परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)

समस्तीपुर विधानसभा सीट एक हाई-वोल्टेज सीट रही है, जिस पर 2010 से लगातार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार का कब्ज़ा है।1 हालांकि, 2020 में जीत का अंतर काफी कम हो गया था। इस बार, यह सीट महागठबंधन (INDIA) के पक्ष में थोड़ी झुकी हुई मानी जा रही है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के रुझानों के कारण NDA एक कड़ी चुनौती पेश करेगा।

  • संभावित विजेता (रुझानों के आधार पर): महागठबंधन के उम्मीदवार (RJD के अख्तरुल इस्लाम शाहीन)2

RJD उम्मीदवार की स्थिति मजबूत होने का मुख्य कारण क्षेत्र में MY समीकरण का प्रभुत्व और उनकी लगातार तीन बार की जीत है।


प्रमुख दावेदार और जीत के लिए मुख्य विश्लेषण

उम्मीदवार/पार्टी वर्तमान स्थिति 2020 चुनाव परिणाम मुख्य राजनीतिक गठबंधन
अख्तरुल इस्लाम शाहीन (RJD) मौजूदा विधायक (तीन बार से) 68,507 वोट (जीत) महागठबंधन (INDIA)
NDA उम्मीदवार (संभावित: अश्वमेध देवी – JDU या BJP) उपविजेता (अश्वमेध देवी – JDU) 63,793 वोट (हार) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)

1. अख्तरुल इस्लाम शाहीन (RJD) की जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन की मजबूती)

अख्तरुल इस्लाम शाहीन (RJD) की संभावित जीत का आधार निम्नलिखित कारकों पर टिका होगा:

  • MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण का प्रभुत्व:
    • समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम (16.2%) और यादव मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है। अख्तरुल इस्लाम शाहीन के मुस्लिम होने और RJD के मुख्य आधार का लाभ मिलने के कारण यह वोट बैंक मजबूती से उनके पक्ष में एकजुट होता है।
  • लगातार तीन बार जीत (2010, 2015, 2020):
    • लगातार तीन बार (2010 से) विधायक बनना उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और संगठन पर मजबूत पकड़ को दर्शाता है।3 2015 में उन्होंने बड़ी जीत हासिल की थी।
  • तेजस्वी यादव का आकर्षण और युवा अपील:
    • तेजस्वी यादव का “रोजगार” और “बदलाव” का राज्य-व्यापी अभियान युवाओं को आकर्षित कर रहा है। RJD उम्मीदवार को इसका लाभ मिलना निश्चित है।
  • स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की विरासत का प्रभाव:
    • समस्तीपुर कर्पूरी ठाकुर की कर्मभूमि रही है (1980-85 तक उन्होंने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया)।4 हालांकि, JDU/NDA भी इस विरासत का दावा करते हैं, लेकिन सामाजिक न्याय की राजनीति के कारण RJD के कोर समर्थकों पर इसका भावनात्मक प्रभाव रहता है।

2. NDA उम्मीदवार की जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA की चुनौती)

NDA उम्मीदवार की जीत की संभावनाएँ निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करेंगी:

  • 2024 लोकसभा चुनाव का रुझान:
    • 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA की सहयोगी LJP (रामविलास) ने समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले सभी छह विधानसभा खंडों में बड़ी बढ़त हासिल की थी।5 यह रुझान एक स्पष्ट संकेत है कि यदि NDA वोट एकजुट होता है, तो विधानसभा में परिणाम पलट सकता है।
  • जातीय समीकरण में बिखराव:
    • NDA (JDU+BJP+LJP(RV)) का लक्ष्य सवर्ण, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और कुर्मी/कोइरी वोट को एकजुट करना है।6 समस्तीपुर जिले में EBC वोटबैंक (36%) निर्णायक है, और PM मोदी द्वारा कर्पूरी ठाकुर की विरासत को भुनाने का प्रयास EBC वोट को NDA की ओर मोड़ सकता है।7
  • JDU/BJP का संगठनात्मक समर्थन:
    • यदि NDA इस बार JDU की अश्वमेध देवी (2020 की उपविजेता) के बजाय BJP या LJP(RV) से किसी नए और मजबूत उम्मीदवार को उतारता है, तो यह समीकरण को बदल सकता है, विशेषकर यदि वह सवर्ण (ब्राह्मण/राजपूत) या अति पिछड़ा वर्ग से हो।
  • 2020 में जीत का कम अंतर:
    • 2020 में RJD की जीत का अंतर केवल 4,714 वोट (2.90%) था।8 LJP को मिले 12,074 वोट (7.26%) ने JDU को हराया था।9 इस बार LJP(RV) के NDA में रहने से यह वोट JDU के पक्ष में जाने से RJD की जीत पर खतरा मंडराएगा।

अन्य उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी

महागठबंधन उम्मीदवार (अख्तरुल इस्लाम शाहीन) के लिए प्रतिकूल तथ्य (चुनौतियाँ)

प्रतिकूल तथ्य/चुनौती विश्लेषण
2024 लोकसभा चुनाव का विपरीत रुझान समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र में NDA की बड़ी बढ़त उनके लिए सबसे गंभीर चुनौती है। यह दर्शाता है कि राज्य और केंद्र की नीतियों के कारण गैर-MY वोटबैंक NDA के पक्ष में एकजुट हो रहा है।
घटता जीत का अंतर 2015 में 31,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत के बाद, 2020 में यह अंतर घटकर केवल 4,714 रह गया, जो उनकी घटती लोकप्रियता या NDA की मजबूत चुनौती को दर्शाता है।
स्थानीय मुद्दे (जल जमाव, विकास) स्थानीय लोगों ने जल जमाव जैसे स्थानीय मुद्दों पर मौजूदा विधायक के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है, जिसका फायदा NDA उम्मीदवार उठा सकते हैं।

NDA उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल तथ्य (बाधाएँ)

प्रतिकूल तथ्य/सांख्यिकी विश्लेषण
RJD का पारंपरिक गढ़ यह सीट 2010 से RJD के पास है, और यह क्षेत्र RJD का एक पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इस मजबूत आधार को तोड़ना NDA के लिए मुश्किल होगा।
मुस्लिम-यादव वोट का ध्रुवीकरण समस्तीपुर में MY वोट निर्णायक है। यदि यह वोट बैंक पूरी तरह से RJD के पक्ष में लामबंद होता है, तो NDA के लिए जीत हासिल करना लगभग असंभव होगा, भले ही वह EBC और सवर्ण वोट जुटा ले।
JDU बनाम BJP का आंतरिक संघर्ष यदि NDA में यह सीट JDU को जाती है, तो BJP के स्थानीय कार्यकर्ताओं का पूरा समर्थन नहीं मिलने की आशंका हो सकती है, जो 2020 में भी एक महत्वपूर्ण कारक रहा था।

निष्कर्ष:

समस्तीपुर की लड़ाई मुख्य रूप से MY समीकरण के ध्रुवीकरण और गैर-MY वोटों को एकजुट करने की NDA की क्षमता पर निर्भर करेगी। RJD के अख्तरुल इस्लाम शाहीन अपनी व्यक्तिगत पकड़ और कोर वोट बैंक के कारण मजबूत स्थिति में हैं। हालाँकि, 2020 का कम जीत का अंतर और 2024 लोकसभा का NDA-समर्थक रुझान बताता है कि यह मुकाबला बेहद कड़ा होगा। यदि NDA (विशेषकर LJP-RV के साथ आने से) EBC, सवर्ण और कुर्मी/कोइरी वोटों को पूरी तरह से एकजुट करने में सफल हो जाता है, तो वह राजद के इस गढ़ में उलटफेर कर सकता है। लेकिन वर्तमान सांख्यिकी और क्षेत्रीय इतिहास को देखते हुए RJD उम्मीदवार की स्थिति थोड़ी बेहतर प्रतीत होती है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *