सोनबरसा का चुनावी किला: क्या रत्नेश सदा लगाएंगे ‘चौका’ या महागठबंधन करेगा सेंध?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सहरसा जिले की सोनबरसा (अनुसूचित जाति-सुरक्षित) विधानसभा सीट का मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। यह सीट वर्तमान में जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के पास है, और यहां के विधायक रत्नेश सदा लगातार जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं।

संभावित विजेता: रत्नेश सदा (जनता दल-यूनाइटेड – JDU)

रत्नेश सदा इस सीट पर लगातार तीन बार (2010, 2015, 2020) जीत दर्ज कर चुके हैं और वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री भी हैं। उनकी यह चौथी संभावित जीत उन्हें इस सीट का सबसे मजबूत दावेदार बनाती है।


रत्नेश सदा (JDU) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:

  1. लगातार जीत की हैट्रिक (ट्रिपल इनकम्बेंसी):
    • रत्नेश सदा 2010, 2015 और 2020 में जीतकर इस क्षेत्र में अपनी मज़बूत व्यक्तिगत पकड़ साबित कर चुके हैं। लगातार तीन जीतें यह दर्शाती हैं कि उनका अपना एक व्यक्तिगत जनाधार (Personal Vote Base) और मतदाताओं के साथ मज़बूत जुड़ाव है।
  2. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘महादलित चेहरा’:
    • रत्नेश सदा को JDU, खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महादलित (पासवान, मुसहर आदि) वोट बैंक का एक प्रमुख चेहरा माना जाता है। महादलित समुदाय के लिए किए गए सरकारी कार्यों का सीधा फायदा उन्हें मिलता है।
  3. NDA गठबंधन की शक्ति:
    • 2025 में अगर JDU NDA गठबंधन (BJP, LJP (R) आदि) के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है, तो JDU के महादलित और अति-पिछड़ा वर्ग के वोटों के साथ-साथ BJP के सवर्ण और अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटों का समर्थन उन्हें एक बड़ी बढ़त दिलाएगा।
    • 2024 लोकसभा चुनाव में बड़ी बढ़त: 2024 के लोकसभा चुनाव में, JDU ने इस विधानसभा क्षेत्र में 38,108 वोटों की भारी बढ़त हासिल की थी, जो 2025 विधानसभा चुनाव के लिए NDA के पक्ष में एक बहुत बड़ा सकारात्मक संकेत है।
  4. महागठबंधन में आंतरिक खींचतान:
    • 2025 के लिए कांग्रेस ने इस सीट से सरिता देवी को उम्मीदवार बनाया है। यह सीट महागठबंधन के सीट बंटवारे को लेकर RJD और कांग्रेस के बीच खींचतान पैदा कर सकती है, जिसका सीधा लाभ JDU को मिलेगा।

विपक्षी उम्मीदवार (महागठबंधन/कांग्रेस) के हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:

सोनबरसा सीट पर महागठबंधन से मुख्य मुकाबला कांग्रेस की उम्मीदवार (संभावित रूप से सरिता देवी) या RJD/INC गठबंधन के किसी अन्य उम्मीदवार से होगा।

  1. वोटों के बिखराव का इतिहास:
    • 2020 में, रत्नेश सदा ने कांग्रेस के तारनी ऋषिदेव को 13,466 वोटों से हराया था। इससे पहले 2015 में, उन्होंने LJP (सरिता देवी) को 53,763 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।
    • 2020 में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के उम्मीदवार को मिले लगभग 8.1% वोटों ने NDA के वोट को प्रभावित किया था, जिससे जीत का अंतर कम हो गया। 2025 में, चिराग पासवान की पार्टी (LJP-R) NDA का हिस्सा हो सकती है, जिससे विपक्षी उम्मीदवार के लिए मुकाबला और कठिन हो जाएगा।
  2. व्यक्तिगत जनाधार की कमी:
    • विपक्षी उम्मीदवार को JDU के रत्नेश सदा जैसा लगातार तीन बार जीतने वाला व्यक्तिगत जनाधार बनाने में मुश्किल हो रही है। इस सुरक्षित सीट पर समुदाय विशेष के वोटों को अपनी ओर पूरी तरह से खींचना एक बड़ी चुनौती है।
  3. क्षेत्र में विकास न होने का आरोप:
    • यद्यपि रत्नेश सदा ने विकास के दावे किए हैं, लेकिन विपक्षी लगातार क्षेत्र में अपेक्षित विकास न होने का आरोप लगाते रहे हैं। हालाँकि, यह एंटी-इनकम्बेंसी, JDU के कोर वोट बैंक (महादलित और अति-पिछड़ा) पर कितना असर डालेगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। 2024 लोकसभा परिणाम से लगता है कि इसका प्रभाव कम है।

निष्कर्ष और पूर्वानुमान:

सोनबरसा (सुरक्षित) सीट पर JDU के रत्नेश सदा का पलड़ा भारी है। उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता, महादलितों पर नीतीश कुमार का प्रभाव, और 2024 लोकसभा चुनाव में NDA की बड़ी बढ़त इस बात की ओर इशारा करती है कि वे 2025 में अपनी चौथी जीत दर्ज कर सकते हैं। महागठबंधन (कांग्रेस) के लिए इस मजबूत किले में सेंध लगाना एक बड़ी चुनौती होगी, खासकर जब तक वे NDA के संगठित जातीय और सामाजिक समीकरण का तोड़ नहीं खोज लेते।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *