लालगंज विधानसभा सीट (संख्या 124) वैशाली जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जिस पर 2020 में बीजेपी के संजय कुमार सिंह ने 26,299 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है क्योंकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक नई और युवा उम्मीदवार शिवानी शुक्ला (पूर्व बाहुबली विधायक मुन्ना शुक्ला की बेटी) को मैदान में उतारा है। यह चुनाव मुख्य रूप से वर्तमान विधायक और मुन्ना शुक्ला के परिवार की राजनीतिक विरासत के बीच सीधी लड़ाई है।

यहां 2025 के संभावित विजेता और उसका विस्तृत विश्लेषण हिंदी में प्रस्तुत है:


संभावित विजेता: संजय कुमार सिंह (भारतीय जनता पार्टी – BJP) / राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)

(यह भविष्यवाणी BJP के मजबूत सवर्ण और गैर-यादव OBC कोर वोट बैंक तथा 2020 के बड़े जीत के अंतर को देखते हुए की गई है।)

जीत के मुख्य कारण और विश्लेषण (फेवर में जाने वाले तथ्य)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
वोटों का स्पष्ट ध्रुवीकरण और बड़ा जीत का अंतर 2020 में, संजय कुमार सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी (कांग्रेस के राकेश कुमार) को 26,299 वोटों के भारी अंतर से हराया था। यह अंतर NDA के मजबूत कोर वोट बैंक (राजपूत, सवर्ण, गैर-यादव ओबीसी) को दर्शाता है।
बीजेपी का मजबूत सामाजिक आधार लालगंज में राजपूत, भूमिहार और गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं का बड़ा हिस्सा BJP के पक्ष में मजबूती से खड़ा रहता है। संजय कुमार सिंह की उम्मीदवारी से राजपूत वोट एकमुश्त NDA को मिलेंगे।
मुन्ना शुक्ला फैक्टर का विभाजनकारी होना RJD की उम्मीदवार शिवानी शुक्ला भूमिहार समुदाय से हैं और पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला के परिवार से आती हैं। इससे भूमिहार वोट बैंक RJD और NDA के बीच विभाजित हो सकता है। यदि मुन्ना शुक्ला का कोर वोट RJD के पक्ष में आता भी है, तो यह पारंपरिक NDA वोट बैंक में सेंध लगाएगा, लेकिन RJD को एकतरफा जीत नहीं दिला पाएगा।
चिराग पासवान का समर्थन यह सीट हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां चिराग पासवान (LJP-R) का मजबूत प्रभाव है। पासवान (SC) मतदाताओं (करीब 21%) का बड़ा हिस्सा NDA उम्मीदवार को मजबूती देगा, जो RJD के M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण को कमजोर करेगा।
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएँ विधायक संजय सिंह के कार्यकाल में क्षेत्र में हुए विकास कार्य (जैसे बोधगया-वैशाली एक्सप्रेस-वे की मंजूरी, नगर परिषद का दर्जा, अनुमंडल पुलिस मुख्यालय की स्थापना) NDA के पक्ष में माहौल बनाने में मदद करेंगे।

अन्य उम्मीदवार (शिवानी शुक्ला/RJD/महागठबंधन) के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
मुन्ना शुक्ला परिवार की ‘विरासत की राजनीति’ पर सवाल शिवानी शुक्ला एक युवा और नई उम्मीदवार हैं, लेकिन उनके पिता और माँ (मुन्ना शुक्ला और अन्नु शुक्ला) दोनों ही इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। मतदाताओं का एक वर्ग पारंपरिक परिवार-आधारित राजनीति से हटकर नए नेतृत्व की तलाश में हो सकता है।
कांग्रेस के पूर्व वोट बैंक का RJD को पूरी तरह न मिलना 2020 में, कांग्रेस के राकेश कुमार दूसरे स्थान पर थे। RJD को जीत के लिए कांग्रेस के उस पारंपरिक सवर्ण/गैर-यादव वोट को अपनी तरफ खींचना होगा, जो मुश्किल है, क्योंकि RJD का मुख्य आधार M-Y (यादव-मुस्लिम) है।
M-Y समीकरण की अपर्याप्तता लालगंज में यादव, मुस्लिम, राजपूत और भूमिहार वोटरों की चलती है। RJD का कोर यादव-मुस्लिम वोट बैंक (करीब 8.3% मुस्लिम और बड़ी संख्या में यादव) जीत के लिए पर्याप्त नहीं है, खासकर जब भूमिहार/राजपूत/पासवान वोट एकजुट हों। RJD उम्मीदवार को गैर-यादव OBC और दलित वोटों में बड़ी सेंध लगानी होगी।
महागठबंधन में आंतरिक टकराव 2025 में, कुछ रिपोर्टों के अनुसार, लालगंज सीट पर RJD और कांग्रेस के बीच भी उम्मीदवार थे, जो बाद में RJD के पक्ष में वापस ले लिए गए (हालांकि RJD ने शिवानी शुक्ला को मैदान में उतारा)। इस तरह की शुरुआती गठबंधन खींचतान जमीन पर कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद पैदा कर सकती है।

निष्कर्ष:

लालगंज सीट पर NDA की स्थिति मजबूत बनी हुई है। BJP के संजय कुमार सिंह की जीत की संभावना अधिक है, क्योंकि उनके पास मजबूत सवर्ण/राजपूत, गैर-यादव OBC और LJP के समर्थन से पासवान वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा है।

RJD की शिवानी शुक्ला एक मजबूत चुनौती पेश कर सकती हैं। उनकी जीत तभी संभव है जब वह मुन्ना शुक्ला की व्यक्तिगत अपील का उपयोग करके भूमिहार वोटों में एक बड़ी दरार पैदा करें, और साथ ही यादव-मुस्लिम कोर वोट बैंक को बरकरार रखते हुए पासवान और अति पिछड़े वर्ग (EBC) के वोटों में उल्लेखनीय सेंध लगाएं। अन्यथा, 2020 के भारी अंतर को पाटना RJD के लिए बहुत मुश्किल होगा।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *