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सिकटा का चुनावी संग्राम: वामपंथ का ‘किलेदार’ या ‘बाहुबली पुत्र’ एनडीए की वापसी कराएगा?

परिणाम की भविष्यवाणी:

सिकटा विधानसभा सीट पर एक अत्यंत कड़ा और त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। मौजूदा राजनीतिक समीकरण और गठबंधन की बदलती तस्वीर को देखते हुए, महागठबंधन (Mahagathbandhan) के उम्मीदवार और वर्तमान विधायक, सीपीआई (एमएल) (लिबरेशन) के वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता के अपनी सीट बचाने की अधिक संभावना है।

उनका मुख्य मुकाबला एनडीए (NDA) के उम्मीदवार, जेडीयू के समृद्ध वर्मा से होगा, जिनके पिता दिलीप वर्मा इस सीट से पाँच बार विधायक रह चुके हैं।


 

I. सीपीआई (एमएल) के वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)

वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता (सीपीआई-एमएल) की जीत की संभावना को मजबूती देने वाले प्रमुख विश्लेषणात्मक कारक निम्नलिखित हैं:

1. एम-वाई + वामपंथ का ठोस आधार

2. 2020 की जीत का मनोवैज्ञानिक लाभ

3. स्थानीय मुद्दे और किसान-मजदूर की सहानुभूति


 

II. एनडीए (जेडीयू/समृद्ध वर्मा) की हार के विपक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य)

जेडीयू/एनडीए उम्मीदवार समृद्ध वर्मा (या कोई अन्य एनडीए उम्मीदवार) की जीत की संभावनाओं को कम करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:

1. एनडीए के भीतर टिकट को लेकर खींचतान

2. जातीय समीकरणों का असंतुलन

3. मजबूत गठबंधन बनाम बिखराव का खतरा

4. युवा चेहरा और अनुभव की कमी

निष्कर्ष: सिकटा की लड़ाई मुख्य रूप से महागठबंधन के वामपंथी आधार और एम-वाई समीकरण बनाम एनडीए के मजबूत कोर वोट और बाहुबली परिवार के प्रभाव के बीच है। एनडीए में टिकट की खींचतान, मजबूत एम-वाई समीकरण और वामपंथी पार्टी के सक्रिय कैडर के कारण, वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता के सिकटा में अपनी जीत दोहराने और महागठबंधन के लिए यह सीट बरकरार रखने की प्रबल संभावना है। मुकाबला बहुत करीबी होगा।

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