बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सहरसा विधानसभा सीट (Saharsa Assembly Constituency) का मुकाबला एक बार फिर हाई-प्रोफाइल और कांटे की टक्कर वाला होगा। यह सीट पिछले कई चुनावों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कब्ज़े में रही है, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) भी इसे जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाती रही है।

संभावित विजेता: आलोक रंजन (भारतीय जनता पार्टी – BJP)

सहरसा सीट पर वर्तमान विधायक और भाजपा के उम्मीदवार आलोक रंजन की जीत की संभावना अधिक है। उन्होंने 2020 में भी यह सीट बड़े अंतर से जीती थी।


आलोक रंजन (BJP) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:

  1. भाजपा का गढ़ और वैश्य/ब्राह्मण समीकरण:
    • सहरसा सीट 2005 से ही भाजपा के वर्चस्व वाली रही है (केवल 2015 को छोड़कर)। यह शहरी और अर्ध-शहरी बहुल सीट भाजपा के पारंपरिक वैश्य और ब्राह्मण मतदाताओं का मजबूत केंद्र है।
    • 2020 में, आलोक रंजन ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की लवली आनंद को 19,679 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। यह अंतर मजबूत व्यक्तिगत पकड़ और संगठनात्मक शक्ति को दर्शाता है।
  2. NDA गठबंधन की शक्ति:
    • 2025 में NDA गठबंधन में BJP, JDU और LJP (R) का मजबूत समन्वय रहने की संभावना है। BJP के पारंपरिक उच्च जाति/वैश्य वोटों के साथ JDU के अति-पिछड़ा वर्ग (EBC) के वोटों का जुड़ना आलोक रंजन को एक बड़ी बढ़त दिलाएगा।
  3. विकास का दावा और शहरी मतदाताओं का रुझान:
    • विधायक आलोक रंजन और BJP ‘विकास’ और ‘डबल इंजन सरकार’ के नाम पर वोट मांगते हैं। सहरसा में मेडिकल कॉलेज, नगर निगम का दर्जा, और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ शहरी और शिक्षित मतदाताओं को प्रभावित करता है, जिनका रुझान आमतौर पर भाजपा की ओर रहता है।
  4. लगातार जीत का ट्रैक रिकॉर्ड:
    • आलोक रंजन इस सीट से 2010 और 2020 में जीत दर्ज कर चुके हैं, जो उनके व्यक्तिगत जनाधार और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता को सिद्ध करता है।

विपक्षी उम्मीदवार (महागठबंधन/RJD) के हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:

महागठबंधन से मुख्य उम्मीदवार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लवली आनंद या कोई अन्य मजबूत चेहरा हो सकता है (लवली आनंद अब JDU में शामिल हो गई हैं, लेकिन यहाँ उनके पिछले चुनाव प्रदर्शन का विश्लेषण महत्वपूर्ण है)। 2020 में लवली आनंद ने RJD के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

  1. MY (मुस्लिम-यादव) फैक्टर को काउंटर:
    • सहरसा में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 14.6% है और यादव मतदाता भी महत्वपूर्ण संख्या में हैं, जो RJD का कोर वोट बैंक है। हालांकि, यह समीकरण भाजपा के मजबूत उच्च जाति (ब्राह्मण) और वैश्य वोट बैंक के सामने अक्सर कमजोर पड़ जाता है।
  2. RJD की ओर से मजबूत भूमिहार चेहरे का अभाव (ऐतिहासिक):
    • लवली आनंद के RJD छोड़ने के बाद, यदि RJD किसी कमजोर या नए चेहरे को मैदान में उतारती है, तो वह भाजपा के स्थापित आधार को चुनौती नहीं दे पाएगा।
    • 2020 परिणाम: लवली आनंद (RJD) को 1,03,538 वोटों के मुकाबले 83,859 वोट मिले थे, यानी लगभग 19,679 वोटों का अंतर था। यह अंतर बताता है कि MY फैक्टर अकेले यह सीट जीतने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसे अति-पिछड़ा वर्ग या अन्य जातियों का अतिरिक्त समर्थन चाहिए, जो NDA आसानी से खींच लेती है।
  3. लवली आनंद का दल-बदल:
    • यदि लवली आनंद (जो पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी हैं) अब NDA में शामिल हो गई हैं या उनकी पार्टी NDA का हिस्सा बन गई है, तो RJD को एक नया और मजबूत उम्मीदवार तलाशना होगा। यदि महागठबंधन की ओर से कोई नया चेहरा आता है, तो उसे अपनी पहचान स्थापित करने और BJP के गढ़ में पैठ बनाने में कठिनाई होगी।

निष्कर्ष और पूर्वानुमान:

सहरसा विधानसभा सीट पर मुकाबला कड़ा होगा, क्योंकि RJD का संगठित MY फैक्टर हमेशा एक मजबूत चुनौती पेश करता है। हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आलोक रंजन के पास इस सीट को जीतने के लिए अधिक मजबूत आधार है। उनका व्यक्तिगत जनाधार, भाजपा का संगठनात्मक बल, NDA गठबंधन की एकजुटता और क्षेत्र में शहरी मतदाताओं का रुझान उन्हें निर्णायक बढ़त देगा।

पूर्वानुमान: मजबूत NDA गठबंधन के कारण, सहरसा सीट एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आलोक रंजन के पक्ष में जा सकती है।

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