कांटी (मुजफ्फरपुर जिला) विधानसभा सीट – चुनावी रणभूमि का विश्लेषण

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुजफ्फरपुर जिले की कांटी सीट एक बार फिर हॉट सीट बनने वाली है, जहाँ पिछले चुनावों में मुकाबला बेहद करीबी रहा है। इस बार मुख्य मुकाबला महागठबंधन (MGB) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के बीच केंद्रित है।

जीतने वाले उम्मीदवार का अनुमान: मोहम्मद इसराईल मंसूरी (राष्ट्रीय जनता दल – RJD / महागठबंधन)

वर्तमान विधायक और महागठबंधन के उम्मीदवार मोहम्मद इसराईल मंसूरी को अपनी सीट बचाने में सफल होने का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

जीत के संभावित विश्लेषण (इसराईल मंसूरी के पक्ष में):

विश्लेषण बिंदु तथ्य और आंकड़े (इसराईल मंसूरी के पक्ष में)
वर्तमान विधायक और पार्टी का आधार मंसूरी 2020 में RJD के टिकट पर 10,314 वोटों के अंतर से जीते थे। RJD का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण इस सीट पर एक निर्णायक वोट बैंक प्रदान करता है, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय का मजबूत समर्थन उन्हें फिर से निर्णायक बढ़त दिला सकता है।
पिछले चुनाव में सफलता 2020 में, RJD ने JDU और LJP के उम्मीदवारों के होते हुए भी, निर्दलीय लड़े ताकतवर नेता अजीत कुमार को हराया था। यह उनकी व्यक्तिगत अपील और MGB की लहर का संकेत था।
स्थानीय कार्य और छवि विधायक के रूप में, उन्होंने क्षेत्र में पुलों का निर्माण, स्कूलों में सुविधाओं का विस्तार और सामाजिक न्याय के आधार पर काम करने का दावा किया है, जिसका फायदा उन्हें मिल सकता है। ग्रामीण और गरीब तबके में उनकी पैठ मजबूत मानी जाती है।
NDA गठबंधन में सीट की अनिश्चितता NDA में यह सीट JDU के खाते में जाने की अटकलें हैं, जबकि मुख्य प्रतिद्वंद्वी अजीत कुमार BJP से लड़ने की तैयारी कर रहे थे। गठबंधन में यह खींचतान और उम्मीदवार को लेकर भ्रम की स्थिति RJD को सीधा लाभ पहुँचा सकती है।

हारने वाले उम्मीदवार का अनुमान (मुख्य प्रतिद्वंद्वी): अजीत कुमार (जनता दल यूनाइटेड – JDU / NDA) या NDA समर्थित उम्मीदवार

मोहम्मद इसराईल मंसूरी के मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे पूर्व विधायक अजीत कुमार हैं, जो इस बार NDA के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं (संभवतः JDU के टिकट पर, जैसा कि मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है)। अजीत कुमार इस सीट से तीन बार (फरवरी 2005, अक्टूबर 2005, 2010) विधायक रह चुके हैं।

हार के संभावित विश्लेषण (अजीत कुमार के विपक्ष में):

विश्लेषण बिंदु तथ्य और आंकड़े (अजीत कुमार के विपक्ष में)
लगातार दो चुनावों में हार अजीत कुमार 2015 में हम (सेक्युलर) के टिकट पर और 2020 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव हार चुके हैं। लगातार हार उनकी चुनावी अपील और संगठन की ताकत पर सवाल खड़े करती है।
वोटों का विभाजन 2020 में, JDU के मो. जमाल और LJP के विजय कुमार सिंह की मौजूदगी ने NDA विरोधी वोटों का बँटवारा किया, जिसका फायदा RJD को मिला। यदि इस बार भी NDA गठबंधन में मजबूत तालमेल नहीं हुआ या कोई प्रमुख ‘बागी’ मैदान में आया, तो अजीत कुमार की राह मुश्किल हो जाएगी।
दल-बदल की छवि अजीत कुमार LJP, JDU, HAM(S) और निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं। बार-बार दल-बदल से उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं, जबकि मौजूदा विधायक एक ही पार्टी (RJD) से हैं।
कड़े मुकाबले का इतिहास कांटी सीट का इतिहास दर्शाता है कि यहां मुकाबला हमेशा कड़ा रहा है और जीत का अंतर कम रहता है (2020 में 5.30% का अंतर)। मामूली स्विंग भी परिणाम बदल सकती है, लेकिन वर्तमान विधायक को हराना एक बड़ी चुनौती होगी।

निष्कर्ष:

कांटी विधानसभा सीट का मुकाबला मौजूदा विधायक मोहम्मद इसराईल मंसूरी (RJD) और पूर्व विधायक अजीत कुमार (NDA) के बीच एक करीबी लड़ाई होने की संभावना है। मंसूरी को RJD के ठोस M-Y आधार और मौजूदा विकास कार्यों का लाभ मिलेगा। वहीं, अजीत कुमार का व्यक्तिगत जनाधार और NDA का संगठनात्मक बल उन्हें टक्कर में रखेगा। हालाँकि, पिछले चुनाव की जीत और मजबूत MGB वोट बैंक के कारण, मोहम्मद इसराईल मंसूरी को अपनी सीट बरकरार रखने की अधिक संभावना है।


अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि यह विश्लेषण वर्तमान राजनीतिक माहौल, पिछले चुनावों के आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। चुनाव परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं और अंतिम परिणाम मतदान के दिन मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।

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