बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में, सीमांचल की सबसे महत्वपूर्ण किशनगंज (Kishanganj) विधानसभा सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। हालांकि, ऐतिहासिक आधार, वर्तमान विधायक का लाभ और मुस्लिम वोटों के अंतिम ध्रुवीकरण की संभावना को देखते हुए, महागठबंधन (कांग्रेस) के उम्मीदवार (वर्तमान विधायक इजहारूल हुसैन) की जीत की संभावना अधिक है, लेकिन जीत का अंतर बहुत कम रह सकता है।
यह सीट लगभग 68% मुस्लिम आबादी के कारण बेहद संवेदनशील है, और 2020 के परिणाम ने इसे त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया था।
विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन उम्मीदवार – इजहारूल हुसैन, INC)
किशनगंज सीट पर इजहारूल हुसैन (INC) की संभावित जीत के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. पारंपरिक और ऐतिहासिक कांग्रेस का गढ़:
- ऐतिहासिक प्रभुत्व: किशनगंज विधानसभा सीट पर 1952 से लेकर अब तक आठ बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। यह सीट लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है।
- वर्तमान विधायक का लाभ: इजहारूल हुसैन वर्तमान में विधायक हैं। 2020 के चुनाव में उन्होंने 61,078 वोट प्राप्त किए थे और भाजपा की स्वीटी सिंह को मात्र 1,381 वोटों के अंतर से हराया था। यह करीबी जीत दर्शाती है कि उनका व्यक्तिगत जनाधार मजबूत है।
- मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण: सीमांचल में कांग्रेस को RJD के MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण का भी समर्थन मिलता है। अंतिम समय में, मुस्लिम मतदाता अक्सर “गैर-NDA” उम्मीदवार को एकजुट होकर वोट देते हैं जो NDA को हराने की सबसे अच्छी स्थिति में हो। पारंपरिक रूप से कांग्रेस इस मापदंड पर खरी उतरती रही है।
2. 2020 में AIMIM के वोट शेयर में गिरावट:
- उपचुनाव बनाम आम चुनाव: 2019 के उपचुनाव में AIMIM के कमरुल होदा ने यह सीट जीती थी, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में वह 41,904 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इससे यह संकेत मिलता है कि मुस्लिम वोटों का एक बड़ा हिस्सा ‘स्थिरता’ और ‘बड़ा गठबंधन’ (कांग्रेस/महागठबंधन) के पक्ष में लौट आया था।
- AIMIM विधायकों का RJD में विलय: 2022 में AIMIM के चार विधायकों का RJD में विलय होने से, AIMIM की विश्वसनीयता और संगठनात्मक मजबूती पर कुछ सवाल उठे हैं, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।
अन्य उम्मीदवारों की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (NDA, AIMIM)
किशनगंज सीट पर अन्य उम्मीदवारों की जीत की राह में बाधा बनने वाले मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. NDA (BJP) उम्मीदवार (संभावित स्वीटी सिंह/शाहनवाज हुसैन)
- सीमित मुस्लिम समर्थन: मुस्लिम बहुल सीट होने के कारण, BJP/NDA उम्मीदवार को मुस्लिम समुदाय का बहुत कम वोट मिलता है। हिंदू वोटों के एकजुट होने पर भी, संख्या बल के आधार पर जीत सुनिश्चित करना मुश्किल होता है।
- करीबी हार का सिलसिला: BJP ने इस सीट पर कभी जीत हासिल नहीं की है, लेकिन वह लगातार मजबूत टक्कर देती रही है। 2010 में स्वीटी सिंह 264 वोट से और 2020 में 1,381 वोट से हारी थीं। यह करीबी अंतर AIMIM द्वारा मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने का परिणाम था।
- शाहनवाज हुसैन फैक्टर: यदि NDA शाहनवाज हुसैन जैसे मुस्लिम चेहरे को उतारता है, तो वे निश्चित रूप से कांग्रेस के मुस्लिम वोटों में सेंध लगाएंगे और साथ ही हिंदू वोट बैंक को पूरी तरह से एकजुट करने में मदद करेंगे। हालांकि, ऐतिहासिक रूप से, किशनगंज के मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार को निर्णायक समर्थन नहीं दिया है, जिससे NDA की जीत की संभावना कम ही रहेगी।
2. AIMIM उम्मीदवार (संभावित कमरुल होदा/अख्तरुल ईमान)
- वोट-कटवा की छवि: AIMIM (असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी) की सबसे बड़ी समस्या “वोट-कटवा” की छवि है। मुस्लिम मतदाता अंतिम समय में अक्सर यह सोचते हैं कि AIMIM को वोट देने से कहीं NDA उम्मीदवार न जीत जाए।
- कमजोर संगठन: 2020 में बड़े प्रदर्शन के बाद भी, AIMIM अपने जीते हुए विधायकों को बनाए नहीं रख पाई। इसका मतलब है कि जमीनी स्तर पर संगठनात्मक पकड़ कमजोर हुई है, जिससे उनका प्रदर्शन 2020 से भी खराब हो सकता है।
- मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का खतरा: AIMIM का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस/RJD के मुस्लिम वोट में सेंध लगाना होगा। यदि AIMIM 2020 की तरह 40,000+ वोट पाती है, तो यह सीधा लाभ BJP उम्मीदवार को पहुँचाएगा।
निष्कर्ष:
किशनगंज विधानसभा सीट पर 2025 का मुकाबला एक बार फिर कांग्रेस, BJP और AIMIM के बीच त्रिकोणीय रहेगा।
- कांग्रेस अपनी ऐतिहासिक जड़ें और महागठबंधन के मुस्लिम-यादव आधार के कारण मजबूत स्थिति में है।
- BJP केवल तभी जीत सकती है जब AIMIM, कांग्रेस के मुस्लिम वोटों में बड़ी सेंध लगा दे और हिंदू वोट पूरी तरह से एकजुट हो जाए।
- AIMIM की भूमिका विजेता नहीं, बल्कि किंगमेकर (वोट-कटवा) की अधिक रहेगी।
अतः, सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, कांग्रेस के इजहारूल हुसैन के बहुत कम अंतर से फिर से यह सीट जीतने की संभावना सबसे अधिक है।