी सियासी हलचल मचा दी है। इस मामले में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उम्मीदवार और पूर्व विधायक अनंत सिंह सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। कोर्ट ने अनंत सिंह को इस मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में पटना के बेऊर जेल भेज दिया है।

दुलारचंद यादव हत्याकांड का विवरण

दुलारचंद यादव, जो जनसुराज पार्टी के समर्थक थे और मोकामा विधानसभा क्षेत्र से जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी का प्रचार कर रहे थे, उनकी हत्या 30 अक्टूबर को हुई। शुरुआती रिपोर्ट्स में यह बताया गया कि उनकी मौत गोली लगने से हुई है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खुलासा किया कि उनकी मौत का मुख्य कारण छाती पर वाहन के चढ़ने से लगी गंभीर चोटें थीं। पोस्टमार्टम में यह भी पाया गया कि उनके ऊपरी हिस्से पर कई फ्रैक्चर थे और फेफड़े फट गए, जिससे वे मौत के घाट उतरे। यह घटना बाढ़ क्षेत्र के बेढना गांव के पास हुई, जो मोकामा विधानसभा क्षेत्र में आता है।

गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई

अंतः कार्रवाई के तहत, पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में 150 से अधिक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों ने देर रात में अनंत सिंह और उनके सहयोगियों को मोकामा और ग्रामीण पटना के बाढ़ क्षेत्र से गिरफ्तार किया। साथ ही, अन्य आरोपियों माणिकांत ठाकुर और रणजीत राम को भी हिरासत में लिया गया। अनंत सिंह को तुरंत पूछताछ के लिए पटना लाया गया।

पुलिस ने एफएसएल टीम के साथ मिलकर घटनास्थल का पूरी गहनता से सर्वेक्षण किया। इस दौरान रेलवे पटरियों के पास अनियमित रूप से रखे गए पत्थर भी मिले, जो स्वाभाविक नहीं थे। यह भी जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिससे साजिश की आशंका जताई जा रही है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

दुलारचंद यादव की हत्या से मोकामा में जातीय तनाव भी पैदा हो गया है। इन घटनाओं ने क्षेत्र की राजनीतिक जमीनी स्थिति को भी प्रभावित किया है। पुलिस ने 80 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर जांच की गहनता बढ़ा दी है। गौरतलब है कि दुलारचंद यादव खुद पूर्व में कई आपराधिक मामलों, जैसे हत्या, रंगदारी, और आर्म्स एक्ट समेत कई संगीन धाराओं के तहत आरोपी थे।

अनंत सिंह का बयान और कोर्ट का फैसला

गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताते हुए कहा, “सत्यमेव जयते! मुझे मोकामा की जनता पर पूरा भरोसा है। अब यह चुनाव मोकामा की जनता लड़ेगी।” उन्होंने इस मामले में न्याय की कठोर मांग भी की और कहा कि आरोपी लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा मिले।

कोर्ट में पेशी के दौरान, पटना की अदालत ने अनंत सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। उन्हें बेऊर जेल भेजा गया है। साथ ही, अन्य आरोपियों को भी अदालत में पेश किया गया है।

बिहार में प्रशासन और चुनाव आयोग की कार्रवाई

मोकामा हत्याकांड के बाद बिहार पुलिस प्रशासन ने तत्काल कड़े कदम उठाए। पटना ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग को इस मामले में हटाया गया और संबंधित 12 एसडीएम, 12-1 एसडीपीओ, और 12-2 एसडीपीओ के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।

चुनाव आयोग ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आचार संहिता का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी है और बोला है कि चुनावी हिंसा और हथियारबंद आतंकियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया जाएगा।

संदिग्धों के बीच वैमनस्य और स्थानीय प्रभाव

मोकामा क्षेत्र में दुलारचंद यादव और अनंत सिंह के बीच वर्षों पुराना वैमनस्य रहा है। दोनों के समर्थकों के बीच तनाव भी अक्सर बढ़ता रहा है। इस हत्या कांड में इसी पुराने विवाद को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस घटना ने सामाजिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर मोकामा विधानसभा क्षेत्र की स्थिति को अस्थिर कर दिया है।

व्यापक जांच और स्थिति नियंत्रण

मोकामा हत्या मामले की जांच सीआईडी ​​के उच्च अधिकारियों की निगरानी में हो रही है। जांचकर्ताओं ने लगभग पूरे इलाके का ड्रोन सर्वे, फोरेंसिक जांच और संदिग्धों से पूछताछ की है। पुलिस ने पूरे क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।

जनसुराज पार्टी की प्रतिक्रिया

जनसुराज पार्टी ने इस मामले में कहा है कि दुलारचंद यादव की हत्या ने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर इस हत्या का आरोप लगाया है। वहीं विपक्षी राजनीतिक दल इसे राजनीतिक साजिश और चुनावी दबाव के तौर पर देख रहे हैं।

निष्कर्ष

मोकामा विधानसभा क्षेत्र में हुई दुलारचंद यादव की हत्या ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के माहौल को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। इस हत्या कांड में जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह समेत कई लोगों की गिरफ्तारी और कोर्ट द्वारा 14 दिन की न्यायिक हिरासत का आदेश प्रशासन और राजनीति दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

इस घटना ने न केवल इलाके की राजनीति को अस्थिर किया है, बल्कि बिहार में चुनावी सुरक्षा, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आगामी दिनों में इस मामले की जांच और कोर्ट की कार्यवाही चुनावी नतीजों को भी प्रभावित कर सकती है।

यह कहना ठीक होगा कि मोकामा हत्याकांड ने बिहार की राजनीतिक और सामाजिक संस्कृति में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है, जहाँ कानून का राज और चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता के लिए कड़ी निगरानी आवश्यक हो गई है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *