बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अररिया जिले की सिकटी (Sikti) विधानसभा सीट पर वर्तमान रुझानों और पिछले परिणामों के विश्लेषण के आधार पर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार और वर्तमान विधायक विजय कुमार मंडल (BJP) के जीतने की प्रबल संभावना है।
यह सीट बीजेपी का मजबूत गढ़ बन चुकी है और महागठबंधन (RJD) के लिए इसे छीनना एक बड़ी चुनौती है।
विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA उम्मीदवार – विजय कुमार मंडल, BJP)
सिकटी सीट पर विजय कुमार मंडल (BJP) की संभावित जीत के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. मजबूत व्यक्तिगत और पार्टीगत पकड़ (हैट्रिक की तैयारी):
- लगातार जीत का रिकॉर्ड: विजय कुमार मंडल इस सीट से लगातार दो बार (2015 और 2020) विधायक हैं और अब हैट्रिक लगाने की तैयारी में हैं। इससे उनकी स्थानीय लोकप्रियता और संगठन पर मजबूत पकड़ साबित होती है।
- सत्ता का लाभ: वह वर्तमान में बिहार सरकार में आपदा प्रबंधन मंत्री भी हैं। मंत्री होने के नाते उन्होंने क्षेत्र में जो विकास कार्य कराए हैं, उसका सीधा लाभ उन्हें मिलेगा।
- NDA की एकता: NDA गठबंधन में BJP, JDU और अन्य दलों की मजबूत एकता है, जो उनके पक्ष में हिंदू और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के वोटों को एकजुट करती है।
2. जातीय समीकरणों का समर्थन:
- अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) का बड़ा वोट बैंक: विजय कुमार मंडल स्वयं केवट जाति से आते हैं, जो अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) में आती है। सिकटी क्षेत्र में EBC मतदाताओं की अच्छी संख्या है, जो NDA का कोर वोट बैंक माना जाता है।
- उच्च जाति और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण: राष्ट्रीय मुद्दों, केंद्र और राज्य सरकार के कार्यों के कारण उच्च जाति के वोटों और गैर-यादव पिछड़ी जातियों के वोटों का बड़ा हिस्सा सीधे BJP के पक्ष में आता है, जिससे उनकी जीत का आधार मजबूत होता है।
3. पिछले चुनावों में बड़ी जीत का अंतर:
- 2020 का प्रदर्शन: 2020 के चुनाव में, मंडल ने RJD के शत्रुघ्न प्रसाद सुमन को 13,610 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। यह अंतर दर्शाता है कि यह सीट बीजेपी के लिए सुरक्षित सीटों में गिनी जाती है, जिसे पलटना महागठबंधन के लिए आसान नहीं होगा।
विपक्षी दल की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (महागठबंधन उम्मीदवार – शत्रुघ्न प्रसाद सुमन, RJD)
सिकटी सीट पर शत्रुघ्न प्रसाद सुमन (RJD) की संभावित हार और उनकी जीत में बाधा बनने वाले मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. लगातार हार का मनोवैज्ञानिक दबाव:
- दो बार की हार: शत्रुघ्न प्रसाद सुमन लगातार दो बार (2015 और 2020) विजय कुमार मंडल से चुनाव हार चुके हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाता है और मतदाताओं के बीच ‘हारने वाले उम्मीदवार’ की धारणा मजबूत करता है।
- जीत के अंतर में कमी नहीं: 2020 में भी वह एक बड़े अंतर (13 हजार से अधिक वोट) से हारे थे, जो यह दर्शाता है कि वह विजय मंडल के मजबूत स्थानीय प्रभाव को तोड़ नहीं पाए हैं।
2. मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण की अपर्याप्तता:
- विपक्षी वोट बैंक: RJD की जीत पूरी तरह से मुस्लिम और यादव मतदाताओं के एकीकरण पर निर्भर करती है।
- अन्य जातीय समूहों का ध्रुवीकरण: सिकटी में EBC, SC और अन्य पिछड़ी/उच्च जातियों का मजबूत आधार है, जो NDA के पक्ष में एकजुट होता है। RJD का MY समीकरण, अन्य मजबूत जातीय समूहों के NDA के पक्ष में ध्रुवीकरण के कारण अक्सर जीत के लिए अपर्याप्त हो जाता है।
- AIMIM का प्रभाव: सीमांचल क्षेत्र होने के कारण, यदि असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM या जन सुराज (जिसने सिकटी से रागिब बाबलू को उम्मीदवार बनाया है) जैसे दल मैदान में रहते हैं, तो वे RJD के मुस्लिम वोटों में सेंध लगा सकते हैं, जिससे NDA की जीत और आसान हो जाएगी।
3. स्थानीय मुद्दों पर असफलता:
- स्थानीय मुद्दा (बाढ़/कटाव): सिकटी विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा बाढ़ और कटाव है। RJD विपक्ष में रहते हुए भी इन समस्याओं का कोई ठोस समाधान पेश नहीं कर पाई है, न ही वह सत्ताधारी मंत्री की ‘विकास’ की छवि को सफलतापूर्वक चुनौती दे पाई है।
निष्कर्ष:
सिकटी विधानसभा सीट पर मुकाबला NDA (BJP) और महागठबंधन (RJD) के बीच कड़ा होगा, लेकिन जीत की बाजी विजय कुमार मंडल के हाथ लग सकती है। उनका लगातार जीत का रिकॉर्ड, मंत्री के रूप में विकास की छवि, और गैर-मुस्लिम/EBC वोटों का मजबूत ध्रुवीकरण उन्हें एक स्पष्ट बढ़त देता है। RJD के लिए वापसी करना तब तक बेहद मुश्किल होगा, जब तक कि वह अपने MY समीकरण को पूरी तरह एकजुट नहीं कर लेती और NDA के वोटों में कोई बड़ी सेंध नहीं लगा पाती।