सुल्तानगंज विधानसभा सीट: एक विश्लेषणात्मक संभावना (2025)
सुल्तानगंज विधानसभा सीट पर 2025 में मुख्य मुकाबला जनता दल यूनाइटेड (JDU), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के बीच त्रिकोणीय होने की संभावना है। जातीय समीकरण और JDU का लगातार जीत का इतिहास यहाँ जीत-हार तय करेगा।
वर्तमान रुझानों और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए, महागठबंधन के वोट बँटने के बावजूद, JDU के उम्मीदवार की जीत की संभावना सबसे अधिक है, क्योंकि यह सीट पिछले दो दशक से JDU का अभेद्य किला रही है।
संभावित विजेता उम्मीदवार: NDA गठबंधन के उम्मीदवार (JDU के ललित नारायण मंडल)
NDA गठबंधन के उम्मीदवार (JDU के वर्तमान विधायक ललित नारायण मंडल)2 की जीत की मजबूत संभावना है।
| जीत के पक्ष में मजबूत विश्लेषण और तथ्य |
| 1. अभेद्य JDU का गढ़ (सीट की विरासत): सुल्तानगंज सीट को 2005 से ही JDU का गढ़ माना जाता है। 2000 में भी समता पार्टी (जो बाद में JDU बनी) ने यहाँ जीत हासिल की थी। लगातार जीत का यह क्रम दर्शाता है कि स्थानीय मतदाता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और JDU के स्थानीय नेतृत्व पर गहरा भरोसा करते हैं। |
| 2. महागठबंधन के वोटों का विभाजन: 2020 में JDU के ललित नारायण मंडल ने INC के ललन कुमार को हराया था। 2025 में महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग न होने या कांग्रेस/RJD के अलग-अलग उम्मीदवार होने के कारण मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक और कांग्रेस के पारंपरिक वोटों का सीधा विभाजन होगा। इसका सीधा फायदा JDU उम्मीदवार को मिलेगा। |
| 3. ‘कुर्मी-धानुक-गंगोता’ (EBC) पर पकड़: JDU का मुख्य आधार ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) रहा है। सुल्तानगंज में कुर्मी, धानुक और गंगोता (EBC) मतदाताओं की अच्छी संख्या है, जो JDU की जीत का मजबूत आधार बनती है। |
| 4. पिछली जीत का मजबूत अंतर (2020 का आँकड़ा): 2020 में JDU उम्मीदवार ने INC के उम्मीदवार को 11,565 वोटों (7.00% अंतर) से हराया था, जो भागलपुर जिले की अन्य करीबी सीटों के मुकाबले एक बड़ा और सुरक्षित अंतर माना जाता है। |
| 5. सवर्ण और दलित वोट बैंक का समर्थन: JDU को सवर्ण (भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत) और दलित (रविदास) मतदाताओं का भी अच्छा समर्थन मिलता है, खासकर जब मुकाबला RJD के साथ होता है। यह गठबंधन JDU की स्थिति को मजबूत करता है। |
विपक्षी उम्मीदवारों (RJD/INC) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी:
| RJD/INC उम्मीदवारों के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी |
| 1. RJD के उम्मीदवार होने से ‘MY’ वोट में फूट: अगर RJD अपना उम्मीदवार (जैसे चंदन कुमार) मैदान में उतारती है, तो यह महागठबंधन के लिए सबसे बड़ी कमजोरी होगी। यादव वोट (RJD को) और मुस्लिम वोट (कांग्रेस/RJD में विभाजित) होने से JDU के खिलाफ वोटों का प्रभावी ध्रुवीकरण नहीं हो पाएगा। |
| 2. कांग्रेस का लगातार हारना: कांग्रेस (ललन कुमार) 2020 में 7% के अंतर से हार गई थी। यदि पार्टी इस बार भी मैदान में उतरती है, तो उसकी जीत की संभावना तभी होगी जब RJD उम्मीदवार मैदान में न हो या RJD-INC के बीच वोटों का पूर्ण ट्रांसफर हो, जो त्रिकोणीय मुकाबले में असंभव है। |
| 3. ग्रामीण प्रधान सीट पर JDU की पैठ: सुल्तानगंज एक ग्रामीण प्रधान सीट है। ग्रामीण क्षेत्रों में नीतीश कुमार की विकास योजनाओं (जैसे सड़क, बिजली, जल) और सामाजिक समीकरणों पर आधारित राजनीति की पकड़ मजबूत रही है, जिसे तोड़ना विपक्ष के लिए मुश्किल होगा। |
| 4. स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा: RJD या INC के उम्मीदवारों के स्थानीय जुड़ाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं, जबकि JDU उम्मीदवार स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। |
निष्कर्ष:
सुल्तानगंज विधानसभा सीट पर NDA (JDU) को मुख्य रूप से महागठबंधन के वोट विभाजन से लाभ मिलेगा। JDU का मजबूत EBC आधार और संवर्ण/दलित वोटों का समर्थन, साथ ही लगातार जीत का इतिहास, इसे 2025 में भी जीतने के लिए सबसे मजबूत दावेदार बनाता है। विपक्ष की एकमात्र उम्मीद वोटों का बँटवारा रोकने या JDU विधायक के खिलाफ तीव्र सत्ता विरोधी लहर पैदा करने में निहित है, जिसकी संभावना कम दिखती है। JDU की जीत का अंतर पिछली बार के मुकाबले कम हो सकता है, लेकिन सीट उसके कब्जे में ही रहने की उम्मीद है।