1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला

गठबंधन/पार्टी संभावित उम्मीदवार स्थिति और पृष्ठभूमि
NDA (JD(U)) कौशल किशोर (वर्तमान विधायक) मौजूदा विधायक, 2020 के विजेता। सत्यदेव नारायण आर्य के बेटे भी हो सकते हैं, जिनका यहाँ 8 बार का रिकॉर्ड रहा है।
महागठबंधन (Congress/RJD) रवि ज्योति कुमार (या कोई नया चेहरा) 2020 के उपविजेता (कांग्रेस से)। 2015 में JDU से जीते थे।

 

2️⃣ 🏆 कौशल किशोर (JD(U)/NDA) की जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)

NDA उम्मीदवार कौशल किशोर (या JD(U) से कोई अन्य उम्मीदवार) की जीत की संभावनाएँ निम्नलिखित कारणों पर टिकी हैं:

  • नीतीश कुमार का ‘गृह जिला’ प्रभाव: राजगीर सीट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा का हिस्सा है। पिछले दो दशकों में राजगीर में हुए बुनियादी ढाँचे के विकास (अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स एकेडमी, नेचर सफारी, पुलिस एकेडमी, पर्यटन विकास) का श्रेय सीधे तौर पर नीतीश कुमार को जाता है। यह फैक्टर JD(U) के लिए मजबूत पक्ष है।
  • कुर्मी और SC/EBC का गठजोड़: राजगीर एक SC आरक्षित सीट है, जहाँ अनुसूचित जाति (SC) के मतदाताओं की आबादी 25% से अधिक है। इसके अलावा, कुर्मी (नीतीश का कोर वोट) और यादव मतदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। JD(U) को नीतीश कुमार के माध्यम से कुर्मी-कोइरी और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) का मजबूत समर्थन मिलता है, जो जीत का आधार बनता है।
  • लगातार जीत का दबदबा: 2015 और 2020 में यह सीट JD(U) ने जीती है और पार्टी यहाँ हैट्रिक लगाने की तैयारी में है। 2020 में JD(U) ने कांग्रेस के उम्मीदवार को 16,048 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।2
  • लोकसभा 2024 में बढ़त: 2024 के लोकसभा चुनाव में भी JD(U) ने इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।

 

3️⃣ ❌ महागठबंधन (Congress/RJD) की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य)

महागठबंधन (संभावित उम्मीदवार रवि ज्योति कुमार या कोई नया चेहरा) के लिए राजगीर सीट जीतना मुश्किल है:

  • कमजोर SC/EBC पैठ: SC आरक्षित सीट होने के बावजूद, महागठबंधन (मुख्यतः RJD) को दलित (SC) और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) में उस स्तर का समर्थन नहीं मिल पाता जो JD(U) को मिल रहा है। ‘माई’ (मुस्लिम+यादव) समीकरण यहाँ पर्याप्त नहीं है, खासकर तब जब यादव मतदाताओं की संख्या कुर्मी से कम है।
  • विकास कार्यों का प्रभाव: राजगीर को एक पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने के नीतीश कुमार के प्रयासों को स्थानीय लोगों में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है। महागठबंधन के लिए इन विकास कार्यों को नकारना कठिन होगा।
  • उम्मीदवार की अस्थिरता (उपविजेता के लिए): 2015 में रवि ज्योति कुमार ने JD(U) से जीता था, लेकिन 2020 में कांग्रेस के टिकट पर हार गए। यह दर्शाता है कि पार्टी निष्ठा और गठबंधन का आधार यहाँ व्यक्तिगत छवि से अधिक महत्वपूर्ण है। महागठबंधन के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय SC चेहरा लाना बड़ी चुनौती है।
  • ग्रामीण-शहरी विभाजन: राजगीर मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है (शहरी मतदाता केवल 16%)।3 ग्रामीण मतदाताओं पर अक्सर सरकारी योजनाओं और जातिगत गठजोड़ों का सीधा असर होता है, जिसमें NDA गठबंधन की पकड़ मजबूत है।

     


 

4️⃣ निर्णायक फैक्टर: दलित वोट का झुकाव

  • दलित और EBC वोट बैंक: चूँकि यह SC आरक्षित सीट है, SC और EBC मतदाताओं का झुकाव निर्णायक साबित होगा। यदि महागठबंधन (RJD/Congress) बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर SC/EBC मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को अपने पाले में लाने में सफल होता है, तो वह NDA को कड़ी टक्कर दे सकता है।
  • तेजस्वी की रैली और आकर्षण: युवा नेता तेजस्वी यादव की रैलियाँ और ‘नौकरी’ का वादा ग्रामीण युवाओं को आकर्षित करने की क्षमता रखता है। यदि यह आकर्षण SC और EBC युवाओं के वोट में तब्दील हो जाता है, तो JD(U) की राह मुश्किल हो सकती है।
  • अंदरूनी कलह (NDA): यदि NDA गठबंधन में (JDU और BJP के बीच) सीट को लेकर या उम्मीदवार के चयन को लेकर कोई असंतोष या आंतरिक विद्रोह होता है, तो इसका सीधा फायदा महागठबंधन को मिल सकता है।

निष्कर्ष: उपलब्ध विश्लेषण और पिछले चुनाव परिणामों के आधार पर, JD(U) (NDA) की राजगीर सीट पर पकड़ सबसे मजबूत बनी हुई है। नीतीश कुमार के विकास मॉडल और SC/EBC/कुर्मी वोटों के मजबूत गठजोड़ के कारण JD(U) उम्मीदवार की जीत की संभावनाएँ अधिक हैं। महागठबंधन को यहाँ जीत हासिल करने के लिए SC मतदाताओं के बड़े हिस्से को अपनी ओर आकर्षित करना होगा, जो एक कठिन कार्य है।

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